चंपावत उपचुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका, 40 वर्षों तक पार्टी में रहे इन बड़े नेता ने दिया इस्तीफा
कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट ने इस्तीफा दिया
देहरादून, 6 मई। उत्तराखंड में कांग्रेस को चंपावत उपचुनाव से पहले बड़ा झटका लगा है। प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट ने कांग्रेस में चल रही गुटबाजी, धड़ेबाजी से नाराज होकर इस्तीफा दिया है। जोत सिंह बिष्ट ने सोशल मीडिया के जरिए पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है। जोत सिंह बिष्ट 40 सालों से कांग्रेस के साथ जुड़े रहे और धनोल्टी से कांग्रेस प्रत्याशी भी रहे। बिष्ट ने किशोर उपाध्याय, प्रीतम सिंह के साथ संगठन में अहम भूमिका निभाई। जबकि 2022 के विधानसभा चुनाव में बिष्ट हरीश रावत के करीबी नेताओं में शामिल रहे हैं।

कांग्रेस में सुधार की गुंजाइश न होने की कही बात
धनोल्टी सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी रहे और संगठन में लंबे समय तक अहम जिम्मेदारी निभा चुके जोत सिंह बिष्ट ने कांग्रेस से इस्तीफा दिया है। जोत सिंह बिष्ट ने अपने चुनाव में भितरघात का आरोप लगाया है। बिष्ट ने सोशल मीडिया में पार्टी को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। बिष्ट ने लिखा है कि जिस तरह पार्टी में अंतर्कलह, अनुशासन हीनता, निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी व एक तरफा फैसले लिए जा रहे हैं, उससे इसमें मुझे अब दूर दूर तक सुधार की कोई गुंजाइश नहीं दिखाई देती है। साफ है बिष्ट ने हाईकमान के फैसलों पर भी सवाल उठाए हैं।
जोत सिंह बिष्ट का फेसबुक पोस्ट
मैंने अपने राजनीतिक जीवन के 40 वर्षों का सफर तय किया है। आज आप सभी साथियों को अत्यंत दुःखी मन से सूचित कर रहा हूँ कि कांग्रेस पार्टी में लंबे समय से चल रहे अंतर्कलह, अनुशासन हीनता, निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी व एक तरफा फैसलों के चलते पार्टी का भविष्य अनिश्चितता की ओर जा रहा है। नेतृत्व की पांत में बैठे लोग लगातार हार के बाद भी सबक लेने के बजाय व्यक्तिगत हितों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इसमें मुझे अब दूर दूर तक सुधार की कोई गुंजाइश नहीं दिखाई देती है, इसलिए किसी पर किसी प्रकार का व्यक्तिगत आरोप न लगाकर तथा कोई व्यक्तिगत दुर्भावना रखे बिना मैं कांग्रेस पार्टी के सभी पदों के साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे रहा हूँ।
संगठन को चलाने का था खासा अनुभव
बिष्ट ने अपने पोस्ट में पार्टी और नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जिससे एक बार फिर साफ हो गया कि जिस तरह हाईकमान ने प्रदेश अध्यक्ष से लेकर नेता प्रतिपक्ष पद पर एकतरफा फैसला लिया है। उससे पार्टी के अंदर गुटबाजी चरम पर है और गढ़वाल के नेताओं में नजरअदांज करने को लेकर नाराजगी है। ऐसे में नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा के लिए ये बड़ा झटका माना जा रहा है। जोत सिंह बिष्ट के अंदर पूरा संगठन चलाने का अनुभव है। वे कई प्रदेश अध्यक्षों के साथ पार्टी में काम कर चुके हैं। जिससे कांग्रेस के लिए उपचुनाव से पहले ये बड़ा झटका माना जा रहा है। जोत सिंह बिष्ट किशोर उपाध्याय, प्रीतम सिंह और हरीश रावत सबके साथ कदम से कदम मिलाकर काम कर चुके हैं। 2022 में बिष्ट को धनोल्टी से टिकट दिलाने में हरीश रावत का अहम रोल रहा है। बिष्ट ने हरीश रावत के हर कैंपेन में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। लेकिन चुनाव में बिष्ट ने खुद के साथ भितरघात होने का गंभीर आरोप लगाया। जोत सिंह बिष्ट ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं कि वे भाजपा में जा रहे हैं या फिर फिलहाल सक्रिय राजनीति से दूर रहेंगे।












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