UP राज्यसभा चुनाव: मिशन 2024 को लेकर बीजेपी ने इन 6 चेहरों पर क्यों लगाया दांव, जानिए
लखनऊ, 30 मई: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव में जीत मिलने के बाद अब बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत 2024 में होने वाले आम चुनाव को जीतने में लगा दी है। आम चुनाव में जाने से पहले बीजेपी ने एक बार फिर जातीय संतुलन को साधते हुए राज्यसभा के लिए 6 चेहरों की घोषणा की है। इन 6 चेहरों में अलग अलग समुदायों के लोगों को शामिल कर उन जातियों को साधने का प्रयास किया गया है। आइए जानते हैं कि बीजेपी ने जिन 6 चेहरों पर दांव लगाया है उनकी 2024 के चुनाव के लिहाज से क्या अहमियत है।

लंबे समय बाद संगठन को आई लक्ष्मीकांत वाजपेयी की याद
उत्तर प्रदेश बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी को भी बीजेपी ने राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है। लक्ष्मीकांत वाजेपयी बीजेपी के वरिष्ठ नेता हैं और विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने उनको अहम जिम्मेदारी देते हुए ज्वाइनिंग कमेटी का चेयरमैन बनाया था। उस समय उन्होंने कई नामचीन चेहरों को बीजेपी में शामिल कराया था। वाजेपयी 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे। तब यूपी में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। उस समय भी उन्होंने कार्यकर्ताओं के भीतर आत्मविश्वास भरने का काम किया था। लोकसभा चुनाव में उनकी अगुवाई में यूपी में बीजेपी ने 73 सीटों पर जीत हासिल की थी।

निषाद समुदाय में पैठ बनाने के लिए बाबूराम पर दांव
जातीय गणित साधने में जुटी बीजेपी ने इस बार बुंदेलखंड के बीजेपी नेता बाबूराम निषाद पर अपना दाव लगाया है। बाबू राम निषाद की संगठन में अच्छी पैठ है और वो लंबे समय से बीजेपी के लिए काम कर रहे हैं। दरअसल बीजेपी ने पिछली बार गोरखपुर क्षेत्र के जय प्रकाश निषाद को राज्यसभा बनाया था लेकिन उनका कार्यकाल खत्म हो रहा है। इस बार बीजेपी ने संगठन के जुड़े कद्दावर नेता बाबूराम निषाद पर दांव लगाया है। बाबूराम क्षेत्रिय अध्यक्ष भी रह चुके हैं। पिछली बार किन्ही कारणों की वजह से वह राज्यसभा जाने में कामयाब नहीं हुए थे लेकिन इस बार संगठन ने उनपर भरोसा जताते हुए राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है।

संगीता यादव को मिलना रिटर्न गिफ्ट
चौरीचौरा की विधायक रहीं संगीता यादव को रिटर्निंग गिफ्ट मिल गया। राधामोहन दास अग्रवाल ने सीएम योगी आदित्यनाथ के लिए अपनी सीट छोड़ी थी, तो संगीता यादव को डॉ. संजय निषाद के बेटे सरवन निषाद के लिए अपनी सीट छोड़नी पड़ी। अब भाजपा ने दोनों पूर्व विधायकों को राज्यसभा भेजने के लिए टिकट दिया है।

योगी की पसंद हैं राधा मोहन दास अग्रवाल
योगी ने वर्ष 2002 में डॉ. राधामोहन दास अग्रवाल को बाल रोग विशेषज्ञ से विधायक बनाया था। उस समय भाजपा ने तीन बार से सदर सीट से विधायक रहे शिवप्रताप शुक्ला को टिकट दिया था, लेकिन गोरखपुर के तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ इसके खिलाफ थे। उन्होंने बगावत कर दिया। नौबत यहां तक आ गई कि योगी ने राधामोहन को निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ा दिया। जिसमें हिंदू महासभा और हिंदू युवा वाहिनी ने साथ दिया और योगी की वजह से उन्होंने शिवप्रताप शुक्ला को हराकर रिकॉर्ड जीत दर्ज की।

दर्शना सिंह को भी मिला राज्यसभा टिकट
बीजेपी की महिला नेता दर्शना सिंह भी राज्यसभा पहुंचने में कामयाब रही हैं। दर्शना सिंह को महेंद्र नाथ पांडेय का करीबी माना जाता था। इससे पहले वह यूपी बीजेपी महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष रह चुकी हैं जबकि वर्तमान में राष्ट्रीय महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष हैं। बीजेपी ने उनको राज्यसभा भेजकर ठाकुर समुदाय में एक अच्छा संदेश देने का काम किया है। दर्शना सिंह बीजेपी की पुरानी नेता रही हैं और उनके पास संगठन का बड़ा अनुभव भी है। इस लिहाज से उनको भेजा गया है। वहीं बीजेपी ने एक तरफ जहां जातीय समीकरण साधने की कवायद की है वहीं दूसरी ओर पार्टी को महिलाओं को टिकट न देने के दावे को भी खारिज करने का काम किया है।

सुरेंद्र सिंह नागर पर फिर बीजेपी ने लगाया दांव
पश्चिमी यूपी में बीजेपी की स्थिति मजबूत करने के लिए बीजेपी ने सुरेंद्र सिंह नागर को दोबारा राज्यसभा भेजने का फैसला किया है। नागर पश्चिम के एक बड़े गुर्जर नेता हैं और बीजेपी ने इनको टिकट देकर इस समुदाय को साधने का प्रयास किया है। सुरेंद्र नागर दूसरी बार राज्यसभा जा रहे हैं। इससे पहले भी वह बीजेपी के टिकट पर राज्यसभा जाने में कामयाब रहे हैं। नागर हालांकि एक बड़े उद्योगपति भी हैं इस लिहाज से बीजेपी के लिए वह शूट करते हैं। बीजेपी ने उनका टिकट फाइनल कर एक तीर से कई निशाने साधने का प्रयास किया है।












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