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UP Assembly Election 2022:रायबरेली सदर सीट से अदिति सिंह क्‍या भाजपा को दिला पाएंगी जीत?

UP Assembly Election 2022:रायबरेली सदर सीट से अदिति सिंह क्‍या भाजपा को दिला पाएंगी जीत?

लखनऊ, 21 जनवरी। उत्‍तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 के लिए लिए भारतीय जनता पार्टी ने शुक्रवार को अपने उम्‍मीदवारों की दूसरी लिस्‍ट जारी कर दी है। इस लिस्‍ट में कांग्रेस से बगावत कर पिछले दिनों भाजपा में शामिल हुईं विधायक अदिति सिंह को भाजपा ने रायबरेली सदर सीट से टिकट दिया है। अदिति सिंह रायबरेली की सदर विधानसभा सीट से दोबारा चुनाव लड़ेगी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अदिति सिंह पर भाजपा ने जो विश्‍वास जताया है उसमें वो खरी उतरेगी क्‍या भाजपा को जीत दिला पाएंगी? क्‍या पार्टी बदलने के बाद भी अदिति सिंह को वो ही जनता का प्‍यार मिलेगा जो 2017 के चुनाव में मिला था?

भाजपा ने अदिति सिंह का सियासी कद और बढ़ा दिया

भाजपा ने अदिति सिंह का सियासी कद और बढ़ा दिया

गौरतलब है कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के गढ़ रायबरेली में बगावत का इनाम अदिति सिंह व राकेश सिंह को भाजपा ने टिकट के रूप में दे दिया है। कांग्रेस व विधायक पद इस्‍तीफा देने के एक दिन बाद ही भाजपा रायबरेली सदर से विधायक रहीं अदिति सिंह का टिकट फाइनल कर भाजपा ने अदिति सिंह का सियासी कद और बढ़ा दिया है और उन पर भरोसा जताया है। पिछले चुनाव में अदिति और राकेश का परिवार कांग्रेस में था और यही दो ऐसे चेहरे थे, जो कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर सदन पहुंचे थे। पांच साल पहले दोनों ही परिवार कांग्रेस में थे और अब दोनों परिवार भाजपा में हैं।

अदिति ने पिता अखिलेश की छत्रछाया में लड़ा था पिछला चुनाव

अदिति ने पिता अखिलेश की छत्रछाया में लड़ा था पिछला चुनाव

अदिति सिंह 2017 में पहली बार चुनाव अपने पिता स्‍वर्गीय अखिलेश सिंह की छत्रछाया में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ी थी और जनता का जबरदस्‍त प्‍यार मिला था। अदिति चुनाव 90 हजार के अंतर से जीती थीं। उनके पिता अखिलेश सिंह की सदर सीट पर तूती बोलती थी। हालांकि अखिलेश कभी भाजपा के करीब नहीं रहे। हमेशा से उनकी नजदीकी कांग्रेस से रही और जब भी अखिलेश ने कांग्रेस से बगावत की तो निर्दलीय चुनाव लड़े और जीत हासिल की।

रायबरेली सदर सीट पर भाजपा की अभी तक नहीं हुई है जीत

रायबरेली सदर सीट पर भाजपा की अभी तक नहीं हुई है जीत

अखिलेश सिंह ने अपने जीवित रहते ही अदिति को कांग्रेस से चुनाव लड़वाया और अपनी सदर सीट का उत्‍तराधिकारी अपनी बेटी को बना गए। अभी तक रायबरेली सदर सीट पर भाजपा की जीत नहीं हुई है ऐसे में अदिति के भाजपा में शामिल होने से ये सीट भगवामय हो गई है। अब अदिति का चुनाव में ये पैतरा कितना सटीक होगा इसके बारे में जानिए राजनीतिक के जानकार क्‍या कहते हैं।

अदिति सिंह क्‍या भाजपा को दिला पाएंगी जीत?

अदिति सिंह क्‍या भाजपा को दिला पाएंगी जीत?

वरिष्‍ठ पत्रकार और राजनीतिक विशेषज्ञ नावेद शिकोह का इस बारे में कहना है अदिति सिंह द्वारा कांग्रेस से पूरी तरह से रिश्ता तोड़ने के कुछ ही समय बाद भाजपा ने उन्हें टिकट दे दिया। अपनी विधानसभा सीट से वो भाजपा को जीत दिलवा सकेंगी इस बात की प्रबल संभावना होने के कई कारण है। अदिति के स्वर्गीय पिता अखिलेश सिंह का सदर विधानसभा क्षेत्र का करीब तीन दशक तक एकक्षत्र राज रहा है। वो पांच बार यहां कांग्रेस से विधायक रहे। कहा जाता रहा कि वो भले ही कांग्रेस की सीट पर चुनाव लड़ते और जीतते थे पर इस विधानसभा क्षेत्र मे उनका खुद का जबरदस्त जनाधार था। बाहुबली कहे जाने वाले स्वर्गीय अखिलेश जनता से जुड़े ज़मीनी नेता थे। बीमारी के कारण उन्होंने 2017 में अपनी पुत्री अदिति को अपने स्थान पर चुनाव लड़वाया था। और वो भारी मतों से जीत हासिल होने पर कामयाब हुईं थीं। इसके बाद अदिति के पिता अखिलेश सिंह का देहांत हो गया था। देश में मोदी लहर के बाद उत्तर प्रदेश में जब भाजपा का परचम लहराया और कांग्रेस के गढ़ रायबरेली और अमेठी में भी कांग्रेस साफ हो रही थी तब अदिति अपने पिता की राजनीतिक विरासत का वर्चस्व बचाने में कामयाब रहीं।

अदिति की दावेदारी इसलिए लग रही है मजबूत

अदिति की दावेदारी इसलिए लग रही है मजबूत

नावेद शिकोह कहते हैं भाजपा की लहर में सदर विधायक ने कांग्रेस में उपेक्षा का आरोप लगाते हुए भाजपा से अनौपचारिक रिश्ता कायम कर लिया था और अब कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से बाकायदा इस्तीफा देकर उन्होंने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की ताल ठोक दी है। अपनी बगावत से चर्चाओं में आने के बाद इनकी दावेदारी इसलिए मजबूत लग रही है क्योंकि उनकी खुद की पहचान, पिता की राजनीतिक विरासत और भाजपा का जनाधार व बेहतरीन बूथ मैनेजमेंट उन्हें जिताने के लिए सहायक सिद्ध हो सकता है।

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