UP News: नागपंचमी पर युवक ने सांप के साथ बनाई रील, लेकिन एक पल में बदल गया पूरा सीन!
UP News: नागपंचमी के अवसर पर रील बनाने के चक्कर में एक युवक को सांप ने डस लिया। मामला औरैया कोतवाली क्षेत्र के दयालपुर-भीखमपुर मोहल्ले का है, जहां 23 वर्षीय युवक अमित ने सोशल मीडिया के लिए एक वीडियो शूट करते समय सांप को गले में डाल लिया। इसी दौरान सांप ने उसे डस लिया, जिससे उसकी हालत बिगड़ गई।
हादसे के तुरंत बाद परिजनों ने युवक को जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने इलाज शुरू कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार, समय रहते उपचार मिलने से स्थिति अब स्थिर है और खतरे से बाहर बताई जा रही है। यह पूरी घटना मंगलवार दोपहर नागपंचमी के दौरान हुई, जब मोहल्ले में एक सपेरा नाग लेकर पहुंचा था।

बताया जा रहा है कि युवक ने रील बनाने की चाहत में सांप का फन पकड़कर उसे गले में डाल लिया था। जैसे ही उसने सांप को छोड़ा, नाग ने उसके हाथ में काट लिया। कुछ ही मिनटों में युवक की तबीयत बिगड़ने लगी और वह बेहोश होकर गिर पड़ा।
वायरल वीडियो से मचा हड़कंप
इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। वीडियो में युवक को सांप के साथ पोज देते हुए देखा जा सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि युवक अक्सर रील्स बनाकर सोशल मीडिया पर डालता था और इसी आदत ने उसे इस बार अस्पताल पहुंचा दिया। मोहल्ले में इस घटना के बाद से दहशत का माहौल है और परिजन भी सदमे में हैं।
समय पर पहुंचायें अस्पताल
डॉक्टरों और विष विज्ञान विशेषज्ञों ने इस घटना को गंभीर मानते हुए चेतावनी जारी की है। लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के प्रोफेसर डॉ. सीएम सिंह के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 30 से अधिक प्रकार के सांप पाए जाते हैं, जिनमें से 18 प्रजातियां ज़हरीली होती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि कोबरा, करैत, रसेल वाइपर और सॉ स्केल्ड वाइपर जैसे जहरीले सांपों के काटने पर ही विशिष्ट एंटीवेनम दवा उपलब्ध है, जो अन्य प्रजातियों के जहर पर भी प्रभावी होती है। समय पर अस्पताल पहुंचने से पीड़ित की जान बचाई जा सकती है।
अफवाहों और घरेलू इलाज से बचें
डॉक्टरों ने साफ किया है कि सांप काटने की स्थिति में घबराएं नहीं और न ही पारंपरिक या घरेलू इलाज करें। न घाव को चूसें, न बांधें और न ही बर्फ लगाएं।
पीड़ित को तुरंत वाहन से नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं और किसी भी तरह की झाड़-फूंक, तांत्रिक या ओझा पर भरोसा न करें। समय पर दी गई चिकित्सा ही जीवन बचा सकती है।












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