रिजल्ट से पहले ही कांग्रेस में सीएम की कुर्सी के लिए खींचतान, भाजपा में प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी खतरे में
रिजल्ट से पहले ही भाजपा, कांग्रेस में उठापटक जारी
देहरादून, 18 फरवरी। उत्तराखंड में मतदान निपटने के बाद अब सियासी दलों को रिजल्ट का इंतजार है। हालांकि रिजल्ट से पहले ही भाजपा, कांग्रेस में उठापटक जारी है। कांग्रेस में जहां मुख्यमंत्री को लेकर पहले ही खींचतान शुरू हो गई है, तो भाजपा में भितरघात के आरोपों ने रिजल्ट से पहले ही पार्टी की टेंशन बढ़ा दी है। जिसका असर रिजल्ट पर भी पड़ना तय है।

कांग्रेस में सीएम की दावेदारी शुरू
प्रदेश में सभी 70 विधानसभा सीटों पर एक साथ 14 फरवरी को मतदान सम्पन्न हो गए हैं। मतदान का प्रतिशत भी पिछले साल की तुलना में कुछ कम ही हुआ है। इससे भी सियासी दलों की टेंशन बढ़ा दी है। हालांकि कुछ एक्सपर्ट्स 2017 के चुनाव परिणाम की तरह ही इस बार स्पष्ट बहुमत मिलने का दावा कर रहे हैं। लेकिन साइलेंट वोट और महिलाओं के मत प्रतिशत बढ़ने से सियासी दलों की टेंशन जरुर बढ़ गई है। इधर मतदान के बाद सबसे ज्यादा उत्साहित कांग्रेस नजर आ रही है। कांग्रेस स्पष्ट बहुमत का दावा तो कर ही रही है, लेकिन मुख्यमंत्री पद को लेकर भी अभी से रेस शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री को लेकर सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बयान दे दिया है। हरीश रावत ने हाईकमान को भी स्पष्ट संदेश दिया है, कि वे मुख्यमंत्री नहीं बने तो घर बैठेंगे। साफ है कि हरीश रावत को मुख्यमंत्री बनने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं चाहिए। इस बयान के बाद हरीश रावत के समर्थकों ने जहां खुलकर समर्थन किया है। वहीं विरोधी खेमा भी सक्रिय हो गया है। नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने मुख्यमंत्री के फैसले को केन्द्रीय नेतृत्व और आलाकमान के निर्णय के बाद ही लेने की बात की है। जबकि हरीश रावत के धुर विरोधी रणजीत रावत ने विधानमंडल दल की बैठक में मुख्यमंत्री को लेकर होने वाले निर्णय की बात की है। साफ है कि कांग्रेस में अभी से मुख्यमंत्री को लेकर खींचतान शुरू हो गई है। जिसका असर रिजल्ट के बाद भी नजर आ सकता है। जो कि कांंग्रेस के लिए आने वाले समय में टेंशन दे सकता है।
भाजपा में प्रदेश अध्यक्ष ही विवादों में
सत्ताधारी भाजपा चुनाव में मिशन 60 प्लस का नारा देती रही। लेकिन चुनाव सम्पन्न होते ही भितरघात को लेकर आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए है। जिसको लेकर भाजपा की मुसीबत बढ़नी तय है। इसका खामियाजा पार्टी को चुनाव बाद भुगतना पड़ सकता है। इसके लिए पार्टी ने अभी से प्रदेश स्तर के नेताओं को लगा दिया है। जो कि इन आरोपों की जांच करने में जुट गए हैं। पार्टी के लिए सबसे बड़ी मुसीबत प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक पर लग रहे भितरघात के आरोपों की जांच करवाना है। लक्सर विधायक संजय गुप्ता ने प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक पर ही उन्हें चुनाव में हराने का आरोप लगाया है। इतना ही नहीं मदन कौशिक पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पार्टी इन आरोपों के बाद बैकफुट में आ गई है। पार्टी सूत्रों का दावा है कि मदन कौशिक पर जांच के बाद आरोप सही साबित होने पर कार्रवाई तय है। जिस तरह के गंभीर आरोप लगे हैं, उससे उनकी कुर्सी से विदाई तय मानी जा रही है। हालांकि ये सभी 10 मार्च के बाद ही संभव है। मदन कौशिक जिन परिस्थितियों में प्रदेश अध्यक्ष बने हैं। तब से भाजपा कार्यकर्ताओं में इसको लेकर कई बार विरोधाभास भी नजर आए हैं। मदन कौशिक हरिद्वार से आते हैं, जो कि तराई क्षेत्र है। सियासी दल अभी तक गढ़वाल, कुमाऊं से ही प्रदेश अध्यक्ष बनाते आ रहे हैं। पहली बार भाजपा ने तराई से प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। जो कि एक नया प्रयोग माना गया। मदन कौशिक को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत को कैबिनेट मंत्री बनाया गया था। इस तरह सीटों की अदला बदली की गई। लेकिन मदन कौशिक को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के बाद नई बहस शुरू हो गई थी। अब चुनाव में मदन कौशिक पर भितरघात के आरोप से मदन कौशिक की कुर्सी पर खतरा मंडराने लगा है। इसके अलावा भितरघात के आरोपों से भाजपा को चुनाव में नुकसान होना भी तय है। जिसका असर चुनावी रिजल्ट में दिखना तय है।












Click it and Unblock the Notifications