Karnataka Assembly Election 2023: यूपी के बाहर सियासी रण में जुटे Mayawati-Akhilesh, कहीं ये तो नहीं वजह
उत्तर प्रदेश के दो पूर्व सीएम मायावती और अखिलेश यादव यूपी के बाहर सियासी रण में उतरे हुए हैं। सपा-बसपा के चीफ निकाय चुनाव के बीच कर्नाटक में जोर शोर से प्रचार कर पार्टी को मजबूत करने की कवायद में जुटे हैं।

Mayawati And Akhilesh in poll-bound Karnataka: उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव शुरू होने से पहले ही राष्ट्रीय लोकदल (Rastriya Lokdal ) को निर्वाचन आयोग ने बड़ा झटका दिया था। आयोग ने आरएलडी की क्षेत्रिय पार्टी की सदस्यता खत्म कर दी थी। आयोग के इस फैसले के बाद यूपी के दो प्रमुख क्षेत्रीय दल सपा-बसपा सतर्क हो गए हैं। शायद यही वजह है कि अब ये दोनों दल दूसरे राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनावों में भी फोकस कर रहे हैं ताकि यूपी में हो रहे खराब प्रदर्शन की भरपाई वो दूसरे राज्यों में कुछ वोट प्रतिशत हासिल करके कर सकें।
यूपी से बाहर प्रचार करने निकलीं मायावती
यूपी के अलावा अब बसपा तेलंगाना और कर्नाटक में होने वाले चुनावों में अपना हाथ आजमा रही है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती कर्नाटक में एक जनसभा को संबोधित करने के बाद रविवार को तेलंगाना में एक रैली को संबोधित करेंगी। अब यूपी के क्षेत्रीय दलों में इस बात का डर सता रहा है कि यदि पार्टी का वोट प्रतितशत निर्वाचन आयोग के तय मानक से कम हुआ तो आरएलडी की तरह उनसे भी क्षेत्रिय पार्टी का दर्जा छिन जाएगा।
दक्षिण के राज्यों में आधार मजबूत करने की कोशिश
बसपा के एक नेता ने कहा कि पार्टी प्रमुख दिसंबर में संभावित तेलंगाना विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा करेंगी। दरअसल, सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी आरएस प्रवीण कुमार के पार्टी में शामिल होने और राज्य इकाई का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद मायावती की तेलंगाना की यह पहली यात्रा है। बसपा विधानसभा चुनाव से पहले अपने कैडर को लामबंद करने और दक्षिणी राज्य में अपना आधार फैलाने की योजना बना रही है। 2014 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने दो सीटों पर जीत हासिल की थी।
सपा के मुखिया भी कर्नाटक में कर रहे प्रचार
बसपा की तरह ही सपा के चीफ अखिलेश यादव भी अब यूपी के बाहर अपना प्रचार करने में जुटे हुए हैं। खासतौर से वह अपने पिता और यूपी के पूर्व सीएम मुलायम सिंह यादव की नीतियों का प्रचार करने में जुटे हैं। अखिलेश यादव ने 17 पार्टी उम्मीदवारों के प्रचार के लिए कर्नाटक का तीन दिवसीय दौरे किया। गुलबर्गा पहुंचने के कुछ मिनट बाद, जहां उनका पार्टी नेताओं द्वारा जोरदार स्वागत किया गया था अखिलेश ने पार्टी उम्मीदवार आरडी पाटिल के लिए वोट मांगने के लिए अकबरपुर में पांच निर्धारित जनसभाओं में से पहली को संबोधित किया।
कनार्टक में 17 सीटों पर लड़ रही सपा
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि सपा का कर्नाटक में 17 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया था। इन सीटों पर 50% से अधिक आबादी अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), 17% दलितों और 12% से अधिक मुसलमानों की है। हालांकि पार्टी के वोट प्रतिशत को मजबूत करने का एक प्रयास भी है। पार्टी प्रवक्ता और पूर्व मंत्री राजेंद्र चौधरी ने कहा, "हम नियमित रूप से कर्नाटक में विधानसभा और लोकसभा चुनाव लड़ते रहे हैं और हमारे उम्मीदवार अतीत में भी जीते हैं। पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव राजस्थान में भी लड़ेगी।
AAP की तरह राष्ट्रीय पार्टी बनने की सपा की मंशा
हालांकि सपा की रणनीति आम आदमी पार्टी की तरह क्षेत्रिय पार्टी से राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल करने की है। केजरीवाल की पार्टी दो राज्यों में सरकार बना चुकी है। साथ ही कई अन्य राज्यों में उसके वोट प्रतिशत में इजाफा हुआ था। इसका परिणाम यह रहा कि चुनाव आयोग ने AAP को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा दे दिया था। कुछ इसी तरह सपा भी अब अपने आपको राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा दिलाना चाहती है जिसकी कवायद शुरू की गई है।












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