क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड फिर से विवादों में, सचिव समेत 7 के खिलाफ मुकदमा दर्ज
सीएयू के पदाधिकारियों पर खिलाड़ी के साथ मारपीट के आरोप
देहरादून, 22 जून। क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड एक बार फिर विवादों में है। इस बार एक युवा क्रिकेटर के साथ मारपीट और मैच खिलाने के लिए 10 लाख की डिमांड करने का आरोप लगा है। इसके बाद शिकायत के आधार पर देहरादून के बसंत विहार थाने में क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के सचिव महिम वर्मा समेत 7 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

दिसंबर का बताया जा रहा विवाद
क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के साथ एक और विवाद जुड़ गया है। विवाद बीते साल दिसंबर का बताया जा रहा है। आरोप है कि राजस्थान के राजकोट में विजय हजारे टूर्नामेंट के लिए पहुंची उत्तराखंड की क्रिकेट टीम के खिलाड़ी आर्य सेठी के साथ टीम के कोच मनीष झा ने मारपीट और गाली-गलौज की। क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड को इस मामले में कोच मनीष झा की तरफ से शिकायत की गई है, तो आर्य सेठी की तरफ से उनके पिता वीरेंद्र सेठी ने कोच की शिकायत की। आर्य के पिता ने मारपीट, उत्पीड़न समेत कई आरोप लगाए। पुलिस ने इस मामले में लंबे समय तक जांच भी की। जांच रिपोर्ट के आधार डीआईजी देहरादून जन्मेजय खंडूरी ने मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। इसके बाद सोमवार देर रात सीएयू सचिव महिम वर्मा समेत 7 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया गया। आर्य सेठी के पिता की तरफ से केस दर्ज करा दिया गया।
खेल मंत्री ने भी कार्रवाई की करी मांग
खेल से जुड़े मामलों में विवाद बढ़ता देख खेल मंत्री रेखा आर्य ने भी इस पूरे मामले का संज्ञान लिया है। उनका कहना है कि क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड पूरी तरह से बीसीसीआई के अधीन काम करती है लेकिन खिलाड़ियों के साथ इस तरह का दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मामले में एसोसिएशन से बातचीत की जाएगी।
शुरूआत से ही विवादों से है नाता
अगस्त 2019 में क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड से मान्यता मिली। जिसके बाद प्रदेश के युवाओं को उम्मीद जगी कि वे खेल जगत में अपना नाम कमा सकते हैं। लेकिन शुरूआत से ही एसोसिएशन में वर्चस्व की जंग शुरू हो गई। अक्टूबर 2019 में बीसीसीआई के चुनाव में सीएयू के सचिव महिम वर्मा को बीसीसीआई उपाध्यक्ष बनाया गया। सीएयू में सचिव पद को लेकर खींचतान खुलकर सामने आने के बाद महिम वर्मा को उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद कोषाध्यक्ष द्वारा वित्तीय मामलों में हस्ताक्षर नहीं करने और वेंडरों के बिल रुकने के कारण कई तरह के गंभीर आरोप लगते रहे। हाल में एक बार फिर सीएयू पर वित्तीय अनियमितताओं के भी गंभीर आरोप लग चुके हैं। जिसमें सोशल मीडिया में भी कई तरह के आरोप सामने आते रहे। जिसके बाद एसोसिएशन को मीडिया के सामने आकर सफाई देनी पड़ी। क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड का दावा था कि कुछ लोगों द्वारा भ्रामक खबरें फैलाकर एसोसिएशन की गरिमा को धूमिल किया गया है। असत्य और भ्रामक जानकारी के साथ सीएयू को बदनाम किया जा रहा है और ऐसे लोगों के खिलाफ एसोसिएशन कार्रवाई कानूनी लड़ने जा रहा है। यह विवाद रणजी ट्रॉफी 2021-22 सीजन के दूसरे क्वार्टर फाइनल में मुंबई से उत्तराखंड को मिली रिकॉर्ड 725 रनों से हार के बाद सामने आया। जब मीडिया रिपोर्ट्स मे कहा गया कि उत्तराखंड की टीम कागजों पर करोड़ों रुपये खर्च दिखाती है, लेकिन खिलाड़ियों को दैनिक भत्ते के रूप में सिर्फ 100 रुपये देती है। उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए खिलाड़ियों के खाने-पीने के खर्चे को सामने किया। सीएयू के मुताबिक खिलाड़ियों को दैनिक भत्ते के रूप में 49 लाख 58 हजार रुपये दिए गए। खाने-पीने पर 1.74 करोड़ रुपये का खर्चा आया। इस बीच सीएयू के विवाद के बाद एक बार फिर उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ के एक्टिव होने का दावा किया जा रहा है। जो कि सीएयू की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं।












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