पिछली गलतियों से सबक लेकर अखिलेश ने आजमगढ़ से दिया इस्तीफा या हैं इसकी और भी वजहें, जानिए

लखनऊ, 22 मार्च: उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) के मैदान के पुनर्निर्माण के प्रयास में अखिलेश यादव ने मंगलवार को आजमगढ़ लोकसभा सीट से सांसद के रूप में इस्तीफा दे दिया। इसके अलावा सपा सांसद आजम खान ने भी अपनी रामपुर लोकसभा सीट छोड़ दी है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को अपना इस्तीफा सौंप दिया। इस इस्तीफे के बाद अब ऐसा लग रहा है कि अखिलेश विधानसभा में सदन का नेता बनकर बीजेपी से दो दो हाथ करना चाहते हैं। वहीं दूसरी तरफ अखिलेश को आजमगढ़ से एक ऐसे चेहरे की तलाश करनी होगी जिसे वो अपनी विरासत सौंप सकें। अखिलेश को इस बात का भी अहसास होगा कि बीजेपी इतनी आसानी से आजमगढ़ और रामपुर सीट नहीं छोड़ने वाली है। राजनितिक पंडितों की माने तो अखिलेश ने पिछली गलतियों से सबक लेते हुए ऐसा कदम उठाया है ताकि वो यूपी से पूरी तरह से कनेक्ट हो सकें।

क्या पिछली गलतियों से अखिलेश ने लिया सबक

क्या पिछली गलतियों से अखिलेश ने लिया सबक

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने आजमगढ़ से इस्तीफा दे दिया है। अब राजनीतिक पंडितों की माने तो अखिलेश ने जो गलती 2017 के विधानसभा चुनाव में की थी वह नहीं दोहराना चाहते हैं। उन गलतियों से अखिलेश ने सबक लिया है। पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी की प्रचंड जीत हुई थी और सपा की करारी हार हुई थी। उस समय अखिलेश यादव ने विधानसभा में रहने की बजाए अपने आपको दिल्ली तक सीमित कर लिया। दिल्ली में रहने की वजह से वह यूपी में कार्यकर्ताओं और नेताओं को समय नहीं दे पा रहे थे जिसका गलत असर पड़ा। इस बार वह यूपी में रहकर ही यूपी की नब्ज पकड़ना चाहते हैं।

लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर उठाया कदम

लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर उठाया कदम

अखिलेश के इस्तीफे के पीछे बड़ी वजह है कि वह अगले लोकसभा चुनाव से पहले पूरी तरह से यूपी में फोकस करना चाहते हैं ताकि लोकसभा चुनाव की बेहतर तैयारी की जा सके। पिछली बार सपा की स्थिति काफी खराब रही थी। मायावती के साथ गठबंधन करने के बावजूद उनको यूपी में पांच सीटों से ही संतोष करना पड़ा था जबकि बसपा को दस सीटों पर जीत मिली थी। इस बार वह यह जोखिम नहीं लेना चाहते। अखिलेश यूपी में रहकर ही जनता के बीच जनता का विश्वास जीतना चाहते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि जो माहौल सपा के पक्ष में बना है उसको आम चुनाव तक बरकरार रखना भी एक बड़ी चुनौती है। लिहाजा वह इस बार विधानसभा के भीतर से ही सरकार के खिलाफ अपनी आवाज उठाना चाहते हैं।

विधानसभा में रहकर बीजेपी को घेरेंगे अखिलेश

विधानसभा में रहकर बीजेपी को घेरेंगे अखिलेश

अखिलेश अब अपनी करहल विधानसभा सीट और खान अपनी रामपुर सीट बरकरार रखेंगे। इन दोनों नेताओं द्वारा विधानसभा सीटों को बरकरार रखने का फैसला इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सपा अपने घरेलू मैदान पर भाजपा से लड़ना जारी रखेगी। अखिलेश यादव और आजम खान की उपस्थिति- जब भी उन्हें राज्य विधानसभा में जेल से रिहा किया जाता है, तो सत्ताधारी भाजपा को परेशानी हो सकती है। करहल सीट से विधायक बनकर अखिलेश यह संदेश देना चाहते हैं कि वह अब विधानसभा में रहकर ही अपने लोगों की आवाज उठाएंगे और सत्तापक्ष का करारा जवाब देंगे। पिछली बार ये जिम्मेदारी सपा के वरिष्ठ नेता रामगोविंद चौधरी के पास थी और वह चुनाव हार चुके हैं। ऐसे में वह सदन के भीतर खुद खड़े होकर पार्टी की अगुवाई करना चाहते हैं।

कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए उठाया ये कदम

कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए उठाया ये कदम

सपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि उपचुनाव होने पर पार्टी की पहली प्राथमिकता आजमगढ़ और रामपुर लोकसभा सीटों को बरकरार रखना होगा। जो लोग सोचते हैं कि हम यूपी के परिणामों से निराश हैं, वे दुखद रूप से गलत हैं। हम बहुत युद्ध के मैदान में हैं और अब और अधिक जोश के साथ लड़ेंगे।" अखिलेश यादव का अपनी विधानसभा सीट बरकरार रखने का फैसला भी उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए एक बड़ा मनोबल बढ़ाने वाला है। इस बीच, एटा परिषद सीट से सपा के दो उम्मीदवारों उदयवीर सिंह और राकेश यादव का नामांकन निर्वाचन अधिकारी द्वारा रद्द कर दिया गया है, और भाजपा के दो उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया है।

आजमगढ़ से उपचुनाव जीतने का भरोसा

आजमगढ़ से उपचुनाव जीतने का भरोसा

यूपी के विधानसभा चुनाव में आजमगढ़ की अहमियत अखिलेश के लिए काफी अधिक थी। अखिलेश यहां से सांसद थे और इसका असर भी देखा गया जब सपा ने यहां सभी दस विधानसभा सीटों पर जीत हासिल कर ली। इस जीत से उत्साहित अखिलेश यादव कुछ दिन पहले ही आजमगढ़ जनता का धन्यवाद देने गए थे। हालांकि तब आजमगढ़ के लोगों को यह विश्वास नहीं होगा कि आजमगढ़ से वो इस्तीफा देंगे लेकिन ऐसा करके उन्होंने सबको चौंका दिया। अखिलेश के इस्तीफे के बाद अब आजमगढ़ और रामपुर में उपचुनाव होगा जहां बीजेपी को हराना अखिलेश के लिए इतना आसान नहीं होगा। अखिलेश को इस बात का भरोसा है कि आजमगढ़ में जिस तरह से सपा ने दस सीटें जीती हैं उससे वहां सपा लोकसभा का उपचुनाव भी आसानी से जीत जाएगी। यहां रहकर वो आजमगढ़ के उपचुनाव पर भी फोकस कर सकते हैं।

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