भतीजे को CM बनाने के लिए शिवपाल ने जो कुर्बानी दी वो बेकार गई ?, जानिए अब अखिलेश को क्यों दी ये नसीहत
लखनऊ, 17 मार्च: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के बाद एक तरफ जहां बसपा और कांग्रेस हार की समीक्षा में जुटी हुई है वहीं दूसरी ओर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के चीफ शिवपाल यादव का दर्द एक बार फिर छलक उठा है। शिवपाल ने कहा है कि सपा और प्रसपा के बीच गठबंधन अभी चलता रहेगा लेकिन अखिलेश यादव को उन्होंने नसीहत भी दे दी। शिवपाल ने कहा कि चुनाव के दौरान अखिलेश ने उनसे एक बार भी सलाह लेने की कोशिश नहीं की। यदि वो सलाह लिए होते तो उनको बताता कि कहां चूक हो रही है। लेकिन अब तो जो होना था हो गया। अब बीजेपी की चालाकियों से मिलकर लड़ना है। हालांकि शिवपाल के सामने इस बात की चुनौती होगी कि वह अपने करीबियों को एकजुट रख पाएं।

क्या शिवपाल की कुर्बानी बेकार गई
अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव प्रसपा के तहत चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन अपने परिवार की बात मानते हुए उन्होंने अखिलेश के साथ समझौता करना स्वीकार किया था। समझौते के बाद अखिलेश ने प्रसपा के चीफ शिवपाल को ही केवल एक सीट दी थी। शिवपाल जसवंत नगर सीट से चुनाव लड़े थे। शिवपाल ने तब कहा था कि सपा में उनके साथियों को वह सम्मान नहीं मिला जितनी उन्हें उम्मीद थी। शिवपाल ने अखिलेश के सामने करीब 100 सीटों की मांग रखी थी। उन्होंने दावा किया था कि इतनी सीटें मिल जाएंगी तो अखिलेश की सरकार बन जाएगी।

शिवपाल ने दी अखिलेश को नसीहत
उत्तर प्रदेश समाजवादी पार्टी में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के साथ चुनावी गठबंधन है। वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने चाचा शिवपाल सिंह पीएसपी को सिर्फ एक सीट दी थी। वहीं सपा से राजनीतिक गठबंधन करने के बाद भी शिवपाल अपना दर्द नहीं छुपा पा रहे हैं। खास बात यह है कि शिवपाल सिंह इटावा की जसवंत नगर सीट से सपा के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़े थे। शिवपाल ने चुनाव के दौरान भी कई मौकों पर कहा कि उन्हें केवल एक सीट ही दी गई है उनके करीबियों को सम्मान नहीं मिला। कई मंचों पर वो ये बात कह चुके हैं।

अखिलेश यादव को नेता मानते थे शिवपाल
इससे पहले भी शिवपाल यादव कई बार मीडिया के सामने अपना दर्द बयां कर चुके हैं और उनका दावा है कि अगर पीएसपी को 100 सीटें मिलतीं तो उसके उम्मीदवार चुनाव जीत जाते। शिवपाल ने हाल ही में इटावा में कहा था कि उन्होंने बीजेपी से लड़ने के लिए अपनी पार्टी की कुर्बानी दी है और गठबंधन में एक सीट के लिए राजी हो गए हैं। वहीं शिवपाल ने कहा था कि उनका मुकाबला अखिलेश यादव से है और जसवंत नगर के लोगों ने उन्हें सबसे ज्यादा वोटों से जीतकर विधानसभा भेजा था।

अब क्या होगा शिवपाल का अगला कदम
यूपी में चुनाव के दौरान शिवपाल यादव ने घोषण की थी कि वह भतीजे अखिलेश को सीएम बनाने के लिए हर कुर्बानी देने को तैयार हैं। चुनाव परिणाम आने के बाद अब ये साफ हो गया है कि अखिलेश की सीएम बनने की सारी उम्मीदें धराशायी हो गई हैं। चुनाव के बाद अब शिवपाल की राहें क्या अलग होंगी या वो अखिलेश के साथ मिलकर अगले आम चुनाव की तैयारियों में जुटेंगे। लेकिन एक बात तो तय है कि अब उनके करीबियों का बिखराव तय है। जिस तरह से शिवपाल के करीबियों ने दूसरे दलों से टिकट लेकर अखिलेश की मुश्किल बढ़ाने का काम किया उसी तरह से अब वो दूसरी पार्टियों में अपना भविष्य तलाश सकते हैं। हालांकि अभी शिवपाल अपने अगले कदम के बारे में कुछ बताने को तैयार नहीं हो रहे हैं।












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