लखीमपुर खीरी हिंसा: सुप्रीम कोर्ट में बोली यूपी सरकार- हमने तो आशीष मिश्रा की जमानत का पुरजोर विरोध किया था
नई दिल्ली, 29 मार्च: बीते साल अक्टूबर में उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी हत्याकांड मामले में पीड़ितों के परिवार और गवाहों की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार और पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में जानकारी दी है। मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों के गवाहों और परिवारों की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी प्रयास किए हैं। वहीं यूपी सरकार ने ये भी बताया है कि आशीष मिश्रा की जमानत का उनकी ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में पुरजोर विरोध किया गया था।
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यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि सभी गवाहों की सुरक्षा की स्थिति को लेकर समीक्षा की जाती है और उनसे नियमित रूप से संपर्क किया जाता है। घटना में पीड़ितों के परिवारों को धमकी और गवाहों को परेशान करने की बातों पर यूपी सरकार ने ये जवाब दिया।
उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में उस याचिका के जवाब में ये कहा गया है कि राज्य ने मामले में आरोपी आशीष मिश्रा की जमानत अर्जी का प्रभावी ढंग से विरोध नहीं किया। उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि आशीष मिश्रा की जमानत का विरोध ना करने की बात पूरी तरह से गलत है। पुलिस के वकील की ओर से आशीष मिश्रा की जमानत याचिका का पुरजोर विरोध किया गया था।
मृतक किसानों के परिजनों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर कर आशीष मिश्रा की बेल का विरोध किया गया है। इस पर अदालत ने यूपी सरकार को नोटिस जारी किया था, जिसके जवाब में यूपी सरकार ने यह बात कही है।
बता दें कि लखीमपुर खीरी से लौट रहे किसानों पर कार चढ़ाए जाने की घटना में कई लोगों की जान गई थी। 3 अक्टूबर, 2021 की इस घटना में आशीष मिश्रा किसानों को कार से कुचलने के आरोपी हैं और फिलहाल जमानत पर हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच से आशीष मिश्रा को जमानत मिली है। आशीष गृह राज्यमंत्री अजय टेनी के बेटे हैं।












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