Zafaryab Jilani is no more: जानिए कौन थे जफरयाब जिलानी, जिन्होंने 3 दशक तक की बाबरी मामले की पैरवी

Zafaryab Jilani is no more: तीन दशक तक बाबरी मस्जिद की पैरवी को लेकर जफरयाब जिलानी सुर्खियों में बने रहे। बुधवार को लंबी बीमारी के बाद उनका इंतकाल हो गया।

जफरयाब जिलानी

Zafaryab Jilani death: बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के अध्यक्ष व यूपी के अपर महाधिवक्ता रह चुके जफरयाब जिलानी का बुधवार को लंबी बीमारी के बाद देहांत हो गया। जफरयाब जिलानी मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के मेंबर थे और बाबरी विवादित ढांचे की पैरवी को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहे। जफरयाब को करीब से जानने वाले बताते हैं कि उन्होंने करीब तीन दशक तक राम मंदिर-बाबरी ढांचा विवाद की पैरवी की थी। इसको लेकर वो देश ही नहीं दुनियाभर में छाये रहे।

दो साल पहले हुआ था ब्रेन हैमरेज

जिलानी के करीबीयों की माने तो दो साल पहले ही उनको ब्रेन हैमरेज हुआ था। कुछ समय पहले गिरने से उनके पैर में चोट आई थी। इसके बाद से ही उनकी तबियत खराब चल रही थी। जिलानी को काफी करीब से जानने वाले वरिष्ठ मौलवी खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि,

जफरयाब जिलानी ने विभिन्न अदालतों में बाबरी मस्जिद का मामला लड़ा और वह विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के सचिव होने के साथ-साथ बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक भी थे। मुझे उम्मीद है कि अल्लाह उन्हें क्षमा और शक्ति देगा. जिन लोगों को उसने पीछे छोड़ दिया है।

हाइकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट में की बाबरी विवादित ढांचे की वकालत

दरसअल अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) के सचिव, 74 वर्षीय वरिष्ठ अधिवक्ता जफरयाब जिलानी की तबियत कुछ समय से खराब चल रही थी। बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता जिलानी ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष राम जन्मभूमि मामले में दलीलें पेश कीं। उन्होंने पहले उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त महाधिवक्ता के रूप में भी कार्य किया था।

1986 मे किया था बाबरी एक्शनी कमेटी का गठन

फैजाबाद में बाबरी मस्जिद मस्जिद पर ताले खोलने के जिला न्यायाधीश के आदेश के बाद फरवरी 1986 में बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी का गठन किया गया। समिति का उद्देश्य धर्मस्थल का समर्थन करना और बढ़ते हिंदुत्व आंदोलन का मुकाबला करना था।

बाद में कमेटी के संयोजक भी बने

जिलानी को समिति का संयोजक नियुक्त किया गया। तब से जिलानी ने अपना जीवन बाबरी मस्जिद के लिए समर्पित कर दिया। 6 दिसंबर, 1992 को दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं की भीड़ ने मस्जिद को ध्वस्त कर दिया। 2019 में, जब सुप्रीम कोर्ट ने भूमि विवाद मामले का निपटारा किया, तो जिलानी ने इस मामले में दिए गए व्यापक समय के लिए कोई खेद नहीं व्यक्त किया।

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