यूपी निकाय चुनाव: 17 नगर निगम में से 9 की गईं आरक्षित, जानें प्रमुख शहरों की सीटों का हाल
यूपी में नगर निकाय चुनाव के लिए मेयर और अध्यक्ष की कुल 760 सीटों के आरक्षण की अनंतिम अधिसूचना गुरुवार को जारी कर दी गई।

उत्तर प्रदेश सरकार ने गुरुवार को निकाय चुनाव को लेकर नए परिसीमन और आरक्षण की अधिसूचना जारी कर दी थी। राज्य में नगर निगम की 17, नगर पालिका परिषद की 199 और 544 नगर पंचायत की सीटें हैं। जिनकी आरक्षण सूची आ चुकी है। आज हम प्रदेश की 17 नगर निगम सीटों की बात करने वाले हैं। इन 17 नगर निगम सीटों में लखनऊ, कानपुर, गाजियााद, आगरा और वाराणसी की सीटों पर सभी की नजर रहती है।
यूपी सरकार ने 17 नगर निगम की सीटों में 9 को आरक्षित रखा है। 8 सीटों को अनारक्षित रखा है। आरक्षित 9 सीटों में 6 सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व रखी गई हैं। जिनमें लखनऊ, कानपुर और गाजियाबाद सीटों को सामान्य महिला सीटों घोषित किया गया है। जबकि फिरोजाबाद औऱ शाहजहांपुर सीटों को पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित किया गया है। वहीं आगरा की सीट अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित की गई है। वाराणसी, प्रयागराज,अलीगढ़, बरेली, मुरादाबाद, गोरखपुर, अयोध्या और मथुरा-वृन्दावन सीट को अनराक्षित रखा गया है।

लखनऊ
लखनऊ नगर निगम चुनाव पर सभी की नजर रहती है। लखनऊ की सीट सामान्य महिला के लिए रिजर्व है। फिलहाल लखनऊ की महापौर संयुक्ता भाटिया है। वह लखनऊ की पहली महिला महापौर है। लेकिन अब जबकि सरकार निकाय चुनाव कराने जा रही है तो लखनऊ की सीट को लेकर बीजेपी में जबरदस्त मारा-मारी है। जहां एक और मौजूदा महापौर संयुक्ता भाटिया फिर से टिकट पाने की जुगत हैं तो वहीं महिला दावेदारों में सपा संरक्षक स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव की पुत्रवधु अपर्णा यादव बिष्ट और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय अखिलेश दास की पत्नी अल्का दास का नाम प्रबल दावेदारों में शामिल है।
2017 में बीजेपी में शामिल हुई अपर्णा को टिकट नहीं मिला था। ऐसे में अब भाजपा और सरकार का एक बड़ा वर्ग अपर्णा को टिकट देकर राजधानी की महापौर बनाने की पैरवी कर रहा है। वहीं भाजपा के वैश्य नेताओं ने प्रमुख कारोबारी विराज सागर दास की मां और स्व. अखिलेश दास की पत्नी अल्का दास को टिकट दिलाने की पैरवी कर रहा है। वर्तमान महापौर संयुक्ता भाटिया अपनी पुत्रवधु रेशू भाटिया के लिए भी दावेदार ठोंक रही हैं।
वहीं समाजवादी पार्टी की महिला दावेदारों की बात करें तो पिछली बार मेयर पद की प्रत्याशी रहीं मीरा वर्धन फिर से दावेदारी ठोंक रही हैं। मीरा आचार्य नरेंद्र देव के पौत्र यशोवर्धन की पत्नी हैं। दूसरा नाम पार्टी की महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष जूही सिंह का है। जूही सिंह डिंपल यादव की करीबी मानी जाती हैं। तीसरा नाम सीमा सिंह पटेल का चल रहा है। वैसे लखनऊ में कई सपा नेता इन दिनों प्रचार में जुटे नजर आ रहे हैं।
कानपुर
कानपुर मेयर सीट एक बार फिर अनारक्षित सूची में रखी गई है। 2017 के निकाय चुनाव में 21 साल बाद मेयर सीट महिला के लिए आरक्षित की गई थी। इस बार भी सीट अनारक्षित है। इस सीट पर पिछले तीन कार्यकाल से बीजेपी का कब्जा है। पिछली बार बीजेपी की प्रमिला पांडेय जीती थीं। वहीं इस बार 37 महिलाएं भी पार्षद के रूप में नगर निगम के सदन में पहुंचेंगी।
वाराणसी
वाराणसी सीट की बात करें तो पिछली बार ये सीट पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित थी। यहां से बीजेपी की मृदुला जायसवाल चुनाव जीतकर मेयर बनी थीं। इस बार सीट अनारक्षित है। ऐसे में वाराणसी में बीजेपी में अदर टिकट को लेकर घमासान मचा हुआ है। ऐसा ही हाल समाजवादी पार्टी के अंदर हैं। यहां भी करीब 1 दर्जन सपा नेता अपनी दावेदारी ठोंक रहे हैं।
गाजियाबाद
गाजियाबाद में लगातार दूसरी बार मेयर की सीट महिला के नाम ही होगी। मेयर सीट महिला के लिए आरक्षित की गई है। 2017 में हुए चुनाव में भी मेयर की सीट महिला के लिए आरक्षित थी। तब बीजेपी की आशा शर्मा मेयर बनी थीं। गाजियाबाद नगर निगम में महिला आरक्षण के बाद मेयर के टिकट के कई महिला नेता दावेदारी ठोंक रही हैं। इनमें सबसे मजबूत दावा करने निवर्तमान मेयर आशा शर्मा का है। इसके अलावा बीजेपी उपाध्यक्ष बनीं सुनीता दयाल भी दावेदारों में शामिल हैं।
आगरा नगर निगम
आगरा नगर निगम को अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित किए जाने के बाद कई बीजेपी नेता मेयर पद की रेस से बाहर हो गए हैं। 2017 नगर निगम चुनाव में बीजेपी के नवीन जैन ने जीत हासिल की थी। लेकिन अब एससी महिला सीट होने के चलते वे रेस से बाहर हो गए हैं।
गोरखपुर
सीएम योगी के गृह नगर गोरखपुर की सीट मेयर पद के लिए सामान्य घोषित की गई है। साल 2017 में मेयर की सीट फिर अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित होने के बाद भाजपा के टिकट पर सीताराम जायसवाल मेयर बने थे। इस बार सीट सामान्य है, ऐसे में मेयर पद के लिए कोई भी ताल ठोंक सकता है।
मथुरा वृंदावन
मथुरा वृंदावन नगर निगम सीट को अनारक्षित रखा गया है। पिछली बार मथुरा वृंदावन नगर निगम की सीट पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित की गई थी। 2017 में योगी सरकार बनने के बाद मथुरा वृंदावन को मिलाकर नगर निगम बनाया गया था। 2017 में बीजेपी के मुकेश आर्य बन्धु चुनाव जीतकर पहले मेयर बने थे। सीट इस बार सामान्य होने के बाद यहां तंगड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा।
अयोध्या
नगर निगम के चुनाव में अयोध्या की सीट अनारक्षित रखी गई है। वर्तमान में बीजेपी के नेता ऋषिकेश उपाध्याय अयोध्या के महापौर हैं। ऐसे में एक बार से उन्हें अयोध्या मेयर पद के उम्मीदवारों की लिस्ट में सबसे आगे माना जा रहा है।












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