UP-Kolkata Politics: "गैर कांग्रेसी मोर्चे" को लेकर कितनी अहम साबित होगी ममता-अखिलेश की मुलाकात?
देश में अगले साल आम चुनाव होने हैं। इससे पहले यूपी के पूर्व सीएम और सपा के चीफ अखिलेश यादव गैर कांग्रेसी मोर्चे के अपनी मुहिम में जुटे हुए हैं।ममता-अखिलेश की मुलाकात को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

Mamta-Akhilesh meets in Kolkata: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के चीफ अखिलेश यादव पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में शामिल होने के लिए कोलकाता पहुंचे हुए हैं। जैसा कि अटकलें लगाईं जा रहीं थी उसके मुताबिक ही अखिलेश ने शुक्रवार को अपने चाचा और सपा के वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव, सपा के राष्ट्रीय महासचिव किरणमय नंदा के साथ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की। दोनों के बीच हुई इस मुलाकात के कई सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं। सूत्रों की माने तो जिस तरह से प्रवर्तन निदेशालय (ED) के निशाने पर विपक्ष के नेता हैं उसको लेकर भी इन दोंनों के बीच चर्चा हुई है।
बीजेपी के खिलाफ मजबूत गठबंधन देने की कवायद
दरअसल कोलकाता में ममता बनर्जी और अखिलेश यादव के बीच हुई मुलाकात का सबसे बड़ा उद्देश्य यही है कि देश में बीजेपी को हराने के लिए गैर कांग्रेसी तीसरा मोर्चा का स्वरूप तय किया जा सके। राजनीतिक जानकारों की माने तो अखिलेश यादव इस बात की कोशिश में जुटे हैं कि इस धारणा को तोड़ा जाए कांग्रेस की अगुवाई में बना गठबंधन ही बीजेपी को हरा सकता है। इसलिए कांग्रेस ही बीजेपी का मुकाबला कर सकती है इस परसेप्शन को बदलने की कोशिश हो रही है। इसी रणनीति के तहत अखिलेश कांग्रेस विरोधी नेताओं से ही मिल रहे हैं। अखिलेश ने अपने एक बयान में यह भी कहा कि जो दल बीजेपी की वैक्सीन लगवा चुके हैं हम उनसे दूर ही रहेंगे।

ममता-अखिलेश के साथ आ सकते हैं नवीन पटनायक
समाजवादी पार्टी के सूत्रों की माने तो ममता और अखिलेश के बीच हुई मुलाकात में तय हुआ कि भविष्य में गैर कांग्रेस और गैरबीजेपी मोर्चे को लेकर प्रयास जारी रखा जाएगा। इसको लेकर ममता जल्द ही बीजू जनता दल और ओडि़शा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से मुलाकात करेंगी। वह इस मुलाकात में देश में बन रहे तीसरे मोर्चे के संभावित स्वरूप के बारे में चर्चा कर सकती हैं। इस वजह से ममता- नवीन पटनायक की मुलाकात काफी होगी। हालांकि जानकारों का कहना है कि यूपी में 80 लोकसभा सीटें, पश्चिम बंगाल में 42 लोकसभा सीटें और उड़ीसा में 21 लोकसभा सीटें हैं। फिलहाल तीन चेहरे इस गैर कांग्रेसी गठबंधन में शामिल हो सकते हैं।

केसीआर को भी इस मोर्चे में लाने की कोशिश
अखिलेश यादव और ममता बनर्जी की इस मुहिम में तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव भी जुड़ सकते हैं क्योंकि उनके राज्य में भी स्थिति वही है। वहां राव का मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस से ही है। वह भी नहीं चाहेंगे कि देश में कांग्रेस के नेतृत्व में गठबंधन बने। वह भी इस गैर कांग्रेसी गठबंधन से जुड़ सकते हैं। हालांक यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि अखिलेश-ममता की यह मुलाकात आने वाले समय में क्या गुल खिलाएगी लेकिन जिस तरह से अखिलेश यादव इस पूरे मुहिम की अगुवाई कर रहे हैं उसको लेकर बीजेपी भी अंदरखाने अपनी रणनीति तैयार करने में जुटी होगी।

लोकसभा चुनाव में एक या दो सीटें ममता को दे सकते हैं अखिलेश
सपा के सूत्रों की माने तो 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव यूपी में ममता को एक दो सीटें दे सकते हैं। इसकी वजह बीजेपी के बगावती तेवर वाले नेता वरूण गांधी हैं। वरूण गांधी को लेकर समाजवादी पार्टी के अंदर काफी हलचल देखी जा रही है। अभी हाल ही में वरूण गांधी ने राहुल गांधी के बयान का विरोध भी किया है। यह उसी से जोड़कर देखा जा रहा है। सूत्रों की माने तो वरूण गांधी आने वाले लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के तोर पर पीलीभीत से चुनाव लड़ सकते हैं। वरूण पहले ही बीजेपी के खिलाफ बयान दे रहे हैं और कांग्रेस के खिलाफ उनके बयान इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि आने वाले समय में वो अपनी स्टैंड बदल सकते हैं।

यूपी विधानसभा चुनाव में ममता ने किया था प्रचार
दरअसल सपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच ट्यूनिंग बहुत पुरानी है। 2012 में भी मुलायम के नेतृत्व में सपा की कार्यकारिणी की बैठक कोलकाता में हुई थी। एक साल पहले यूपी में हुए विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने बनारस में अखिलेश यादव के साथ एक महत्वपूर्ण रैली में हिस्सा लिया था। मोदी के गढ़ में हुई इस रैली में ममता ने पीएम मोदी के खिलाफ काफी तीखे तेवर दिखाए थे। ममता बनर्जी ने यूपी विधानसभा का चुनाव अखिलेश यादव के साथ मिलकर लड़ा था। इसके बाद से ही ममता-अखिलेश के बीच समय समय पर मुलाकात होती रही है।












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