Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Explainer: क्या योगी को साइडलाइन कर पंकज चौधरी को बनाया गया UP BJP अध्यक्ष? 2027 में खेल बदलेंगे मोदी-शाह!

UP BJP President Pankaj Chaudhary: उत्तर प्रदेश भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री और महाराजगंज के सांसद पंकज चौधरी होंगे। पंकज चौधरी ने 13 दिसंबर को लखनऊ स्थित भाजपा कार्यालय में नामांकन दाखिल कर दिया। 14 दिसंबर को औपचारिक घोषणा होनी है। दिलचस्प बात यह है कि उनके अलावा किसी और नेता ने नामांकन नहीं किया। यानी पंकज चौधरी का निर्विरोध अध्यक्ष बनना तय माना जा रहा है।

पंकज चौधरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के करीबी माने जाते हैं। पीएम मोदी इनके घर भी पैदल चलकर जा चुके हैं। पंकज चौधरी योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर से आते हैं, महाराजगंज से सात बार सांसद रहे हैं और ओबीसी की कुर्मी बिरादरी से ताल्लुक रखते हैं। नामांकन के वक्त मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक समेत करीब दस वरिष्ठ नेताओं ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा। तस्वीर साफ दिखती है, लेकिन सियासी सवाल यहीं से शुरू होते हैं। राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया पर इस बात की चर्चा है कि पंकज चौधरी का नाम दिल्ली से फाइनल किया गया है।

UP BJP President Pankaj Chaudhary

▶️ योगी की सहमति या दिल्ली का फैसला?

पंकज चौधरी के नाम के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर यह चर्चा तेज हो गई कि क्या यह फैसला पूरी तरह दिल्ली से आया है और क्या इसमें योगी की सक्रिय सहमति नहीं थी। सवाल इसलिए भी उठे क्योंकि उत्तर प्रदेश से पहले कई राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष बदले गए, लेकिन कहीं इतनी अंदरूनी खींचतान की चर्चा नहीं हुई। यहां तक कहा जा रहा है कि राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष को मुख्यमंत्री से कई दौर की बैठकें करनी पड़ीं।

चर्चा यह भी है कि प्रदेश अध्यक्ष का चयन इस बार सीएम योगी की पसंद से ज्यादा केंद्रीय नेतृत्व की रणनीति के मुताबिक हुआ। बस इतना संतुलन रखा गया कि ऐसा नाम न आए, जिस पर योगी किसी भी सूरत में सहमत न हों। संदेश साफ बताया जा रहा है कि सरकार लखनऊ चलाएगी, संगठन दिल्ली।

▶️ 2027 का संकेत और संगठन बनाम सरकार

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह फैसला सिर्फ संगठनात्मक बदलाव नहीं है, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी का हिस्सा है। पंकज चौधरी को संगठन की कमान देकर यह संकेत दिया गया है कि चुनावी रणनीति पूरी तरह केंद्रीय नेतृत्व के हाथ में होगी। यह भी कहा जा रहा है कि जैसे 2017 में मुख्यमंत्री का फैसला दिल्ली से हुआ था, वैसे ही 2027 के लिए संगठन का चेहरा भी दिल्ली तय कर रही है।

भाजपा में सत्ता की लड़ाई कभी खुली सड़क पर नहीं दिखती। यहां रणनीति बंद कमरों में बनती है। इतिहास गवाह है कि अटल बिहारी वाजपेयी, गोविंदाचार्य और कल्याण सिंह के दौर में भी ऐसे ही अंदरूनी संघर्ष देखने को मिले थे। "एक म्यान में एक ही तलवार" वाली कहावत भाजपा की राजनीति में बार-बार दोहराई जाती रही है।

UP BJP President Pankaj Chaudhary

▶️ मतभेद या रणनीति?

कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि पंकज चौधरी और योगी आदित्यनाथ के रिश्ते बहुत सहज नहीं रहे हैं। हाल ही में एक कार्यक्रम में योगी की तस्वीर न होने को लेकर भी चर्चा हुई। हालांकि दूसरा पक्ष यह कहता है कि पंकज चौधरी गोरक्षपीठ से जुड़े पुराने भक्त हैं और योगी के मार्गदर्शन में ही संगठन को मजबूत करेंगे।

गोरखपुर की राजनीति में सीएम योगी आदित्यनाथ और पंकज चौधरी को भाजपा के दो बड़े चेहरे माना जाता है। दोनों की कार्यशैली अलग है, लेकिन राजनीतिक पकड़ मजबूत है। एक को सरकार और दूसरे को संगठन की जिम्मेदारी देने के पीछे सत्ता और संगठन के संतुलन की सोच भी बताई जा रही है।

