गाजीपुर सदर सीट पर अपनों को क्यों साधने में जुटीं राज्य मंत्री संगीता बलवंत, जानिए

लखनऊ, 21 फरवरी: उत्तर प्रदेश में गाजीपुर सदर सीट पर यूपी सरकार में सहकारिता राज्य मंत्री संगीता बलवंत गाजीपुर सदर से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। वहीं टिकट न मिलने पर अरुण सिंह ने खुलकर विरोध किया था। ऐसा जाना माना नाम है जिसने बीजेपी के मुश्किल दिनों में बीजेपी की रौशनी को जिंदा रखा। लेकिन जब बीजेपी के अच्छे दिन आए तो उन्होंने जन प्रतिनिधि बनने का सपना देखा था, लेकिन टिकट न मिलने पर खुलकर विरोध किया, जिसके चलते उन्हें बीजेपी से बाहर होना पड़ा. ऐसे में आज वह हत्या के एक मामले में जेल में हैं। लेकिन मौजूदा विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा के गाजीपुर सदर ने भाजपा से निष्कासित अरुण सिंह की शरण में शरण ली. इस चुनाव में सिंह की पत्नी जिसके बाद उन्होंने बड़े दिल से साथ देने का वादा किया।

बीजेपी

संगीता बलवंत को मिला अरुण सिंह का साथ

जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह की पत्नी शीला सिंह ने भाजपा गाजीपुर सदर प्रत्याशी डॉ. संगीता बलवंत के सिर पर हाथ रखकर जीत का आशीर्वाद दिया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जीत के झंडे को मजबूत करना चाहिए। इसके लिए मैं अपने सभी साथियों सहित भाजपा प्रत्याशी डॉ. संगीता बलवंत को प्रचंड जीत के लिए तहे दिल से समर्थन दूंगा।

2014 में अरुण सिंह टिकट के प्रबल दावेदार थे

संगीता बलवंत ने कहा कि अरुण सिंह जी बहुत बड़े समाजसेवी और संघर्षशील व्यक्तित्व के धनी व्यक्ति हैं। उनकी पत्नी के इस आशीर्वाद से आज बीजेपी की जीत दोगुनी हो गई है और यह खुला समर्थन साबित करता है कि 2022 में बीजेपी की जीत 2017 से भी ज्यादा होगी। इसके लिए मैं तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूं।

दरसअल भाजपा के पूर्व नेता अरुण सिंह 2014 के लोकसभा चुनाव में टिकट के प्रबल दावेदार थे। लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला और उन्होंने पार्टी से बगावत कर दी, इस बगावत के चलते पार्टी ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया। उसके बाद पत्नी शीला सिंह ने भी जिला पंचायत का चुनाव लड़ा। वहीं 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपने समर्थकों के कहने पर सदर विधानसभा से नामांकन भी किया था, लेकिन किसी कारण से उनका नामांकन खारिज कर दिया गया था।

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    इस सीट से लगातार दो बार कोई विधायक नहीं बना

    ऐसे में अगर सदर विधानसभा की बात करें तो यह इतिहास रहा है कि इस सीट से लगातार दो बार कोई विधायक नहीं बन पाया है। लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने इस मिथक को तोड़ने के लिए सहकारिता राज्य मंत्री पर दांव खेला है। वहीं सहकारिता राज्य मंत्री से नाराज अरुण सिंह के परिवार और उनके समर्थकों को मनाने के इस क्रम से राजनीतिक माहौल कितना बदल पाएगा यह तो वक्त ही बताएगा।

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