Timeline- जानिए कैसे पिछले 9 महीनों में खत्म हुए चाचा भतीजे के रिश्ते
जानिए कैसे अखिलेश यादव और शिवपाल यादव ने एक दूसरे से अलग किए अपने रास्ते, दोनों ही नेताओँ ने पिछले नौ महीनों में तय किया लंबा सफर
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रहे संग्राम के बाद आज शिवपाल यादव ने अलग पार्टी बनाने का ऐलान कर दिया है, ऐसे में शिवपाल यादव के इस ऐलान के बाद अब सपा के पूर्व मुखिया मुलायम सिंह यादव पर सबकी निगाहें होंगी कि वह क्या फैसला लेते हैं। शिवपाल यादव ने अपनी नई पार्टी के मुखिया के नाम के लिए मुलायम सिंह यादव के नाम की घोषणा की है, उन्होंने कहा कि नेताजी के सम्मान को वापस दिलाना होगा।

मुलायम सिंह पर नजर
सपा से अलग समाजवादी सेक्युलर मोर्चा बनाने का ऐलान करने वाले शिवपाल यादव के सामने सबसे बड़ी चुनौती मुलायम सिंह यादव हैं, जिस तरह से मुलायम सिंह ने पहले भी अपने फैसले को बदला है, ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या मुलायम सिंह यादव शिवपाल यादव का साथ देते हैं और उनकी नई पार्टी के अध्यक्ष पद को स्वीकार करते हैं। बहरहाल काफी लंबे समय से सपा परिवार के भीतर यह विवाद शुरु हुआ है आईए डालते हैं इस विवाद के टाइमलाइन पर एक नजर

सिंतंबर 2016 में हुई शुरुआत
- 12 सितंबर 2016- अखिलेश यादव ने दो दागी मंत्रियों गायत्री प्रजापति और राजकिशोर को मंत्रिमंडल से निकाला, जिनपर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे।
- 13 दिसंबर 2016- मुलायम सिंह ने अखिलेश यादव को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाया, उनकी जगह शिवपाल यादव को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया, जिसके बाद अखिलेश यादव ने शिवपाल यादव के अहम मंत्रालय उनसे वापस ले लिए।
- 16 सितंबर 2016- मुलायम सिंह ने शिवपाल यादव का इस्तीफा नामंजूर किया, बोले जब तक मैं जिंदा हूं सपा टूट नहीं सकती है। जिसके बाद शिवपाल ने कहा कि वह नेताजी के आदेश का पालन करेंगे।
- 20 सितंबर- शिवपाल यादव ने प्रदेश अध्यक्ष के तौपर अखिलेश यादव के 7 समर्थकों को हटाया, जिसमें 3 एमएलसी भी शामिल थे, इसके अलावा तीन सपा के युवा संगठनों के अध्यक्ष
- 23 अक्टूबर- अखिलेश यादव ने शिवपाल यादव व अन्य तीन लोगो को कैबिनेट से निकाला
- 7 दिसंबर- मुलायम सिंह ने अमर सिंह का कद बढ़ाया, उन्हें संसदीय बोर्ड का सदस्य बनाया
- 30 दिसंबर- मुलायम सिंह यादव ने शिवपाल यादव के कहने पर अखिलेश यादव व रामगोपाल यादव को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित किया। इसके पहले रामगोपाल यादव ने राष्ट्रीय अधिवेशन की आपात बैठक 1जनवरी 2017 को बुलाई थी।
- 31 दिसंबर- मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश और रामगोपाल यादव का निष्कासन वापस लिया, बावजूद इसके रामगोपाल यादव ने 1 जनवरी को आपातकालीन अधिवेशन बुलाया।
- 1 जनवरी 2016- जेनेश्वर मिश्रा पार्क में रामगोपाल यादव ने आपात बैठक कंवेशन बुलाई और इसमें अखिलेश यादव को पार्टी का मुखिया बनाया गया, अमर सिंह व शिवपाल यादव को पार्टी से बाहर किया गया।
- 16 जनवरी- चुनाव आयोग में पार्टी के चुनाव चिन्ह को लेकर दोनों गुट पहुंचे
- 31 जनवरी- अपना नामांकन दाखिल करते समय शिवपाल ने कहा कि वह नई पार्टी का गठन चुनाव के नतीजे आने के बाद करेंगे।
- फरवरी-मार्च- अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा ने चुनाव लड़ा, जिसके बाद पार्टी को बुरी हार का सामना करना पड़ा। सपा को सिर्फ 47 सीटें हासिल हुई, जोकि 1992 के बाद सपा का सबसे खराब प्रदर्शन है।
- 16 मार्च- अखिलेश यादव 100 दिन बाद एक साथ देखे गए, विधायकों की बैठक के दौरान दोनों नेता साथ दिखे।
- 25 मार्च- पार्टी की एग्जुक्युटिव बैठक से शिवपाल और मुलायम ने किया किनारा
- 27 मार्च- राम गोविंद चौधरी को विधानसभा में पार्टी का नेता बनाया गया।
- 28 मार्च- उत्तर प्रदेश के दोनों सदनों के विधायकों के द्वारा अखिलेश यादव को विधायक दल का नेता चुना गया।
- 2 अप्रैल- मुलायम ने कहा कि पीएम मोदी ने सही कहा था कि अखिलेश यादव ने मेरा अपमान किया इसी वजह से आप चुनाव हारे।
- 4 अप्रैल- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिवपाल यादव ने की मुलाकात
- 24 अप्रैल- शिवपाल ने फिर से इस मांग को आगे रखा कि अखिलेश यादव को हार की जिम्मेदारी लेनी चाहिए और पार्टी के अध्यक्ष के पद से इस्तीफा देना चाहिए।
- 30 अप्रैल- रामगोपाल यादव ने कहा कि शिवपाल यादव को पार्टी के संविधान की कोई जानकारी नहीं है, उन्होंने उन्हें पार्टी के लिए काम करने और बकवास बात नहीं करने की सलाह दी।
- 3 मई- शिवपाल यादव ने धमकी दी कि अगर अखिलेश यादव मुलायम सिंह यादव को पार्टी का अध्यक्ष नहीं बनाते हैं तो वह अलग पार्टी बनाएंगे
- 5 मई- शिवपाल ने समाजवादी सेक्युलर मोर्चा नाम की पार्टी बनाने का किया ऐलान

बगावत के साथ 2017 की शुरुआत













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