Modi Cabinet: मोदी की नई कैबिनेट में UP के कौन-कौन से सांसद बन सकते हैं मंत्री? किस जाति पर BJP का फोकस
Modi Cabinet Reshuffle: उत्तर प्रदेश में साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अभी से अपनी सेटिंग शुरू कर दी हैं। दिल्ली के सियासी गलियारों में इस बात की सुगबुगाहट तेज है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही अपनी टीम में बड़ा बदलाव करने जा रहे हैं। एक से दो हफ्ते में कैबिनेट के बदलाव होने की पूरी संभावना है। इस फेरबदल का सबसे बड़ा असर उत्तर प्रदेश पर दिखने वाला है।
बीजेपी इस बार यूपी में क्षेत्रीय संतुलन और सामाजिक ताने-बाने को दुरुस्त करने के लिए कुछ नए सांसदों को दिल्ली बुला सकती है। हालांकि सरकार की तरफ से अभी तक कैबिनेट विस्तार या फेरबदल को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में कई नामों पर चर्चा तेज है।

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा कारण भाजपा का 'एक व्यक्ति, एक पद' वाला फॉर्मूला माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी का पूरा ध्यान संगठन पर लगाया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो उनके स्थान पर किसी नए सांसद को मंत्रिमंडल में जगह मिलने की संभावना बन सकती है।
पंकज चौधरी की होगी विदाई, 'एक पद' वाले फॉर्मूले से पलटेगा पासा
महाराजगंज सीट से 7 बार के लोकसभा सांसद पंकज चौधरी जुलाई 2021 से देश के वित्त राज्यमंत्री का जिम्मा संभाल रहे हैं। लेकिन दिसंबर 2025 में पार्टी ने उन्हें उत्तर प्रदेश बीजेपी का नया अध्यक्ष बना दिया था। अब बीजेपी की अपनी एक अंदरूनी पॉलिसी है- 'एक व्यक्ति, एक पद'। इस नीति के तहत कोई भी नेता एक साथ सरकार और संगठन दोनों जगह बड़े पदों पर नहीं रह सकता।
पहले भी ऐसे उदाहरण दिखे हैं। जब 2014 में राजनाथ सिंह गृहमंत्री बने तो उन्होंने अध्यक्ष पद छोड़ दिया था। अमित शाह ने भी 2019 में मंत्री बनने के बाद जेपी नड्डा को कमान सौंप दी थी। हाल ही में जनवरी 2026 में जब नितिन नबीन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने, तो उन्हें भी बिहार सरकार में अपना मंत्री पद छोड़ना पड़ा था।
इसी फॉर्मूले के तहत पंकज चौधरी को मोदी कैबिनेट से फ्री किया जा सकता है ताकि वे 2027 के यूपी चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए पूरी तरह इलेक्शन मैनेजमेंट पर फोकस कर सकें।
यूपी से किन नेताओं के नाम कैबिनेट मंत्री के लिए चर्चा में हैं?
अगर यूपी कोटे में नई जगह बनती है तो सबसे पहले जिन नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं, उनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान, पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. महेश शर्मा, राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा और मेरठ से सांसद अरुण गोविल शामिल हैं।
भाजपा इस बार केवल क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व ही नहीं, बल्कि जातीय संतुलन को भी ध्यान में रख सकती है। इसी वजह से ओबीसी और दलित समाज से भी एक-एक सांसद को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं। पूर्वांचल से किसी ओबीसी चेहरे को मौका मिलने की चर्चा भी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। वहीं दो नेता जनरल कैटेगरी से हो सकते हैं।
