उत्तराखंड में 23 सीटों पर हार के कारणों का पता लगाएगी भाजपा, 12 पदाधिकारी करेंगे समीक्षा
29 मार्च से होगी शुरू, 1 अप्रैल को सौंपनी होगी रिपोर्ट
देहरादून, 28 मार्च। उत्तराखंड में भाजपा ने सरकार तो बना ली लेकिन मिशन 60 प्लस का टारगेट पूरा नहीं कर पाई। पार्टी को इस बार 47 सीटों पर ही जीत हासिल हुई है। जबकि 23 सीटों पर पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। इनमें कई ऐसी सीटें हैं जहां पार्टी के वीआईपी चेहरे तक चुनाव हार गए। इनमें से एक मुख्यमंत्री की सीट खटीमा सीट भी है। अब पार्टी ने ऐसी सभी सीटों की समीक्षा करने का निर्णय लिया है। जिनकी 29 मार्च से समीक्षा होगी। इसके लिए 12 पदाधिकारियों की नियुक्ति की गई है।

23 सीटों पर हुई हार
2017 के विधानसभा चुनाव में उत्तराखंड में भाजपा ने 57 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत की सरकार बनाई। लेकिन 2022 के चुनाव में पार्टी की 10 सीटें कम हो गई हैं। इतना ही नहीं पार्टी का सीएम चेहरा ही अपना चुनाव हार गया। ऐसे में पार्टी अब हारी हुई 23 सीटों की समीक्षा करने जा रही है। पार्टी का कहना है कि भाजपा संगठन प्रदेश में 23 ऐसी विधान सभा सीट जहां पर पार्टी को अपेक्षा के अनुरूप सफलता नहीं मिली है उनकी 29 मार्च से समीक्षा करेगी।पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने बताया कि जिन विधानसभाओं अपेक्षा अनुरूप नहीं मिले हैं उन विधानसभाओं मे पार्टी ने वरिष्ठ पदाधिकारियों को भेजकर समीक्षा करने का निर्णय लिया है। पदाधिकारियों को विधानसभा मे जाकर 1 अप्रैल से पूर्व बैठकें कर रिपोर्ट मुख्यालय को देने के लिए कहा गया है। विधानसभा मे जाने वाले पदाधिकारियों को तीन प्रकार की बैठकें कर रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है। विभिन्न विधान सभा क्षेत्रों मे समीक्षा बैठकें 29 मार्च से होगी। बैठकें सामूहिक बैठक, टोली बैठक और चर्चा बैठक मे कार्यकर्ताओ के साथ वार्तालाप किया जाएगा। 1 अप्रैल को समीक्षा बैठक की रिपोर्ट मुख्यालय को सौंप दी जाएगी।

कई वीआईपी सीट भी शामिल
पार्टी को जिन सीटों पर हार का सामना करना पड़ा, उनमें
यमुनोत्री, बद्रीनाथ, प्रताप नगर, चकराता, ज्वालापुर, भगवानपुर, पिरान कलियर, लक्सर, खानपुर, झबरेड़ा, मंगलौर, हरिद्वार ग्रामीण, धारचूला, पिथौरागढ़, द्वाराहाट, अल्मोड़ा, लोहाघाट, हल्द्वानी,जसपुर, बाजपुर, किच्छा, नानकमत्ता, खटीमा सीटें हैं। खास बात ये है कि इनमें से अधिकतर सीटों पर पार्टी भितरघात के कारण हारी है। जिसको लेकर प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक पर तक आरोप लगे हैं। ऐसे में पार्टी के लिए समीक्षा रिपोर्ट तैयार करनी आसान नहीं है। साथ ही जिन पूर्व विधायकों ने भितरघात के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन पर पार्टी की समीक्षा के आधार पर कार्रवाई करना आसान नहीं होगी। साथ ही मुख्यमंत्री की सीट पर हार के कारणों को तलाशना और वहां कार्रवाई करना भी आसान नहीं होगा।

पार्टी विवादों को करना चाहती है खत्म
आने वाले दिनों में समीक्षा के बाद भी कार्रवाई होनी तय है। जिसमें सबसे पहले प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर भी खतरा मंडरा सकता है। पार्टी आने वाले लोकसभा चुनाव को देखते हुए किसी तरह का विवाद नहीं होने देना चाह रही है। इसी का कारण है कि पार्टी सरकार बनाने के बाद भी हारी 23 सीटों पर हार की समीक्षा कर रही है। इस समीक्षा में सबसे बातचीत कर हार के कारणों का पता लगाया जाएगा। जिसके बाद हाईकमान भविष्य के लिए उन सभी कारणों पर फोकस करेगी।












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