UP: नगर निकाय में आरक्षण को लेकर पिछड़ा वर्ग आयोग ने योगी को सौंपी रिपोर्ट, मिल सकती है कैबिनेट की मंजूरी
उत्तर प्रदेश में पिछड़ा वर्ग आयोग ने सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। आयोग को इसके लिए 31 मार्च तक का समय दिया था। रिपोर्ट मिलने के बाद सीएम ने आज कैबिनेट की बैठक बुलाई है जिसमें इसको हरी झंडी मिल सकती है।

UP Backward Class Commission: उत्तर प्रदेश में स्थानीय निकाय में आरक्षण को लेकर बनाए गए पिछड़ा वर्ग आयोग ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। आयोग को इस रिपोर्ट को दाखिल करने के लिए 31 मार्च की सीमा रखी गई थी। शासन में बैठे सूत्रों की माने तो सीएम योगी आदित्यनाथ ने रिपोर्ट को मंजूरी देने के लिए शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक बुलाई है।
दरअसल , 28 दिसंबर को गठित पांच सदस्यीय पैनल को राज्य सरकार ने ट्रिपल टेस्ट फॉर्मूले के तहत निर्धारित शासनादेश को पूरा करने और 31 मार्च तक रिपोर्ट संकलित करने के लिए कहा था। शहरी स्थानीय निकाय चुनाव के लिए शहरी विकास विभाग कमर कस चुका है।
पिछले साल 5 दिसंबर को ओबीसी मेयर और चेयरपर्सन के लिए 27% आरक्षण निर्धारित किया गया था। हालांकि, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 27 दिसंबर को आदेश दिया कि चुनाव ओबीसी उम्मीदवारों के लिए सीटों को आरक्षित किए बिना किया जाए।
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इसके बाद, राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया था जिस पर 4 जनवरी को रोक लगा दी गई थी। यूपी सरकार ने शीर्ष अदालत से कहा था कि आयोग द्वारा प्रकृति का अध्ययन करने के लिए एक अनुभवजन्य जांच करने के बाद वह चुनाव करवाएगी। और राज्य में शहरी स्थानीय निकायों में पिछड़ेपन के प्रभाव और आयोग की रिपोर्ट के आधार पर सीटों के आरक्षण की घोषणा की जाएगी।
आयोग ने 75 जिलों से तथ्य और आंकड़े एकत्र किए और स्थानीय प्रशासन से इलाकों के भीतर ओबीसी आबादी के आंकड़े मंगवाए। शहरी विकास विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "हम केवल तभी टिप्पणी कर पाएंगे जब रिपोर्ट हमारे सामने पेश की जाएगी। आयोग की सिफारिशों और निष्कर्षों को ध्यान में रखा जाएगा और आयोग की रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद ही कोटा को अंतिम रूप दिया जाएगा।"












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