- अरुण गोविल (मेरठ सांसद): टीवी सीरियल 'रामायण' में भगवान राम का रोल निभाकर घर-घर में मशहूर हुए अरुण गोविल 2021 में बीजेपी में आए और 2024 में मेरठ से सांसद बने। पश्चिमी यूपी के वैश्य समाज से आने वाले गोविल को मंत्री बनाकर बीजेपी हिंदुत्व और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के मुद्दे को एक बार फिर हवा दे सकती है।
- डॉ. दिनेश शर्मा: उत्तर प्रदेश के पूर्व डिप्टी सीएम और मौजूदा राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा का नाम भी रेस में आगे है। वे सूबे के बड़े ब्राह्मण वोट बैंक को साधने में ट्रंप कार्ड साबित हो सकते हैं।
- डॉ. महेश शर्मा और संजीव बालियान: गौतमबुद्ध नगर के सांसद डॉ. महेश शर्मा और मुजफ्फरनगर के पूर्व सांसद संजीव बालियान पहले भी केंद्र में मंत्री रह चुके हैं। पश्चिमी यूपी के जाट और ब्राह्मण समीकरणों को ठीक करने के लिए पार्टी इन पर दोबारा भरोसा जता सकती है।
चुनावी राज्यों को साधने की सोशल इंजीनियरिंग
मोदी सरकार का यह पुराना ट्रैक रिकॉर्ड रहा है कि जब भी कैबिनेट में फेरबदल होता है, तो नजरें अगले राज्यों के चुनावों पर टिकी होती हैं। जुलाई 2021 में जब सबसे बड़ा फेरबदल हुआ था, तब यूपी से पंकज चौधरी, अजय मिश्रा टेनी, अनुप्रिया पटेल और एसपी सिंह बघेल जैसे कई नेताओं को एंट्री मिली थी क्योंकि 2022 में यूपी के चुनाव थे।
इस बार भी दलित और ओबीसी वर्ग से एक-एक नए सांसद को कैबिनेट में प्रमोट करके बीजेपी अपनी सोशल इंजीनियरिंग को मजबूत करना चाहती है।
इस बार भी माना जा रहा है कि पार्टी ब्राह्मण, ओबीसी, दलित और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभावशाली समुदायों के बीच संतुलन साधने की कोशिश करेगी। डॉ. दिनेश शर्मा को ब्राह्मण चेहरे के रूप में देखा जा रहा है, जबकि ओबीसी और दलित वर्ग से भी प्रतिनिधित्व बढ़ाने की चर्चा है।
फिलहाल यूपी से कितने मंत्री हैं?
इस समय मोदी 3.0 सरकार में उत्तर प्रदेश से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कुल 10 मंत्री शामिल हैं। इनमें राजनाथ सिंह, अनुप्रिया पटेल, जयंत चौधरी, जितिन प्रसाद, पंकज चौधरी, कीर्तिवर्धन सिंह, एसपी सिंह बघेल, कमलेश पासवान और बीएल वर्मा शामिल हैं। ऐसे में अगर फेरबदल होता है तो कुछ नए चेहरे जुड़ सकते हैं और कुछ जिम्मेदारियां बदल सकती हैं।
- नरेंद्र मोदी - प्रधानमंत्री (सांसद, वाराणसी)
- राजनाथ सिंह - रक्षा मंत्री (सांसद, लखनऊ)
- अनुप्रिया पटेल - केंद्रीय राज्यमंत्री (सांसद, मिर्जापुर - अपना दल एस)
- जयंत चौधरी - केंद्रीय राज्यमंत्री (राज्यसभा सांसद - रालोद)
- जितिन प्रसाद - केंद्रीय राज्यमंत्री (सांसद, पीलीभीत)
- पंकज चौधरी - केंद्रीय राज्यमंत्री (सांसद, महराजगंज)
- कीर्तिवर्धन सिंह - केंद्रीय राज्यमंत्री (सांसद, गंडा)
- एसपी सिंह बघेल - केंद्रीय राज्यमंत्री (सांसद, आगरा)
- कमलेश पासवान - केंद्रीय राज्यमंत्री (सांसद, बांसगांव)
- बीएल वर्मा - केंद्रीय राज्यमंत्री (राज्यसभा सांसद)
राजनीतिक तौर पर देखा जाए तो यह संभावित फेरबदल सिर्फ मंत्रालय बदलने तक सीमित नहीं रहेगा। इसका सीधा असर 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर भी पड़ सकता है।
भाजपा की कोशिश सामाजिक प्रतिनिधित्व, क्षेत्रीय संतुलन और संगठन को साथ लेकर चुनावी बढ़त बनाए रखने की होगी। हालांकि अंतिम तस्वीर तभी साफ होगी, जब केंद्र सरकार आधिकारिक तौर पर कैबिनेट विस्तार या फेरबदल का ऐलान करेगी।














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