उत्तर प्रदेश : चुनावी पर्दे पर ‘हाथी मेरे साथी’ हिट होगी या फ्लॉप ?

लखनऊ, 05 दिसंबर। 'हाथी मेरे साथी’ एक सुपर हिट हिंदी फिल्म है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी 'हाथी मेरे साथी’ का स्लोगन एक सुपर हिट कन्सेप्ट रहा है। 'हाथी’ यानी बसपा का चुनाव चिह्न। कभी यह राजनीतिक शक्ति का प्रतीक था। 2007 में एक मशहूर नारा लगा था। हाथी नहीं गणेश है, ब्रह्मा- विष्णु- महेश है। हाथी सबका साथी बना। बसपा की झोली 206 सीटों से भर गयी। मायावती ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनायी। लेकिन वक्त बदला तो हाथी के साथी, साथ छोड़ने लगे। जमा-पूंजी कम से कम होती चली गयी। अब हालत ये है कि उसके खाते में सिर्फ 4 सीटें ही बची हैं। इसके बाद भी बसपा के प्रमुख रणनीतिकार सतीश चंद्र मिश्रा का दावा है कि 2022 में मायावती पांचवीं बार मुख्यमंत्री बनेंगी। यहां एक तथ्य काबिलेगौर है। उत्तर प्रदेश की सत्ता पर उसी दल ने कब्जा जमाया है जिसने कम से कम 65 फीसदी सुरक्षित सीटों पर जीत हासिल की हो। 2017 में बसपा को 86 रिजर्व सीटों में से केवल 2 पर जीत मिली थी। यानी जो अपने(दलित) थे वे भी पराये हो गये। ऐसे में बसपा का सपना 2022 में कैस पूरा होगा ? वह भी तब जब पार्टी में भगदड़ मची हुई है।

जिसकी रिजर्व सीटों पर होगी बादशाहत, सत्ता उसी की

जिसकी रिजर्व सीटों पर होगी बादशाहत, सत्ता उसी की

उत्तर प्रदेश में अभी अनुसूचित जाति के लिए 84 सीटें रिजर्व हैं। 2017 से दो सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए भी रिजर्व की गयीं हैं जो सोनभद्र जिले में हैं। यानी रिजर्व सीटों की संख्या कुल 86 है। उत्तर प्रदेश में सुरक्षित सीटों पर मतदान की प्रवृति लगातार बदलती रही है। बसपा दलित वोट पर अपना एकाधिकार मानती रही है। लेकिन यह सच नहीं है। पिछले तीन चुनावों से दलित मतदाता अलग-अलग दलों को अपना समर्थन देते रहे हैं। 2007 में रिजर्व सीटों की संख्या 89 थी जिसमें से बसपा ने 61 पर जीत हासिल की थी। इसके साथ ही बसपा ने 206 सीटें जीत कर अकेल बहुमत प्राप्त कर लिया। लेकिन 2012 में स्थिति बदल गयी। इस बार सपा को 85 रिजर्व सीटों में से 58 पर जीत मिली और उसकी सरकार बनी। सपा के 224 विधायक जीते थे। 2017 में एक बार फिर राजनीतिक परिदृश्य बदला। इस बार भाजपा ने 86 सुरक्षित सीटों में 70 पर कब्जा जमा कर सारे समीकरण फेल कर दिये। भाजपा ने 312 सीटें जीत कर अपनी सरकार बनायी। दलित आधार की पार्टी मानी जाने वाली बसपा को केवल 2 रिजर्व सीटें मिली। सपा के हिस्से में 7 सीटें आयीं। इस तरह देखा जा सकता है अब बसपा के साथ उसके कोर वोटर भी नहीं रहे। 2007 में उसे तब सत्ता मिली थी जब दलित समुदाय ने उसे दिल खोल कर समर्थन दिया था।

ढलान की ओर बसपा

ढलान की ओर बसपा

2017 में बसपा के 19 विधायक जीते थे। लेकिन आंतरिक कलह और अवसरवादिता के कारण बसपा खंड-खंड हो कर और बिखर गयी। अधितर विधायक सपा या भाजपा में शामिल हो गये। अब केवल चार विधायक ही बचे हैं। इस बिखराव का एक मतलब यह भी है कि अब पार्टी में मायावती की पकड़ ढीली पड़ गयी है। बसपा में पहले किसी विधायक की हिम्मत न थी कि वह मायावती को चुनौती दे सके। लेकिन अब तो एक साथ छह विधायकों ने पार्टी से बगावत कर दी और वे कुछ न कर सकीं। मायावती की नेतृत्व क्षमता को इसलिए भी चुनौती मिल रही है क्यों कि वे पहले की तरह मैच जिताऊ कप्तान नहीं रहीं। 2022 में 206 सीट जीतने वाली बसपा 2012 में 80 पर खिसक गयी। 2017 में वह औंधे मुंह नीचे गिरी और 19 पर ढेर हो गयी। यानी चुनाव दर चुनाव माय़ावती की राजनीतिक चमक फीकी पड़ती गयी। अब सवाल ये है कि ढलान की तरफ फिसल रही बसपा 2022 में कैसे चमत्कार करेगी ? 4 विधायकों वाली पार्टी अगर 204 सीट जीतने का सपना देख रही है तो उसके किसी चमत्कार की ही जरूरत पड़ेगी।

Recommended Video

    UP Election 2022: Mayawati की BSP हिट होगी या फ्लॉप? सटीक Analysis से समझें? | वनइंडिया हिंदी
    2022 में रिजर्व सीटों पर फोकस

    2022 में रिजर्व सीटों पर फोकस

    मायावती ने हाल में कहा था कि 2022 में उनकी पहली प्राथमिकता 86 (84 एससी, 2 एसटी) रिजर्व सीटों पर जीत की रणनीति बनाना है। कुछ दिन पहले इन 86 विधानसभा क्षेत्रों के जिला अध्यक्षों की एक विशेष बैठक हुई थी। इसमें बूथ कमेटियों के मूल्यांकन और पुनर्निधारण पर चर्चा हुई थी। इन 86 रिजर्व सीटों पर बसपा के प्रभाव को फिर कायम करने के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेता गांव-गांव घूम मायावती सरकार की उपलब्धियों की बुकलेट बांट रहे हैं। मायावती इन सुरक्षित सीटों के जरिये ही अपनी वापसी का रास्ता तलाश रही हैं। शुक्रवार को पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र ने उन्नाव की रिजर्व सीट मोहान में एक सभा की थी। उन्होंने बसपा समर्थकों में जोश फूंकने के लिए मायावती सरकार के विकास कार्यों को गिनाया। अन्य नेता दूसरे सुरक्षित विधानसभा क्षेत्रों में सक्रिय हैं। इस अभियान के जरिये बसपा अपने पुराने समीकरण (दलित- ब्राह्मण- मुस्लिम) को फिर से पाना चाहती है।

    यह भी पढ़ें: 'यूपी चुनाव में कितनी सीटें जीतेगी कांग्रेस?', अखिलेश ने कर दी भविष्यवाणी! ममता को लेकर भी दिया ये बयान

    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+