उत्तराखंड कांग्रेस में हाईवोल्टेज ड्रामे पर लगा ब्रेक, हरदा कैंप ने दिखाई ताकत, प्रीतम खेमा भी नहीं हुआ पस्त
उत्तराखंड कांग्रेस में हाईवोल्टेज ड्रामे पर लगा ब्रेक, हरदा कैंप ने दिखाई ताकत, प्रीतम खेमा भी नहीं हुआ पस्त
देहरादून, 25 दिसंबर। उत्तराखंड कांग्रेस में दो दिन तक चले हाईवोल्टेज ड्रामे पर फिलहाल पूर्व सीएम हरीश रावत के उत्तराखंड लौटने के साथ ब्रेक लग गया। दिल्ली में हाईकमान से मिलने के बाद पूर्व सीएम हरीश रावत का कहना है कि चुनाव को वो लीड करेंगे हालांकि चुनाव जीतने पर सीएम कौन होगा, ये हाईकमान ही तय करेगा। इस पूरे प्रकरण के बाद ये सवाल उठता है कि हरीश रावत ने जो प्रेशर पॉलिटिक्स शुरू की थी, उसमें वे कितना सफल हो पाए हैं और दूसरा खेमा प्रीतम सिंह पर इस प्रकरण के बाद कितना असर पड़ा है। जहां तक हरीश रावत के चुनाव को लीड करने का सवाल है तो वे चुनाव अभियान समिति को पहले से ही लीड कर रहे हैं। केवल सामूहिक नेतृत्व शब्द हटाकर अब चुनाव को हरीश रावत लीड करना जोड़ा गया है। अब टिकट बंटवारे में हरीश रावत खेमा कितना हावी होता है, इसके लिए कांग्रेस की पहली लिस्ट का इंतजार रहेगा।

दिल्ली से लौटने पर हरदा ने किया शक्ति प्रदर्शन
शनिवार को दिल्ली से लौटने के बाद पूर्व सीएम हरीश रावत का उत्तराखंड बॉर्डर से लेकर हरिद्वार तक कार्यकर्ताओं ने जमकर स्वागत किया। इस दौरान मीडिया से बातचीत में हरीश रावत ने कहा कि कांग्रेस की नीति पूरी तरह से स्पष्ट है। चाहे 2002 के चुनाव हो या 2007, 2012 और 2017 के। कांग्रेस में पहले पूरी पार्टी चुनाव लड़ती है। इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष और पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष ही तय करती है कि मुख्यमंत्री कौन होगा। उन्होंने कहा कि दुल्हन वही जो पिया मन भाए। यह बाद में तय होगा। फिलहाल कांग्रेस संगठित होकर चुनाव लड़ेगी। हरीश रावत ने हाईकमान के सामने अपनी ताकत दिखाकर एक बार फिर विरोधी खेमे पर भी हावी होने की कोशिश की है। जिस तरह से प्रदेश प्रभारी देवेन्द्र यादव और नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह की जोड़ी से हरीश रावत को डर लगने लगा था, वह डर हरीश रावत का दिल्ली से लौटने के बाद कम हो गया है। लेकिन हरीश रावत के इस प्रकरण के बाद कांग्रेस में अब दो गुट हो गए हैं। पहला गुट हरीश रावत और प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का दूसरा गुट देवेन्द्र यादव और प्रीतम सिंह का।
प्रीतम खेमे की हार नहीं
कांग्रेस में ये गुटबाजी अब चुनाव तक साफ नजर आने वाली है। लेकिन इस पूरे प्रकरण में अगर हरीश रावत खेमा खुद की जीत मान रहा है तो दूसरे खेमे प्रीतम खेमे की भी कहीं हार नजर नहीं आ रही है। हरीश रावत न तो सीएम फेस को लेकर हाईकमान पर प्रेशर बना पाए और नहीं प्रदेश प्रभारी को बदल पाए। ये जरुर माना जा रहा है कि राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत को उत्तराखंड चुनाव का ऑब्जर्वर बनवाकर हरीश रावत प्रभारी देवेन्द्र यादव के अधिकार को जरुर कम करवाना चाहते हैं। ऐसे में ये लड़ाई अब लंबी चलनी वाली है। कांग्रेस की और से चुनाव में सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ने की बात प्रदेश प्रभारी देवेन्द्र यादव की और से आई थी। ऐसे में अब कांग्रेस हाईकमान ने हरीश रावत को फ्री हैंड देने का निर्णय लिया है। दिल्ली से लौटते हुए हरीश रावत ने उत्तराखंड बॉर्डर से देहरादून तक शक्ति प्रदर्शन भी किया। जो कि हाईकमान के सामने अपनी जीत को दर्शाने की कोशिश थी लेकिन सवाल ये उठता है कि हरीश रावत न तो सीएम फेस बन पाए और नहीं विरोधी खेमे को किसी तरह का झटका दे पाए। इस शक्ति प्रदर्शन के क्या मायने हैं इसके लिए अभी टिकट बंटवारे तक का इंतजार करना होगा। जब दोनों खेमा आमने सामने होंगे।












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