पूर्वांचल एक्सप्रेस वे क्यों बना राजनीतिक दलों के लिए सियासी अखाड़ा, जानिए वजह
लखनऊ, 16 नवंबर: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी, सपा और बसपा समेत तमाम राजनीतिक दलों ने रणनीति बनानी शुरू कर दी है। राजनीतिक गलियारों में माना जाता है कि उत्तर प्रदेश में सत्ता की राह पूर्वांचल से ही गुजरती है। पूर्वांचल के 28 जिले राज्य की राजनीतिक स्थिति और दिशा तय करते हैं। ऐसा पिछले दो चुनावों से देखा जा रहा है कि सत्ता की चाबी जिसके पास रहती है वहीं यूपी का सियासी रण जीतता है। यही वजह है कि पूर्वांचल एक्सप्रेस वे को लेकर सपा-बीजेपी आमने सामने हैं। सपा के कार्यकर्ताओं ने पीएम से पहले ही मंगलवार को एक्सप्रेस वे के शुभारंभ का दावा किया तो अखिलेश ने उसे ट्वीट कर बीजेपी सरकार पर जोरदार हमला बोला है।
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बीजेपी पूर्वांचल को साधना चाहती है
इनमें वाराणसी, जौनपुर, भदोही, मिर्जापुर, सोनभद्र, प्रयागराज, गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, महाराजगंज, संत कबीर नगर, बस्ती, आजमगढ़, मऊ, गाजीपुर, बलिया, सिद्धार्थनगर, चंदौली, अयोध्या, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, सुल्तानपुर, अमेठी, प्रतापगढ़, कौशाम्बी और अंबेडकरनगर। चुनावी जंग में बीजेपी पीएम नरेंद्र मोदी से पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन करवाकर 28 जिलों की 164 सीटें हासिल करने की कोशिश में है।

मोदी आज करेंगे उद्घाटन
340.82 किमी लंबे पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन 16 नवंबर को होगा बताया जा रहा है कि 16 नवंबर को पीएम नरेंद्र मोदी 42 हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार 340.82 किलोमीटर लंबे पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन करने सुल्तानपुर आ रहे हैं। प्रधानमंत्री कुरेभर थाना क्षेत्र के अरवलकिरी अक्रावत में हवाई पट्टी पहुंचेंगे। यहां पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन के साथ ही वह सुल्तानपुर समेत पूर्वांचल के जिलों को अन्य विकास योजनाओं की सौगात भी देंगे।

पूर्वी और पश्चिमी यूपी में कम होगी दूरियां
प्रधानमंत्री मोदी ने जुलाई 2018 में आजमगढ़ में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ड्रीम प्रोजेक्ट कहा जाता है, का शिलान्यास किया था। इस एक्सप्रेस-वे को पूर्वी यूपी की जीवन रेखा कहा जा रहा है. इस एक्सप्रेस-वे पर लखनऊ से गाजीपुर होते हुए आजमगढ़ और मऊ जाने वाले वाहनों की रफ्तार समय के हिसाब से पूर्वी और पश्चिमी यूपी के बीच की दूरी को कम कर देगी। वहीं व्यापार और वाणिज्य को भी पंख मिलेंगे।

फीता आया लखनऊ से, कैंची दिल्ली से
अखिलेश ने मंगलवार सुबह ही एक्सप्रेस वे को लेकर एक ट्वीट किया है जिसमें उन्होंने लिखा है कि, ''फ़ीता आया लखनऊ से और नयी दिल्ली से कैंची आई, सपा के काम का श्रेय लेने को मची है 'खिचम-खिंचाई'आशा है अब तक अकेले में बैठकर लखनऊवालों ने 'समाजवादी पूर्वांचल एक्सप्रेसवे' की लंबाई का आंकड़ा रट लिया होगा। सपा 'बहुरंगी पुष्पवर्षा'से इसका उद्घाटन करके एकरंगी सोचवालों को जवाब देगी।''

डबल इंजन की सरकार से डबल परेशान हैं अखिलेश
अखिलेश यादव के इस ट्वीट के जवाब में बीजेपी अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने उनपर पलटवार किया। स्वतंत्रदेव ने अपने ट्विट में लिखा, " यूपी में डबल इंजन की सरकार की रफ्तार से अखिलेश जी डबल परेशान है! अखिलेश जी सोच में डूबे हुए है कि कैसे 341km लंबा पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे बन गया और 1 रू. का भी भ्रष्टाचार नहीं हुआ...यदि वो सत्ता में होते तो 2-लेन एक्सप्रेस-वे बनाते और बाकी 4-लेन का पैसा अपनी तिजोरी में भर लेते।''

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे की विशेषताएं
- इस एक्सप्रेस-वे की कुल लंबाई 340.24 किमी है। इसे बलिया तक बढ़ा दिया गया है।
- लखनऊ के चांदसराय से शुरू होकर बाराबंकी, सुल्तानपुर आजमगढ़ होते हुए गाजीपुर के हैदरिया में समाप्त होता है।
- पूरी योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए पूरे एक्सप्रेसवे को 8 पैकेजों में बांटा गया है।
- छह लेन के इस प्रोजेक्ट को बाद में आठ लेन तक बढ़ाया जा सकता है।
- यह एक्सप्रेस-वे 9 जिलों से होकर गुजर रहा है, बिहार के कुछ जिलों को भी इसका लाभ मिलेगा।
- 3300 मीटर लंबी हवाई पट्टी के साथ उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसके पास एक्सप्रेस-वे पर दो हवाई पट्टी हैं।
- इस हवाई पट्टी को सुल्तानपुर जिले के कुरेभर के पास बनाया गया है।












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