पॉलिटिक्स एट मिडनाइट : जनता का PM तो राज करेगा CM !

लखनऊ, 15 दिसंबर। शिव की नगरी काशी। काशी विश्वनाथ धाम लोकार्पण के बाद शाम को प्रधानमंत्री गंगा आरती में शामिल हुए। फिर भाजपा के 11 मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की। भाजपा शासित राज्यों में सरकार के कामकाज की समीक्षा की। बैठक देर तक चली। रात के बारह बज गये। कई तय कार्यक्रम बदल दिये गये। वे रात्रि विश्राम के लिए बरेका रेस्ट हाउस की तरफ जा रहे थे कि गोदौलिया चौक से कुछ पहले अपनी कार को रोकने का आदेश दिया। उनका कारवां वहीं थम गया। वे कार से उतर कर पैदल चलने लगे। उनके साथ सिर्फ एसपीजी का सुरक्षा घेरा था।

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प्रधानमंत्री पैदल ही गोदौलिया चौक से दशाश्वमेध घाट की ओर बढ़ने लगे। तीर्थस्थल होने के कारण गोदौलिया चौक रात भर गुलजार रहता है। जो जगे थे वे प्रधानमंत्री को यूं सड़क पर पैदल चलते देख कर अचरज में पड़ गये। जो सोये थे वे भी जाग कर प्रधानमंत्री को देखने सड़क के किनारे खड़े हो गये।

आधी रात को जनता का प्रधानमंत्री जनता के बीच

आधी रात को जनता का प्रधानमंत्री जनता के बीच

प्रधानमंत्री ने अपने सुरक्षा घेरा को ढीला कर दिया था। वे लोगों के नजदीक जा कर उनका अभिवादन कर रहे थे। सड़क के किनारे एक युवा पिता अपने नन्हे बच्चे को गोद में लिये प्रधानमंत्री को देख रहा था। पीएम अचानक उस व्यक्ति के पास पहुंच गये। उन्होंने बच्चे को दुलारा। उससे बात करने की कोशिश की। लेकिन बच्चा इतना छोटा था कि वह केवल देखता रहा। उसे क्या मालूम था कि देश के प्रधानमंत्री उसे प्यार से पुचकार रहे हैं। यह दृश्य दिल को छू लेने वाला था। सड़क के किनारे मोदी ! मोदी ! की हर्ष ध्वनि गूंज रही थी। कोई रोक-टोक नहीं। आधी रात को प्रधानमंत्री आम लोगों के बीच थे। बिना किसी अड़चन के लोग उन्हें करीब से देख रहे थे। जनता का प्रधानमंत्री जनता के बीच था। ठेठ बनारसी रंग में।

पैदल चले ‘मंजिल’ की ओर

पैदल चले ‘मंजिल’ की ओर

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गोदौलिया चौक से चलते हुए दशाश्वमेध घाट के पास बने वृहस्पति देव मंदिर के पास पहुंचे। उनके साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी थे। दशाश्वमेध घाट के पास टूरिस्ट प्लाजा बन रहा है। उन्होंने कार्य की प्रगति के बारे में पूछा तो सीएम योगी ने उसके बारे में बताया। सीएम ने प्रधानमंत्री को मल्टी लेवल पार्किंग के बारे में भी बताया। करीब 20 मिनट तक प्रधानमंत्री पैदल भ्रमण करते रहे। फिर वे बाबा विश्वनाथ मंदिर के लिए चल पड़े। काशी विश्वनाथ धाम में जब प्रधानमंत्री पहुंचे तो रात के करीब पौने एक बज चुके थे। उनके देर से आने के कारण कुछ समय के लिए अफरा-तफरी हुई। लेकिन मंदिर के प्रबंधकों ने जल्द ही सब कुछ संभाल लिया। रात का सन्नाटा था। प्रधानमंत्री मंदिर की भव्य सजावट और मां गंगा की अविरल धारा को कुछ देर तक निहारते रहे। गोदैलिया के आसपास का इलाका जग चुका था। लोग घरों से बाहर निकल प्रधानमंत्री की एक झलक पाने के लिए बेकरार थे। प्रधानमंत्री हाथ हिला कर उनका अभिवादन कर रहे थे। बनारस के लिए यह रतजगा ऐतिहासिक थे। आधी रात की राजनीति नये सेवेरे की तरफ बढ़ रही थी।

अब बनारस ही ठिकाना है

अब बनारस ही ठिकाना है

रात के करीब एक बज चुके थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अभी भी आराम के मूड में नहीं थे। वहां से उनका काफिला बनारस रेलवे स्टेशन की तरफ बढ़ चला। वे अपने संसदीय क्षेत्र के बदल रहे चेहरे को नजदीक से देखना चाहते थे। वे कई बार कह चुके है कि अब बनारस ही उनका ठिकना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ उन्होंने रेलवे स्टेशन का निरीक्षण किया। प्लेटफॉर्म पर फूटस्टॉल खुले हुए थे। उन्होंने वेंडरों का अभिवादन किया। प्रधानमंत्री के इस अपनेपन से वे निहाल हो गये। प्रधानमंत्री रेलव स्टेशन के वीआइपी लाउंज में पहुंचे तो उन्होंने योगी आदित्यनाथ की तरह देख कर कहा, हां ! अब ये बिल्कुल एयरपोर्ट के वीआइपी लाउंज की तरह बन गया है। तब तक रात के 1 बज कर 18 मिनट हो चुके थे। यहां से प्रधानमंत्री रेस्ट हाउस के लिए रवाना हो गये।

जनता का PM तो राज करेगा CM !

जनता का PM तो राज करेगा CM !

गुजराती बोलने वाले नरेन्द्र मोदी अब भोजपुरी बोलने लगे हैं। बनारसी अंदाज में ढल भी गये हैं। लगातार जनता से जुड़ रहे हैं। दिल से दिलों के तार जोड़ रहे हैं। बनारस की 'मिडनाइट पॉलिटिक्स' ने उन्हें लोकप्रियता के नये मुकाम पर खड़ा कर दिया है। अभी हर आम और खास के बीच मोदी के इस नये रूप की चर्चा हो रही है। कुछ लोग कह रहे हैं, "जनता का पीएम तो राज करेगा सीएम।" दिन से ही माहौल बदला हुआ था। जब प्रधानमंत्री सुबह बाबतपुर हवाई अड्डे पर उतरे तो उन्होंने सभी कौ चौंका दिया। उन्होंने अचानक सड़क मार्ग से बनारस जाने की बात कह दी। पहले वे हमेशा हेलीकॉप्टर से जाते थे। चूंकि अचानक फैसला हुआ था इसलिए प्रधानमंत्री का काफिला बिना किसी बैरिकेडिंग के ही सड़क मार्ग से गुजरा। करीब 20-25 मिनट की इस यात्रा में उन्होंने बनारस को दिल के करीब महसूस किया। नरेन्द्र मोदी न केवल अपनी टीम के हेड कोच हैं बिल्क क्यूरेटर भी हैं। टीम के बेहतर संयोजन के अलावा उन पर जिताऊ पिच बनाने की भी जिम्मेवारी है ताकि जीत संभव हो सके। नरेन्द्र मोदी फिलहाल योगी आदित्यनाथ के लिए पिच तैयार कर रहे हैं। उनकी कोशिश है कि इस पिच पर सपा, बसपा और कांग्रेस के गेंदबाजों को कोई मदद न मिल सके। अगर ऐसा हुआ तो इस बैंटिग पिच पर योगी लंबी पारी खेल सकते हैं।

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