सीएम योगी बच्चों से कह रहे स्कूल जाओ, शिक्षक कह रहे कि मत आओ
अमेठी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बच्चों को स्कूल जाने की बात कहते नजर आते हैं वहीं अमेठी में एक शिक्षक ऐसा भी है जो उन बच्चों को स्कूल आने से मना करता है। ये आरोप है अमेठी के ताला ग्राम प्राइमरी स्कूल के बच्चों का। दरअसल यहां शिक्षा के स्तर का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि यहां छात्रों का भविष्य एक दिव्यांग शिक्षक के हाथ में है। शिक्षक ऐसा कि जो छात्रों से कहता है कि 1 हज़ार रुपये मुझसे ले लो और 15 दिन स्कूल मत आओ।
सिर्फ 1 हेड मास्टर और 1 दिव्यांग मिलकर चला रहे स्कूल
हेड मास्टर जितेंद्र त्रिपाठी की मानें तो वह स्कूल में अकेले हैं। छात्रों के पढ़ाने से लेकर रजिस्ट्रर तैयार करना और इसके अलावा दूसरे सरकारी काम उनके जिम्मेदारी पर ही है। इसे साथ ही वे बच्चों को पढ़ाते भी हैं।
हेड मास्टर के ऊपर 5 कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी है। जिम्मेदारी बांटने के लिए एक दिव्यांग शिक्षक तो है लेकिन, आलम ये है कि वह जब आएंगे तो छात्रों को पढ़ाएंगे नहीं। अगर पढ़ाने भी लगे तो छात्रों को कहानी के प्रारूप में पढ़ाएंगे ना कि ब्लैक बोर्ड पर लिख कर। जिस वजह से छात्रों को कुछ समझ में ही नही आता है। इसका असर ये हुआ कि पहले इस स्कूल में क़रीब 90 छात्र थे लेकिन मौजूदा समय में ये छात्रों की संख्या 60 पर पहुंच गई है।

क्लास में बैठ गाना सुनते हैं शिक्षक
छात्र तो खुले तौर पर बोलते हैं कि छोटे सर (दिव्यांग शिक्षक) पढ़ाते ही नहीं, बल्कि दिन भर गाना सुनते रहते हैं और जब बच्चे पढानें की बात करते हैं तो मारने लगते हैं। इससे छात्र इनके क़रीब जाने से कतराते हैं। कुछ छात्रों ने तो यहां तक आरोप लगाया है कि छोटे सर कहते हैं 1 हज़ार रुपए हमसे ले लो और 15 दिन स्कूल मत आना। ऐसा ही आरोप छात्रों के अभिभावकों का है, अभिभावक कहते हैं है कि जब से इस स्कूल में नेत्र विहीन शिक्षक आए है तब से बच्चे हर रोज स्कूल से घर आते ही शिकायत करते हैं कि स्कूल में शिक्षक पढ़ाते नहीं हैं।

जरूरी नहीं ब्लैक बोर्ड पर लिखकर पढ़ाना
उधर जब दिव्यांग शिक्षक से बातचीत की गई तो उन्होंने साफ कहा कि जरूरी है कि छात्रों को ब्लैक बोर्ड पर लिखकर ही पढाया जाए। इससे अच्छा तो मैं छात्रों को बोल के पढा लूंगा और और अगर लिख के पढ़ाने की जरूरत पड़ेगी तो मैं लैपटॉप या मोबाइल में लिख के बच्चों को पढ़ा सकता हूँ। उन्होंने कहा कि अगर सरकार दबाव बनाएगी की ब्लैक बोर्ड से ही बच्चों को पढ़ाना है तो मैं असिस्टेंट रख लूंगा। उन्होंने कहा कि वह असिस्टेंट रखना भी चाहते हैं लेकिन उन्हें असिस्टेंट नही रखने दिया जाता है। पूरे मामले में जब डीएम योगेश कुमार से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मीडिया के माध्यम से उन्हें जानकारी हुई है। वह इस बारे में बीएसए से बात कर के दिव्यांग शिक्षक को वहाँ से हटा कर दूसरी जगह भेजेंगे और वहां दूसरे शिक्षक की नियुक्ति करवा दी जायेगी।












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