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कौन और क्यों ढाबे पर पैंट उतरवाकर 'पहचान अभियान' चला रहे? मचा बवाल-पुलिस ने कसा शिकंजा, छह पर नोटिस!

Who is Swami Yashveer Maharaj: सावन मास की कांवड़ यात्रा (11 जुलाई से शुरुआत) से पहले उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां चल रहे 'पहचान अभियान' ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। इस अभियान के तहत दिल्ली-देहरादून नेशनल हाईवे-58 पर स्थित ढाबों, रेस्टोरेंट्स और दुकानों पर मालिकों और कर्मचारियों के आधार कार्ड की जांच की गई।

खास बात यह है कि 'पंडित जी वैष्णो ढाबे' के एक कर्मचारी ने गंभीर आरोप लगाया है। आरोप है कि पहचान के नाम पर उसकी पैंट उतारने की कोशिश की गई। इस घटना के बाद पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए। यशवीर महाराज की टीम के 6 सदस्यों को नोटिस जारी किया है।

Who is Swami Yashveer Maharaj

What is Pehchaan Abhiyan: क्या है 'पहचान अभियान'?

स्वामी यशवीर महाराज, जो मुजफ्फरनगर के योग साधना आश्रम से जुड़े हैं, ने कांवड़ यात्रा मार्ग पर यह अभियान शुरू किया ताकि कोई व्यक्ति हिंदू देवी-देवताओं के नाम पर दुकान न चलाए। उनकी 5,000 लोगों की टीम ने 28 जून 2025 को दिल्ली-देहरादून हाईवे पर दुकानों और ढाबों पर जाकर मालिकों और कर्मचारियों के आधार कार्ड चेक किए। साथ ही, कुछ जगहों पर भगवान वराह की तस्वीरें लगाने का काम भी किया गया। इस अभियान का मकसद था कि दुकानों के नाम उनके मालिकों की धार्मिक पहचान से मेल खाएं।

पंडित जी वैष्णो ढाबे पर क्या हुआ?

28 जून को स्वामी यशवीर की टीम पंडित जी वैष्णो ढाबे पर पहुंची। जांच में पता चला कि ढाबे का नाम हिंदू परंपरा से जुड़ा है, लेकिन इसका मालिक जाबिर राठौर और कुछ कर्मचारी मुस्लिम समुदाय से थे। इसके बाद विवाद बढ़ गया। एक कर्मचारी, गोपाल, ने आरोप लगाया कि यशवीर की टीम ने उसकी पैंट उतारकर उसकी धार्मिक पहचान जांचने की कोशिश की। गोपाल का यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद मामला तूल पकड़ गया। हालांकि, गोपाल ने अभी तक पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज नहीं की है।

पुलिस ने कसा शिकंजा

वायरल वीडियो और आरोपों के बाद मुजफ्फरनगर (Muzaffarnagar News) पुलिस हरकत में आई। नई मंडी कोतवाली पुलिस ने 29 जून को यशवीर महाराज की टीम के 6 सदस्यों-सुमित बजरंगी, रोहित, विवेक, सुमित, सन्नी, और राकेश दतियाना-को नोटिस जारी किया। पुलिस ने कहा कि बिना प्रशासन की अनुमति के आधार कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र की जांच की गई और आपत्तिजनक सवाल पूछे गए। नोटिस में इन लोगों को तीन दिन के भीतर अपना स्पष्टीकरण देने को कहा गया है।

Who is Swami Yashveer Maharaj: स्वामी यशवीर और उनकी टीम का जवाब

स्वामी यशवीर ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी टीम का मकसद केवल यह सुनिश्चित करना था कि दुकानें सही नामों से चलें। उन्होंने कहा, 'हमारा अभियान कांवड़ियों की भावनाओं को ध्यान में रखकर चलाया गया। कोई भी कानून अपने हाथ में नहीं ले सकता, और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी प्रशासन को दी जानी चाहिए।' वहीं, नोटिस प्राप्त करने वाले एक सदस्य, विवेक सनातनी, ने कहा, 'मैंने कोई अभद्रता नहीं की। हमने सिर्फ आधार कार्ड चेक किए, पैंट उतारने जैसी कोई बात नहीं हुई। वहां सीसीटीवी कैमरे हैं, सच सामने आ जाएगा।' यशवीर महाराज ने यह भी चेतावनी दी कि अगर उनकी टीम के खिलाफ 'झूठे मामले' बनाए गए, तो उत्तर प्रदेश और पूरे देश में विरोध प्रदर्शन होंगे।

नेम प्लेट लगाने का आदेश

उत्तर प्रदेश सरकार ने कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) के लिए सभी जिलों में दुकानों, ढाबों और रेस्टोरेंट्स पर मालिकों और कर्मचारियों के नाम प्रदर्शित करने का आदेश दिया है। मुजफ्फरनगर पुलिस प्रमुख अभिषेक सिंह ने कहा, '240 किमी के कांवड़ मार्ग पर सभी प्रतिष्ठानों को अपने मालिकों के नाम दिखाने को कहा गया है ताकि कांवड़ियों में कोई भ्रम न हो और कानून-व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े।' कई दुकानदारों ने इस आदेश का पालन शुरू कर दिया है।

दुकानदारों और कांवड़ियों की रायकांवड़ियों का कहना है कि नेम प्लेट लगाने से उन्हें यह जानने में मदद मिलेगी कि वे किसके ढाबे पर खाना खा रहे हैं, जिससे उनकी धार्मिक भावनाएं आहत होने से बचेंगी। मुस्लिम दुकानदारों ने भी कहा कि वे इस आदेश का पालन करेंगे और नेम प्लेट लगाएंगे। हालांकि, कुछ लोगों ने इस अभियान को सामाजिक सौहार्द के लिए नुकसानदायक बताया है।

सियासी बवाल, अखिलेश यादव ने घेरा

इस घटना ने राजनीतिक हलकों में भी हंगामा मचा दिया है। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने इसे 'सामाजिक अपराध' करार देते हुए कोर्ट से स्वत: संज्ञान लेने की मांग की। जदयू नेता केसी त्यागी ने कहा कि यह आदेश मुस्लिम दुकानदारों की आजीविका छीन सकता है। कांग्रेस ने भी इसे 'राज्य प्रायोजित कट्टरता' बताया।

स्वामी यशवीर महाराज का 'पहचान अभियान' भले ही कांवड़ यात्रा के दौरान धार्मिक भावनाओं को संरक्षित करने के लिए शुरू किया गया हो, लेकिन पंडित जी वैष्णो ढाबे पर हुई घटना ने इसे विवादों में ला दिया। पुलिस की कार्रवाई और जारी नोटिस से यह मामला और गर्म हो गया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच में क्या सामने आता है और यह विवाद कहां तक जाता है।

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