UP पंचायत चुनाव में आरक्षण लागू कराने पर CM Yogi Adityanath के जोर के पीछे बीजेपी का चुनावी गणित?
CM Yogi Adityanath: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव के लिए तैयारियां चल रही है। प्रदेश की सभी प्रमुख पार्टियों के लिए यह चुनाव अहम हैं, क्योंकि विधानसभा चुनाव से पहले यह शक्ति परीक्षण का लिटमस टेस्ट है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने पंचायत चुनाव में आरक्षण लागू कराने के लिए सभी जरूरी तैयारियां पूरी करने का निर्देश दिया है। इसके लिए छह सदस्यीय पिछड़ा वर्ग आयोग गठित करने का सुझाव दिया गया है, जो जनसंख्या आधारित डेटा तैयार करेगा। इस रिपोर्ट के आधार पर ही ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत की सीटों पर आरक्षण तय होगा।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, प्रस्ताव पर कैबिनेट की मुहर के बाद आयोग का गठन होगा और फिर अक्टूबर तक आरक्षण की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। सीएम योगी आदित्यनाथ और प्रदेश सरकार के लिए पंचायत चुनाव में आरक्षण लागू कराना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। समझें इस फैसले के पीछे की कहानी।

UP Panachayat Election: परिसीमन का काम पूरा
ग्राम सभाओं के नए परिसीमन के चलते 504 पंचायतों को खत्म कर दिया गया है। अब प्रदेश में ग्राम पंचायतों की संख्या घटकर 57,695 रह गई है। आरक्षण को लागू करने के लिए परिसीमन पहली जरूरी शर्त है, जो पूरी हो गई है। इसके बाद अब नई सीटों की संरचना और जनसंख्या के आंकड़ों के डेटा के मुताबिक आरक्षण का प्रावधान किया जाएगा।
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CM Yogi Adityanath का पंचायत चुनाव में आरक्षण पर जोर
पंचायत चुनाव में आरक्षण लागू करने का असर सिर्फ़ प्रशासनिक स्तर तक नहीं रहने वाला है। बीजेपी को इससे रणनीतिक लाभ की भी उम्मीद है। सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा सरकार इस बार पंचायत चुनावों को सामाजिक समीकरण साधने और ग्रामीण राजनीति में पकड़ मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रही है। लोकसभा चुनाव में बीजेपी को उत्तर प्रदेश में खासा नुकसान हुआ था। इसकी एक वजह मानी जा रही है कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के साथ आने से दलित वोट इंडिया अलायंस को मिले थे। अब बीजेपी की कोशिश पंचायत चुनाव में आरक्षण और दूसरी जनकल्याणकारी योजनाओं के दम पर ग्रामीण और पिछड़ा वोट अपने साथ जोड़ने की है।
ओबीसी आरक्षण का संतुलन भी इस लिहाज से अहम है, क्योंकि 2027 विधानसभा चुनाव में पार्टी को ओबीसी वर्ग के बीच अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करनी ही होगी। पिछली बार कुछ ओबीसी जातियों की नाराजगी की वजह से पार्टी 300 के पार का आंकड़ा विधानसभा चुनाव में नहीं छू पाई थी। ऐसे में इस बार जनसंख्या-आधारित आरक्षण तय करने का कदम भाजपा के ग्रामीण वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
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पंचायत चुनाव में आरक्षण लागू करना कितना मुश्किल?
फिलहाल यह तय नहीं है कि आरक्षण प्रक्रिया की शुरुआत कब होगी, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने मंथन शुरू कर दिया है। जैसे ही कैबिनेट से प्रस्ताव को मंज़ूरी मिलती है, आयोग का गठन होगा और आरक्षण की प्रक्रिया गति पकड़ेगी। योगी सरकार इसे वोटर माइक्रो-मैनेजमेंट के लिए इस्तेमाल कर सकती है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में अपने प्रभाव को और मजबूत करने के लिए।












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