मोदी के केदारनाथ दौरे से BJP ने साधे कई समीकरण, हरक सिंह प्रकरण पर भी डेमेज कंट्रोल की कोशिश
मोदी के केदारनाथ दौरे से BJP ने साधे कई समीकरण, हरक सिंह प्रकरण पर भी डेमेज कंट्रोल की कोशिश
देहरादून, 6 नवंबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केदारनाथ दौरे ने चुनावी साल में भाजपा के लिए नई संजीवनी देने का काम किया है। केदारनाथ दौरे से भाजपा में जोश भरने के अलावा एकजुटता दिखाने की कोशिश भी की गई है। इस पूरे प्रकरण में सबसे ज्यादा हरक सिंह रावत को तवज्जो देना माना जा रहा है। केदारनाथ में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में हरक सिंह रावत को मंच पर खास जगह दी गई है। जिसके नए सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।

पीएम के मंच में मिली खास जगह
पहली बार भी जब पीएम ऋषिकेश दौरे पर आए थे तब हरक सिंह की पीठ थपथपाई गई। इतना ही नहीं पीएम मोदी ने खुद हरक सिंह को पूछकर कहा था कि हरक सिंह कैसी चल रही हनक। इस बात को हरक सिंह ने भी सार्वजनिक किया था। अब पीएम मोदी के मंच पर हरक सिंह को खास जगह मिलना भी भाजपा का नया सियासी दांव माना जा रहा है। भाजपा के अंदरखाने ये भी चर्चा है कि कांग्रेस में जाने की हरक सिंह की सुगबुगाहट के बीच पार्टी हरक को डेमेज कंट्रोल करने में जुटी है। पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात, उसके बाद गृह मंत्री अमित शाह के साथ लंच डिप्लोमैसी और अब पीएम मोदी के साथ मंच साझा करना, जिसमें सीएम पुष्कर सिंह धामी की बगल वाली सीट मिलना भी भाजपा के अंदर चल रहे खींचतान की एक प्रमुख वजह मानी गई है। सतपाल महाराज, सुबोध उनियाल और दूसरे नेताओं को दरकिनार कर हरक सिंह को ही पीएम से मंदिर परिसर में मुलाकात, मंच साझा करने और ब्रह्रमकमल देने का मौका दिया गया है। जिसके बारे में हरक सिंह पीएम मोदी को समझाते और बात करते भी नजर आए। बोर्ड को लेकर केदारनाथ में चल रहे पुरोहितों के विरोध के लिए भी हरक सिंह को सीएम ने बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। हरक सिंह पुरोहितों को समझाने में जुटे है।

केदारनाथ से चुनाव लड़ने के भी संकेत
इसके साथ ही हरक सिंह के कोटद्वार से केदारनाथ विधानसभा पर किस्मत आजमाने की चर्चा है। केदारनाथ सीट पर वर्तमान में कांग्रेस के खाते में है। इस बार भाजपा केदारनाथ में नए चेहरे पर दांव खेल सकती है। इसके लिए हरक सिंह के नाम की चर्चा भी चल रही है। केदारनाथ सीट के समीकरण हरक सिंह के लिहाज से फिट बैठता हुआ नजर आ रहा है। इस सीट पर 2012 में कांग्रेस की शैलारानी रावत विधायक चुनकर आई थी, जो कि 2016 में कांग्रेस में हुए विद्रोह में भाजपा में चली गई। जिसका नेतृत्व हरक सिंह रावत ने किया था। 2017 में कांग्रेस से मनोज रावत विधायक चुनकर आए। इस बार भाजपा इस सीट पर जिताउ प्रत्याशी उतारना चाहती है। जिसमें हरक सिंह फिट बैठते है।

कांग्रेस जाने की चर्चा के बाद से भाजपा साधने में जुटी
यशपाल आर्य के कांग्रेस में जाने के बाद से हरक सिंह के कांग्रेस में वापसी की चर्चा तेज हो गई है। हरक सिंह को लेकर पूर्व सीएम हरीश रावत के तेवर बदलने से भी हरक के पाले बदलने की चर्चा तेज हो गई है। इसके बाद से भाजपा हरक सिंह को डेमेज कंट्रोल में जुटी है। भाजपा ने प्रदेश नेतृत्व से लेकर हाईकमान तक को हरक सिंह को साधने में लगा दिया है। हरक सिंह भी अपनी राजनीतिक इच्छाशक्ति के अनुरूप अपना दांव खेलने में लगे हैं। इसके लिए हरक सिंह भाजपा हाईकमान पर प्रेशर बना रहे हैं। हरक सिंह शुरूआत से ही दबाव की राजनीति के माहिर माने जाते हैं। इसके पीछे हरक सिंह की प्रेशर पॉलिटिक्स और जिताउ फेस माना जाता है। हरक सिंह अगर कांग्रेस में जाते हैं तो उनके साथ दूसरे विधायक भी टूट सकते हैं। साथ ही हरक सिंह चुनाव जीतने में सबसे माहिर माने जाते हैं। ऐसे में भाजपा हरक सिंह को चुनाव में बड़ी जिम्मेदारी देने की तैयारी भी कर रही है। इसके लिए दिल्ली में हाईकमान की हरक सिंह के साथ बैठक भी हो चुकी है।












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