Kedarnath dham भुकुंट भैरव की पूजा के बाद ही बाबा केदार की आरती, जानिए क्या है पौराणिक मान्यता
बाबा केदार के क्षेत्ररक्षक माने जाने वाले भैरवनाथ भगवान के कपाट भी खुल गए हैं। इसके बाद ही केदारनाथ की आरती लगती है। केदारनाथ धाम के कपाट शुक्रवार को अक्षय तृतीया पर्व पर खुल गये थे।
शनिवार को केदारनाथ धाम में स्थित बाबा केदार के क्षेत्ररक्षक भगवान भैरवनाथ के कपाट भी खुल गये। केदारनाथ धाम के मुख्य पुजारी शिवशंकर लिंग ने भैरवनाथ के कपाट खोले।

भैरवनाथ भगवान केदारनाथ के क्षेत्ररक्षक के रूप में पूजे जाते हैं। मान्यता के अनुसार जब केदारनाथ के कपाट बंद होते हैं, तो भैरवनाथ भगवान ही समस्त केदारनगरी की रक्षा करते हैं।
जब तक भैरवनाथ के कपाट नहीं खोले जाते हैं, तब तक केदारनाथ भगवान की आरती नहीं होती है और भोग भी नहीं लगता है। भैरवनाथ के कपाट सिर्फ मंगलवार या फिर शनिवार को खोले जाते हैं।
बता दें कि केदारनाथ के कपाट अक्षय तृतीय पर करीब 29 हजार श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन किए। भगवान शिव के 12 ज्योर्तिलिंग में से एक केदारनाथ धाम के प्रति भक्तों की असीम आस्था है। लेकिन मान्यता है कि केदारनाथ से पहले भगवान भैरवनाथ की पूजा होती है और इनके बिना भगवान शिव का दर्शन अधूरा माना गया है।
मान्यता है कि ये शीतकाल में केदारनाथ मंदिर की रखवाली करते हैं। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, देश में जहां-जहां भगवान शिव के सिद्ध मंदिर हैं, वहां-वहां कालभैरवजी के मंदिर भी हैं। भक्त भगवान शिव के दर्शन के साथ भैरव जी के मंदिर में आकर सिर झुकाते हैं तब उनकी तीर्थ यात्रा पूर्ण मानी जाती है। इसी तरह केदारनाथ में भी भुकुंट भैरव भैरवनाथ का मंदिर है।
भुकुंट भैरव का यह मंदिर केदारनाथ मंदिर से आधा किमी दूर दक्षिण दिशा में स्थित है। यहां मूर्तियां बाबा भैरव की हैं जो बिना छत के स्थापित की गई हैं। भैरव को भगवान शिव का ही एक रूप माना जाता है। पुजारियों के अनुसार, हर साल मंदिर के कपाट खोले जाने से पहले मंगलवार और शनिवार को भैरवनाथ की पूजा की जाती है।









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