UP Election: उत्तर प्रदेश चुनाव में चाट और हलवा, जायकेदार हुई चुनावी चर्चा

लखनऊ, 29 जनवरी। उत्तर प्रदेश चुनाव में चाट और हलुए की इंट्री से चुनावी चर्चा जायकेदार हो गयी है। वैसे तो मुजफ्फरनगर गुड़ की मिठास के लिए मशहूर है। लेकिन यहां की चाट भी बहुत चटकदार होती है। रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी चुनाव प्रचार के लिए मुजफ्फरनगर पहुंचे थे। अभी डोर टू डोर चुनाव प्रचार पर ही जोर है। जयंत चौधरी चाट के शौकीन हैं। वे मुजफ्फरनगर की नयी मंडी स्थित एक मशहूर चाट की दुकान पर पहुंचे। वहां पहले से भीड़ थी। नौजवानों की तादात अधिक थी। जयंत चौधरी ने चाट का ऑर्डर दिया। फिर चाट के चटखारे के साथ वे युवकों से चुनाव पर चर्चा करने लगे।

Uttar Pradesh assembly election 2022 delicious after entry of chaat and halwa

केन्द्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा की जाट राजनीति का प्रमुख स्तंभ हैं। वे मुजफ्फरनगर के सांसद भी हैं। उनकी पत्नी डॉ. सुनीता बालियान की एक तस्वीर चर्चा में है जिसमें वे ईंट के चूल्हे पर बड़े कड़ाहे में हलुआ बना रही हैं। माना जा रहा है कि इतने बड़े कड़ाहे में राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए हलुआ बनाया जा रहा है। वोटरों से दिल का तार जोड़ने के लिए नेताओं के अपने-अपने तरीके हैं।

चाट के शौकीन जयंत चौधरी

चाट के शौकीन जयंत चौधरी

राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष जयंत चौधरी का समाजवादी पार्टी से गठबंधन है। रालोद 20 सीटों पर चुनाव लड़ रहा है। जयंत चौधरी जाट समुदाय के सबसे बड़े नेता चौधरी चरण सिंह के पौत्र हैं। मुजफ्फरनगर को जाटलैड की राजधानी कहा जाता है। मुजफ्फरनगर में छह विधानसभा सीटे हैं। इस जिले में हिन्दुओं की आबादी करीब 57 फीसदी और मुसलमानों की आबादी करीब 41 फीसदी है। हिन्दुओं में करीब 26 फीसदी दलित और 23 फीसदी जाट समुदाय की आबादी है। सपा और रालोद जाट -मुस्लिम समीकरण को साधने की कोशिश में हैं। जयंत चौधरी ने मुजफ्फरनगर में चाट खाने के बहाने नौजवानों के मन मिजाज को पढने की कोशिश की। वैसे जयंत चौधरी को चाट बहुत पसंद है। अगर उन्हें किसी ने किसी मशहूर चाट की दुकान के बारे में बता दिया तो वे इसका आनंद लेने का मौका नहीं चूकते। उनके चाट खाने का एक बड़ा ही दिलचस्प राजनीतिक किस्सा है।

लखनऊ की लजीज चाट

लखनऊ की लजीज चाट

1 नवम्बर 2021 को जयंत चौधरी रालोद का घोषणा पत्र जारी करने के लिए लखनऊ आये थे। राजनीतिक कार्यक्रम के बाद वे अन्य नेताओं के साथ लखनऊ एयरपोर्ट लौट गये। रास्ते में किसी ने उनसे लखनऊ की एक मशहूर चाट दुकान की चर्चा कर दी। जयंत चौधरी एयरपोर्ट पहुंचे। वहां से उन्होंने एक कार्यकर्ता को सभी लोगों के लिए चाट लाने को भेज दिया। कुछ देर के बाद लखनऊ की लजीज चाट आयी। एयरपोर्ट के वीआइपी लाउंज में बैठ कर जयंत चौधरी रालोद के अन्य नेताओं के साथ चाट का आनंद उठाने लगे। इतने में वहां कांग्रेस के सांसद दीपेन्द्र सिंह हुड्डा भी पहुंच गये। उन्हें भी दिल्ली जाना था। दीपेन्द्र हुड्डा को देख कर जयंत चौधरी ने उन्हें भी चाट खाने का न्योता दिया। वे तुरंत राजी हो गये। दीपेन्द्र हुड्डा रालोद नेताओं के साथ चाट खाने लगे। जयंत चौधरी को लगा कि शायद चाट कम पड़ जाए इसलिए उन्होंने फिर एक व्यक्ति को और चाट लेने के लिए भेजा। एयरपोर्ट से एक गाड़ी ने चाट दुकान के लिए फर्राटा भरी।

