मोदी कैबिनेट के बड़े बदलाव का मास्टरप्लान आया सामने, किसकी होगी धमाकेदार एंट्री, किसका कटेगा टिकट?
Modi Cabinet Expansion: केंद्र सरकार में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। बीजेपी के अंदरूनी सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बदलाव के जरिए सिर्फ मंत्रालयों का बंटवारा नहीं करेंगे, बल्कि आने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए बड़ा राजनीतिक संदेश भी देने की तैयारी में हैं।
माना जा रहा है कि इस बार युवाओं, महिलाओं और पिछड़ी जातियों को अधिक प्रतिनिधित्व देकर पार्टी अपने सामाजिक और चुनावी समीकरण मजबूत करना चाहती है। इसके साथ ही कुछ बड़े मंत्रालयों में बदलाव, सहयोगी दलों को ज्यादा हिस्सेदारी और विपक्ष से आए नेताओं की भूमिका को लेकर भी कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि अभी तक सरकार की ओर से किसी भी बदलाव की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

युवाओं और महिलाओं को मिल सकता है ज्यादा मौका
बीजेपी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, इस फेरबदल में कई नए चेहरों को मौका मिल सकता है। चर्चा है कि एक दर्जन से ज्यादा राज्य मंत्रियों की जगह युवा सांसदों को जिम्मेदारी दी जा सकती है। इनमें पहली बार लोकसभा पहुंचे कुछ सांसद भी शामिल हो सकते हैं।
इसके अलावा केंद्र सरकार महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दे सकती है। माना जा रहा है कि महिला आरक्षण कानून को लागू करने की दिशा में सरकार अपने इरादे मजबूत दिखाने के लिए मंत्रिपरिषद में महिला मंत्रियों की संख्या बढ़ा सकती है।
पिछड़ी जातियों पर रहेगा खास फोकस
उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए पिछड़ी जातियों पर बीजेपी का विशेष ध्यान रहने की संभावना है। पार्टी का मानना है कि राज्य में चुनावी सफलता के लिए इस वर्ग का समर्थन बेहद अहम है।
इसी वजह से माना जा रहा है कि साल 2021 की तरह इस बार भी अलग-अलग पिछड़ी जातियों से आने वाले सांसदों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। इससे पार्टी अपने सामाजिक आधार को मजबूत बनाए रखने की कोशिश करेगी।
चुनावी रणनीति को नया आकार देने की तैयारी
बीजेपी और एनडीए से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मंत्रिमंडल में बदलाव केवल प्रशासनिक फैसला नहीं होगा। इसके जरिए पार्टी आने वाले वर्षों की राजनीतिक दिशा भी तय करना चाहती है।
बताया जा रहा है कि यह रणनीति 2029 के लोकसभा चुनाव और उससे पहले होने वाले कई विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। हालांकि विपक्ष लगातार बेरोजगारी, ईंधन की कीमतों और परीक्षा पेपर लीक जैसे मुद्दों पर सरकार को घेर रहा है। ऐसे में यह भी चर्चा है कि क्या इन मामलों में किसी मंत्री की जवाबदेही तय होगी या नहीं।
निर्मला सीतारमण को लेकर क्या हैं चर्चाएं
राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को लेकर हो रही है। सूत्रों का दावा है कि संसद के मानसून सत्र से पहले होने वाले संभावित फेरबदल में उनसे वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी वापस ली जा सकती है।
हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि अगर ऐसा होता है तो इसका मतलब यह नहीं होगा कि उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल से बाहर किया जाएगा। पार्टी इस फैसले को किसी विफलता के रूप में पेश नहीं करना चाहती। चर्चा यह भी है कि उन्हें शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है और इसे नई चुनौती के रूप में दिखाया जाएगा, न कि पद में कमी के तौर पर।
धर्मेंद्र प्रधान की भूमिका पर बनी नजर
अगर शिक्षा मंत्रालय में बदलाव होता है तो मौजूदा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की अगली जिम्मेदारी को लेकर भी अटकलें तेज हैं। पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि उन्हें किसी दूसरे मंत्रालय में भेजा जा सकता है। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि उन्हें संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देकर चुनावी तैयारियों में लगाया जा सकता है।
बीजेपी के भीतर यह भी माना जा रहा है कि यदि शिक्षा मंत्रालय में बदलाव होता है तो इसे युवाओं की भावनाओं के प्रति सरकार की संवेदनशीलता के रूप में पेश किया जाएगा। इससे विपक्ष के उस अभियान का जवाब देने की भी कोशिश होगी, जिसमें वह परीक्षा पेपर लीक के मुद्दे को लगातार उठा रहा है।
विपक्ष से आए सांसदों पर क्या होगा फैसला
पिछले कुछ महीनों में आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) छोड़कर कई सांसद एनडीए के साथ आए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या उन्हें मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी। सूत्रों के अनुसार, आरएसएस और बीजेपी के एक वर्ग का मानना है कि इन नेताओं को अभी मंत्री नहीं बनाया जाना चाहिए। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह चुनावी जरूरतों को देखते हुए कुछ मामलों में अलग फैसला ले सकते हैं।
बताया जा रहा है कि पंजाब में बीजेपी के पास मजबूत नेतृत्व की कमी को देखते हुए आम आदमी पार्टी छोड़कर आए सात राज्यसभा सांसदों में से कम से कम एक को राज्य मंत्री बनाया जा सकता है।
बंगाल के नेताओं को लेकर अलग राय
दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस छोड़कर एनडीए के साथ आए सांसदों को लेकर तस्वीर अलग दिखाई दे रही है। जानकारी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल बीजेपी और आरएसएस के एक वर्ग की राय है कि इन नेताओं को फिलहाल मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। इसलिए उनके लिए रास्ता आसान नहीं माना जा रहा है।
शिंदे गुट चाहता है ज्यादा प्रतिनिधित्व
महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना भी केंद्र सरकार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग कर रही है। सूत्रों का कहना है कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के कई सांसदों के शिंदे गुट में आने के बाद पार्टी केंद्र में ज्यादा प्रतिनिधित्व चाहती है। चर्चा है कि इस बार श्रीकांत शिंदे को कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है। इसके अलावा शिंदे गुट को एक और राज्य मंत्री का पद भी मिलने की संभावना जताई जा रही है।
नीतीश कुमार को मिल सकती है नई जिम्मेदारी
एनडीए के सहयोगी दलों में जनता दल (यूनाइटेड) के नेता नीतीश कुमार को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। सूत्रों के मुताबिक, राज्यसभा पहुंचने और बिहार के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद अब उन्हें केंद्र सरकार में शामिल किया जा सकता है। यह भी कहा जा रहा है कि अश्विनी वैष्णव के पास रहे किसी मंत्रालय की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी जा सकती है। यदि ऐसा होता है तो यह एनडीए के भीतर सहयोगी दलों को मजबूत संदेश देने वाला कदम माना जाएगा।












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