UP News: अखिलेश यादव का व्यंग्य, क्या सियार-लोमड़ी मुआवज़ा ‘सर्प-दंश घोटाले’ का अगला अध्याय है?

UP News: उत्तर प्रदेश में वन्यजीवों के हमलों से जान गंवाने वालों के लिए सरकार ने एक नया फैसला लिया है। अब अगर किसी की मौत लोमड़ी या सियार के हमले से होती है, तो उसके परिजनों को 4 लाख रुपए मुआवजा मिलेगा। यह फैसला सामने आते ही राजनीतिक प्रतिक्रिया भी शुरू हो गई है।

इस मामले को लेकर समाजवादी पार्टी प्रमुख और यूपी के पूर्व सीएम सांसद अखिलेश यादव ने सरकार को घेरा और सवाल खड़े किए हैं। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर सरकार के इस कदम को व्यंग्यात्मक लहजे में आड़े हाथों लिया।

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उन्होंने लिखा कि जैसे मध्य प्रदेश में 'सर्पदंश मुआवजा घोटाला' हुआ था, वैसा ही कुछ अब उत्तर प्रदेश में होने वाला है। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या यह भी रिकॉर्ड होगा कि किसे सियार ने काटा और किसे लोमड़ी ने?

सवाल यह भी है कि क्या सरकार वाकई लोगों की जान बचाने के लिए काम कर रही है, या फिर सिर्फ मुआवजा योजनाओं के जरिए राजनीति साधी जा रही है? अखिलेश का कहना है कि असली जरूरत इस बात की है कि जंगलों की कटाई रोकी जाए, जिससे वन्यजीवों के हमले खुद ही कम हो जाएं।

जानवरों के हमले अब 'आपदा' की श्रेणी में

दरअसल, प्रदेश सरकार ने अब लोमड़ी और सियार जैसे छोटे वन्यजीवों के हमले से होने वाली मौतों को भी 'राज्य आपदा' की श्रेणी में रख दिया है। प्रमुख सचिव राजस्व पी. गुरु प्रसाद की ओर से इस संबंध में शासनादेश भी जारी कर दिया गया है।

यह फैसला वन्यजीव संघर्ष के तहत श्रेणी (बी) में रखा गया है। अब ऐसे मामलों में पीड़ित के परिजनों को 4 लाख की सहायता राशि मिलेगी। इससे पीड़ित परिवारों को तात्कालिक राहत मिल सकेगी और वन्यजीवों के साथ मानवीय संघर्ष को मान्यता भी दी जाएगी।

यह भी जान लिजिए

इससे पहले केवल बाघ, तेंदुआ, हाथी या मगरमच्छ जैसे खतरनाक जानवरों के हमले से मौत पर ही मुआवजा मिलता था। इन मामलों में सरकार 5 लाख तक की मदद देती है। अब लोमड़ी और सियार जैसे अपेक्षाकृत छोटे जानवरों के मामले भी इसी दायरे में शामिल कर लिए गए हैं।

राज्य सरकार का कहना है कि यह कदम बढ़ती मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थितियों को देखते हुए उठाया गया है। इसके लिए आपदा राहत कोष से खर्च किया जाएगा, जिससे जिलों को त्वरित सहायता पहुंचाई जा सके और लोगों को इससे राहत मिले।

विपक्ष ने उठाया सवाल

हालांकि विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार इस तरह के फैसलों से असल मुद्दों से ध्यान भटका रही है। अखिलेश यादव ने सीधा आरोप लगाया कि भाजपा शासित सरकारें सिर्फ मुआवजे की घोषणाएं कर जनता को भरमाने का काम कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि असली समाधान जंगलों को बचाने में है, ताकि जानवर अपने ठिकानों से बाहर न आएं। जब जंगल कटेंगे, तो जानवर बस्तियों की ओर आएंगे ही। ऐसे में मुआवजे से ज्यादा जरूरी है ठोस नीतियां बनाना।

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