जब जयंत चौधरी की चाट का इंतजार करने लगीं प्रियंका गांधी

जब जयंत चौधरी की चाट का इंतजार करने लगीं प्रियंका गांधी

दीपेन्द्र हुड्डा जब रालोद नेताओं के साथ चाट खा रहे थे उसी दरम्यान प्रियंका गांधी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी वहां पहुंच गये। प्रियंका गांधी और भूपेश बघेल उस दिन गोरखपुर से सभा कर के लौटे थे। एयरपोर्ट पर प्रियंका गांधी का चार्टर्ड प्लेन खड़ा था। जब प्रियंका गांधी को मालूम हुआ कि जयंत चौधरी ने लखनऊ की मशहूर चाट का ऑर्डर किया है तो वे भी इसका लुत्फ उठाने के लिए रुक गयीं। सभी नेता एयरपोर्ट के वीआइपी लाउंज में बैठ कर लखनऊआ चाट का इंतजार करने लगे। संयोग से उस दिन लखनऊ में सड़क जाम की समस्या थी। चाट पहुंचने में देर होने लगी। प्रियंका गांधी, जयंत चौधरी से बातें करने लगीं। चाट फिर भी नहीं आयी। जयंत चौधरी की फ्लाइट छूटने की नौबत आ गयी। तब प्रियंका गांधी ने जयंत चौघरी को अपने साथ चार्टर्ड प्लेन से दिल्ली चलने का औफर दिया। चाट के कारण जयंत चौधरी को अपनी फ्लाइट छोड़नी पड़ी। जयंत चौधरी बहुत देर तक प्रियंका गांधी के साथ बात करते रहे और उनके ही प्लेन से दिल्ली गये। इसके बाद ये अटकलें लगनी शुरू हो गयीं कि रालोद का कांग्रेस से गठबंधन होने वाला है। चाट ने राजनीतिक माहैल ही बदल दिया। हालां कि बाद में ऐसा हुआ नहीं। रालोद का सपा से गठबंधन हुआ।

मंत्री की पत्नी बना रहीं हलुआ

मंत्री की पत्नी बना रहीं हलुआ

डॉ. संजीव बालियान और उनकी पत्नी डॉ. सुनीता बालियान पेशे से वेटनरी डॉक्टर हैं। राजनीति में आने से पहले संजीव बालियन 2013 तक वेटनरी ड़ॉक्ट़र के रूप में सरकारी सेवा में थे। वे एक किसान परिवार से आते हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा की जाट राजनीति के वे प्रमुख रणनीतिकार हैं। मुजफ्फरनगर से लगातार दो बार लोकसभा का चुनाव जीत कर उन्होंने अपनी क्षमता साबित भी की है। लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव में इस बार भाजपा के लिए 2017 की तरह अनुकूल परिस्थितियां नहीं हैं। किसान आंदोलन की वजह से भाजपा की राजनीति इस इलाके में कुछ लड़खड़ायी है। इसलिए केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह और संजीव बालियान खुद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में डेरा जमाये हुए हैं। इस बीच संजीव बालियान के दिल्ली स्थित सरकारी बंगले की एक तस्वीर सार्वजनिक हुई जिसमें उनकी पत्नी सुनीत ईंट से बने चूल्हे पर एक बड़े कड़ाह में हलवा बना रहीं हैं। माना जा रहा है कि ये हलवा राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए बनाया जा रहा है। केन्द्रीय मंत्री की पत्नी भाजपा कार्यकर्ताओं को अपने हाथों से बना हलवा खिला कर उनका भवनात्मक रूप से समर्थन कर रही हैं। संजीब बालियान और सुनीता बालियन अपने सरकारी बंगले की जमीन पर खुद ही सब्जियों की खेती बी करते हैं। संजीब बालिय़ान खुद कुदाल चला कर खेतों की क्यारियां तैयार करते हैं। डॉ. सुनीता भी इस काम में पति की सहयोग करती हैं। मार्च 2020 में जब कोरोना संकट के समय पहली बार लॉकडाउन लगा था उस समय एक तस्वीर चर्चा में रही थी। इस तस्वीर में डॉ. संजीव बालियान खेत में कुदाल चला रहे हैं और डॉ.सुनीता बालियान पत्तागोभी की क्यारियों की निकौनी कर रही हैं। उत्तर प्रदेश की किसान राजनीति में इन तस्वीरों की बहुत अहमियत है।

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