यूपी निकाय चुनाव 2017: सीएम योगी के 6 माह के कार्यकाल का लिटमस टेस्ट, सामने ये 3 बड़ी चुनौती

यूपी में योगी आदित्यनाथ की प्रचंड बहुमत की सरकार बनने के बाद इन निकाय चुनावों को उनकी लोकप्रियता और 6 महीने के कार्यकाल के मूल्यांकन के तौर पर देखा जा रहा है।

नई दिल्ली। गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के साथ ही उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव का बिगुल बज चुका है। नगर निगमों और नगर पालिकाओं के लिए आरक्षण सूची जारी होने के साथ ही कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार 25 अक्टूबर को निकाय चुनावों की अधिसूचना जारी कर सकती है। सरकार के अधिसूचना जारी करते ही चुनाव आयोग भी चुनाव की तारीखों का ऐलान कर देगा। माना जा रहा है कि चुनाव आयोग तीन चरणों में ये चुनाव करा सकता है। यूपी में योगी आदित्यनाथ की प्रचंड बहुमत की सरकार बनने के बाद इन निकाय चुनावों को उनकी लोकप्रियता और 6 महीने के कार्यकाल के मूल्यांकन के तौर पर देखा जा रहा है।

यूपी में हारकर भी निकाय चुनाव जीती थी BJP

यूपी में हारकर भी निकाय चुनाव जीती थी BJP

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ पर पिछले निकाय चुनाव का प्रदर्शन दोहराए जाने का दबाव होगा। 2012 के यूपी विधानसभा चुनावों में भाजपा को बुरी हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन इसके कुछ समय बाद हुए निकाय चुनाव में पार्टी ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 12 नगर निगमों में से 10 पर भगवा लहराया था। इस बार नगर निगमों की संख्या बढ़ाकर 16 कर दी गई है। केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार होने के साथ ही पार्टी की मंशा है कि नगर निगमों में उसका डंका बजे। ऐसे में सीएम योगी आदित्यनाथ के लिए ये चुनाव बेहद अहम हैं।

कानून व्यवस्था पर घिरी हुई है योगी सरकार

कानून व्यवस्था पर घिरी हुई है योगी सरकार

गौरतलब है कि हाल के दिनों में कानून-व्यवस्था समेत कई मुद्दों को लेकर यूपी सरकार घिर चुकी है। पिछले दिनों सहारनपुर हिंसा और गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से हुई बच्चों की मौत के मामले पर भी विपक्ष ने सीएम योगी पर जमकर हमला बोला था। ऐसे में सीएम योगी के सामने चुनौती है कि वो निकाय चुनाव जीतकर यह साबित करें कि उनकी सरकार की लोकप्रियता किसी भी स्तर पर कम नहीं हुई है।

बसपा से निपटना एक बड़ी चुनौती

बसपा से निपटना एक बड़ी चुनौती

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने एक चुनौती यह भी है कि बहुजन समाज पार्टी इस बार अपने चुनाव चिन्ह के साथ चुनाव मैदान में उतर रही है। बसपा ने यूपी विधानसभा चुनाव में हार के बाद अपने बिखरते वोट बैंक और हतोत्साहित कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए यह फैसला लिया है। चूंकि यह चुनाव लोकल स्तर का है इसलिए बसपा का चुनाव चिन्ह के साथ उतरना सीएम योगी के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। सपा और कांग्रेस भी अपनी खोई जमीन पाने के लिए पूरा जोर लगा रही हैं।

12 से बढ़कर 16 हुए नगर निगम

12 से बढ़कर 16 हुए नगर निगम

यूपी में नगर निगमों का कार्यकाल 15 जुलाई को समाप्त हो चुका है। पहले यह चुनाव जून-जुलाई में होने थे लेकिन बाद में इन्हें टाल दिया गया। उसके बाद हाईकोर्ट के आदेश पर नवंबर में ये चुनाव होने तय हुए हैं। मथुरा-वृंदावन, अयोध्या, सहारनपुर और फिरोजाबाद पहली बार नगर निगम बनाए गए हैं, जिनके साथ ही नगर निगमों की संख्या 16 हो गई है। सभी नगर निगमों के लिए सीटों के आरक्षण की सूची जारी होने के साथ ही राजनीतिक दलों ने इन चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है।

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