चुनाव निपटते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अब पूर्व मुख्यमंत्रियों की शरण में, जानिए इसके सियासी मायने
सीएम धामी निशंक और त्रिवेंद्र से कर चुके हैं मुलाकात
देहरादून, 21 फरवरी। चुनाव निपटते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अब पूर्व मुख्यमंत्रियों की शरण में पहुंच रहे हैं। धामी पहले पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक और अब त्रिवेंद्र सिंह रावत से मिले हैं। दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों से मिलने के पीछे के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। रमेश पोखरियाल निशंक और त्रिवेंद्र सिंह रावत दोनों की भाजपा के प्रदेश में बड़े चेहरे और प्रमुख रणनीतिकार माने जाते हैं, जो कि कई विधायकों का नेतृत्व भी करते आ रहे हैं। ऐसे में किसी भी तरह के समर्थन की स्थिति में धामी के लिए ये दोनों चेहरे साथ होने जरुरी है। ऐसे में धामी का पूर्व मुख्यमंत्रियों से मिलना दूसरी पारी की फिल्डिंग सजाने की तैयारी मानी जा रही है।

निशंक और त्रिवेंद्र ही हैं सक्रिय
प्रदेश भाजपा में राजनीति रूप से सक्रिय नेताओं में डॉ रमेश पोखरियाल निशंक और त्रिवेंद्र सिंह रावत ही इस समय सबसे बड़े चेहरे हैं। जिनकी विधायकों में भी अच्छी पेंठ मानी जाती है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री की दौड़ में भी ये ही दो चेहरे माने जा रहे हैं। हाईकमान भले ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में ही सरकार बनाने का दावा करता आ रहा है। लेकिन परिणामों में किसी तरह के सहयोग के लिए दूसरे दलों पर निर्भरता बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में पार्टी को पुराने अनुभवी दिग्गजों की आवश्यकता पड़ेगी। ऐसे में पुष्कर सिंह धामी चुनाव निपटते ही दोनों दिग्गजों की शरण में पहुंचे। हालांकि मुख्यमंत्री ने इसे शिष्टाचार भेंट बताया, लेकिन इस दौरान चुनावी समीकरणों पर भी बातचीत हुई है। टिकट बंटवारे के बाद जिस तरह पार्टी में बगावती सुर नजर आ रहे थे, उसे दूर करने में डॉ रमेश पोखरियाल निशंक और त्रिवेंद्र सिंह रावत की अहम भूमिका मानी जा रही है। जिस कारण कई संभावित विधायक भी इन नेताओं की परिक्रमा कर रहे है।

दोनों की चुनाव बाद हो सकती है अहम भूमिका
हाईकमान से सीधे संवाद स्थापित करने वाले निशंक और त्रिवेंद्र इस समय उत्तराखंड की राजनीति के अहम किरदार माने जा रहे हैं। डॉ रमेश पोखरियाल निशंक जोड़ तोड़ और दूसरे दलों के नेताओं से संपर्क करने में माहिर माने जाते हैं। जबकि त्रिवेंद्र का भाजपा के कई विधायकों में सीधा संवाद रहता है। अक्सर नाराजबी दर्ज कराने वाले विधायक त्रिवेंद्र रावत से अपनी पीड़ा जरुर शेयर करते है। ऐसे में धामी के लिए इस सयम दोनों पूर्व मुख्यमंत्री का साथ होना जरुरी बताया जा रहा है। जिस वजह से धामी फिलहाल दोनों मुख्यमंत्रियों की शरण में पहुंच चुके हैं।

डेमेज कंट्रोल में माहिर हैं दोनों नेता
भाजपा में प्रथम पंक्ति के सीनियर नेताओं में निशंक और त्रिवेंद्र ही आते हैं। जो कि पार्टी के डेमेज कंट्रोल को रोकने के अलावा दूसरी परिस्थितियों को भी हैंडल कर सकते हैं। चुनाव में भी डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने घोषणा पत्र को तैयार करने में अहम भूमिका निभाई, जबकि त्रिवेंद्र रावत ने कई सीटों पर प्रत्याशियों के पक्ष में प्रचार-प्रसार किया। इस तरह से दोनों नेताओं को प्रदेश में चुनाव बाद होने वाले राजनीतिक समीकरणों को लेकर भी खासा अनुभव हो सकता है। इसके साथ ही दोनों को बतौर मुख्यमंत्री प्रदेश का नेतृत्व करने का भी अच्छा अनुभव है। जिसका लाभ धामी को मिल सकता है।












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