सच जो भी हो, इतना तय है कि पंकज चौधरी की ताजपोशी के साथ ही 2027 की सियासी शतरंज बिछ चुकी है। यह चुनाव सिर्फ उत्तर प्रदेश का नहीं होगा, बल्कि दिल्ली की राजनीति और भाजपा के भविष्य की दिशा भी यहीं से तय होगी। अब देखना यह है कि यह दांव पार्टी के लिए मास्टरस्ट्रोक साबित होता है या नई चुनौतियों की शुरुआत।

यहां पढ़ें सोशल मीडिया रिएक्शन

▶️ पंकज चौधरी पर क्यों खेला गया दांव

उत्तर प्रदेश की राजनीति में पंकज चौधरी को आगे बढ़ाना सिर्फ एक संगठनात्मक फैसला नहीं, बल्कि 2027 के पंचायत और विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा की बड़ी सामाजिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, पार्टी ने ओबीसी वर्ग, खासकर कुर्मी समाज को फिर से अपने पाले में मजबूती से जोड़ने के लिए यह दांव चला है। यादवों के बाद कुर्मी समाज यूपी में सबसे बड़ी आबादी वाला वर्ग है। लोकसभा चुनाव में इस समुदाय का एक हिस्सा PDA के नाम पर सपा की ओर झुका था, जिसे भाजपा अब वापस लाना चाहती है।

UP BJP President Pankaj Chaudhary

▶️ कुर्मी समीकरण और संगठन की चिंता

2024 के लोकसभा चुनाव में 11 कुर्मी सांसद चुने गए, जिनमें से सिर्फ 3 भाजपा के थे जबकि 7 सपा के खाते में गए। यह आंकड़ा भाजपा के लिए चेतावनी की तरह देखा गया। पार्टी नहीं चाहती कि कुर्मी वोट बैंक में और दरार पड़े। यही वजह है कि संगठन की कमान एक बार फिर इसी समाज से आने वाले नेता को सौंपी जा रही है। इससे पहले भी विनय कटियार, स्वतंत्र देव सिंह और ओम प्रकाश सिंह जैसे नेता इस जिम्मेदारी में रह चुके हैं। पंकज चौधरी इस कड़ी के चौथे नेता होंगे।

▶️ नामांकन के बाद क्या बोले पंकज चौधरी?

नामांकन दाखिल करने के बाद पंकज चौधरी ने मीडिया से बातचीत में साफ किया कि अंतिम घोषणा केंद्रीय नेतृत्व करेगा। उन्होंने कहा कि संगठन जो भी जिम्मेदारी देगा, उसे पूरी निष्ठा से निभाया जाएगा। यह पूछे जाने पर कि उन्हें इसकी जानकारी कब मिली, उन्होंने बताया कि सांसदों और विधायकों को लखनऊ बुलाया गया था और वहीं उन्हें नामांकन करने को कहा गया।

▶️ अटकलों पर जवाब और योगी का समर्थन?

मीडिया में चल रही चर्चाओं पर पंकज चौधरी ने कहा कि खबरें और संगठन का फैसला अलग-अलग चीजें हैं। भाजपा में कई बार ऐसी बातें चलती हैं जो सही नहीं होतीं। कुर्मी वोट बैंक और ओबीसी राजनीति पर उन्होंने फिलहाल रणनीति बताने से इनकार किया, लेकिन संकेत जरूर दिए कि जिम्मेदारी मिलने के बाद रोडमैप सामने आएगा। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ अभियान का उन्होंने खुलकर समर्थन करते हुए कहा कि यह देशहित में जरूरी कदम है और पार्टी पूरी तरह इसके साथ खड़ी है।

▶️ पंकज चौधरी का सियासी सफर

पंकज चौधरी को संगठन और प्रशासन दोनों का अनुभव रखने वाला नेता माना जाता है। राजनीति की शुरुआत उन्होंने पार्षद के तौर पर की। इसके बाद गोरखपुर के डिप्टी मेयर बने और 1991 में पहली बार संसद पहुंचे। वह सात बार सांसद चुने जा चुके हैं। कारोबारी पृष्ठभूमि से आने वाले चौधरी राहत रूह तेल कंपनी से जुड़े रहे हैं और एक कुशल प्लानर के तौर पर उनकी पहचान है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+