UP Nikay Chunav: लोकसभा चुनाव 2024 से पहले सभी पार्टियों को दमखम दिखाने का आखिरी मौका

यूपी में निकाय चुनाव को लेकर सभी दल चुनाव प्रचार में जुटे हैं। पहले चरण में 4 मई को मतदान होगा। हालांकि इस बार का चुनाव उन पार्टियों के लिए काफी अहम है जिन्होंने 2022 के चुनाव में अच्छा प्रदर्शन नहीं किया था।

योगी आदित्यनाथ

urban local bodies elections in Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश में शहरी स्थानीय निकाय चुनाव की सरगर्मी बढ़ गई है। विधानसभा चुनाव में हाशिए पर रही बसपा और कांग्रेस अपना दमखम दिखा पाएंगी यह देखना दिलचस्प होगा। हालांकि सभी राजनीतिक दल चुनाव के लिए कमर कसने का दावा कर रहे हैं, लेकिन 17 नगर निगम कस्बों और नगर पालिका परिषद में लड़ाई दो प्रमुख दावेदारों भारतीय जनता पार्टी (Bhartiya Janta Party) और समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के बीच होने की संभावना है।

निकाय चुनाव में सभी पार्टियों की होगी अग्निपरीक्षा

2022 के यूपी विधानसभा चुनावों में हार के बाद राज्य की समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी जैसी पार्टियों के लिए अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का यह आखिरी मौका हो सकता है। 403 सदस्यीय उत्तर प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस ने दो और बसपा ने केवल एक सीट जीती थी। कांग्रेस और बसपा के लिए यह दमखम दिखाने वाला चुनाव होगा। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो हालांकि निकाय चुनाव में बसपा-कांग्रेस के लिए ज्यादा संभावनाएं नहीं दिख रही हैं लेकिन अगर वह गंभीरता से इस चुनाव को लड़ती हैं तो 2024 से पहले उनको एक अच्छी बूस्टर डोज मिल सकती है।

सपा के पास अच्छा करने का एक और अवसर

सपा के लिए हालांकि यह चुनाव अपनी लोकप्रियता दिखाने का एक और अवसर है। 2022 के चुनावों में सपा की सीटों की संख्या 2017 के मुकाबले बढ़ी थीं। सपा 47 सीटों से बढ़कर 111 सीटों तक पहुंच गई हैं। सत्तारूढ़ भाजपा अपनी चुनावी नीति के अनुसार शहरी स्थानीय निकाय चुनावों को गंभीरता से ले रही है। बीजेपी 2014 से राज्य में लोकसभा और यूपी विधानसभा चुनाव जीत रही है। बीजेपी ने 2017 और 2022 यूपी विधानसभा चुनाव और 2019 लोकसभा चुनाव जीते हैं।

निकाय चुनाव में सहयोगी दलों के साथ नहीं बैठ रहा तालमेल

हालांकि शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए विपक्षी दलों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर कोई तालमेल नहीं दिख रहा है। सपा और रालोद के बीच जहां सीटों को लेकर मतभेद सामने आए हैं वहीं दूसरी ओर बीजेपी और उसकी सहयोगी पार्टियों के बीच भी अंदरखाने सीटों को लेकर खींचतान चल रही है। वरिष्ठ पत्रकार राजीव रंजन सिंह कहते हैं कि, निकाय चुनाव एक तरह से 2024 से पहले सभी दलों के लिए लिटमस टेस्ट की तरह होगा। यहां जो पार्टी अच्छा प्रदर्शन करेगी वह नए जोश और उत्साह के साथ 2024 के महासमर में उतरेगी।

यूपी निकाय चुनाव को गंभीरता से ले रही सभी पार्टियां

दरअसल शहरी स्थानीय निकाय चुनाव ऐसे समय में हो रहे हैं जब कर्नाटक में 10 मई को विधानसभा चुनाव होने वाला है। वहां पर भी राजनीतिक दलों का फोकस है। केंद्र की सत्ता पर काबिज भाजपा को कांग्रेस से कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि राजनीतिक पार्टियां उत्तर प्रदेश के शहरी स्थानीय निकाय चुनावों को कोई कम महत्व नहीं दे रहे हैं क्योंकि यहां से 80 लोकसभा सांसद चुने जाते हैं।

यूपी में दो चरणों में होगा निकाय चुनाव

आयोग ने 760 स्थानीय निकायों में 14,864 जनप्रतिनिधियों के चुनाव के लिए मतदान दो चरणों में 4 मई और 11 मई को होगा। मतगणना 13 मई को होनी है। चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और पारंपरिक पेपर मतपत्र दोनों पर किया जाएगा। जहां महापौर और पार्षदों का चुनाव ईवीएम के माध्यम से होगा, वहीं नगर पालिका परिषद और नगर पंचायत चुनावों के लिए मतपत्रों का इस्तेमाल किया जाएगा।

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