School Approval Rules: अब गांव-शहर हर जगह खुल सकेंगे स्कूल, नक्शा पास कराने का नियम हुआ आसान, जानें डिटेल
UP School Approval Rules: उत्तर प्रदेश में अब स्कूल, कॉलेज खोलना पहले जितना जटिल नहीं रहेगा। सरकार ने शैक्षणिक संस्थानों के निर्माण और संचालन को लेकर कई पुराने नियमों में बदलाव करने की तैयारी कर ली है। इसका मकसद शिक्षा के क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देना और प्रक्रियाओं को सरल बनाना है।
नए प्रस्तावों के अनुसार, अब स्कूल परिसर के बाहर भी बसों की पार्किंग की व्यवस्था की जा सकेगी। पहले स्कूल के अंदर पार्किंग की अनिवार्यता थी, जिससे संस्थाओं को काफी दिक्कत होती थी। इसके अलावा, अब कम चौड़ाई वाली सड़कों पर भी स्कूल भवन का नक्शा पास हो सकेगा।

सरकार ने भवन निर्माण और विकास उपविधियों के प्रारूप को सार्वजनिक कर इस पर आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। प्रमुख सचिव आवास पी. गुरुप्रसाद ने स्पष्ट किया कि इससे शिक्षा संस्थानों की मंजूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति दोनों आएंगे।
स्कूल खोलने की शर्तें अब होंगी सरल
अब यूपी बोर्ड, CBSE, ICSE, AICTE आदि बोर्डों से संबद्ध स्कूलों के भवन नक्शे को पास कराने के लिए सड़क की चौड़ाई 12 मीटर नहीं, केवल 9 मीटर होना पर्याप्त होगा। यह परिवर्तन विशेष रूप से छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों में स्कूल खोलने की प्रक्रिया को आसान बनाएगा।
नए नियमों में यह भी सुनिश्चित किया गया है कि स्कूलों में खेल के मैदान और खुले क्षेत्र की व्यवस्था बनी रहेगी। यह छात्रों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए जरूरी माना गया है।
भवन निर्माण को लेकर मिलेगी राहत
स्कूल परिसर में अब बहुमंजिला पार्किंग बनाने की अनुमति दी जाएगी। इससे जमीन की बचत होगी और वाहन पार्किंग की समस्या भी हल होगी। इसके अलावा, स्कूल परिसर के भीतर 10 प्रतिशत क्षेत्र में अलग पार्किंग ब्लॉक बनाने की भी छूट दी गई है।
भवन निर्माण में फ्लोर एरिया रेशियो को सड़क की चौड़ाई के हिसाब से निर्धारित किया जाएगा। यानी चौड़ी सड़कों पर ऊंची इमारतों की अनुमति दी जाएगी, जिससे शहरी क्षेत्रों में जगह की कमी की समस्या का समाधान हो सकेगा।
शिक्षा संस्थानों की श्रेणियां भी होंगी कम
सरकार शैक्षणिक संस्थानों की श्रेणियों को 10 से घटाकर केवल 4 करने जा रही है। इससे नियमों की जटिलता कम होगी और निवेशकों को संस्थान स्थापित करने में सुविधा होगी।
राज्य सरकार का मानना है कि इन संशोधनों से शिक्षा के क्षेत्र में निजी निवेशकों को आकर्षित किया जा सकेगा। खासकर छोटे शहरों और कस्बों में स्कूल-कॉलेज खोलने का रास्ता आसान होगा, जिससे शिक्षा का स्तर और पहुंच दोनों बेहतर होंगी।












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