यूपी के वो नेता जिन्होंने पार्टी बदली थी जीत के लिए पर मिली हार तो कुछ की चमकी किस्मत
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे बीते गुरुवार को सामने आ गए, जिसमें भारतीय जनता पार्टी अपने सहोयगी दलों के साथ मिलकर सबसे अधिक सीटों पर जीत हासिल की। इस बार यूपी के नतीजों ने कई बड़े राजनीतिक नेताओं को धाराशायी कर दिया, जिसमें कई नाम प्रमुख है। जिन नेताओं ने अपनी पार्टी छोड़ दूसरी पार्टी से टिकट पर चुनाव लड़ा उन्हें भी हार का सामना करना पड़ा है।

फाजिलनगर से स्वामी प्रसाद मौर्या हारे
सबसे पहले बात करते हैं स्वामी प्रसाद मौर्या की। स्वामी प्रसाद मौर्या उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ी पहचान रखते हैं। बसपा छोड़ भाजपा में शामिल हुए स्वामी प्रसाद मौर्या इस बार सपा में शामिल हो गए और फाजिलनगर विधानसभा सीट से चुनाव लड़े, जहां उन्हें बड़े अंतर से हार का सामना करना पड़ा। भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार सुरेंद्र कुमार कुशवाहा 1 लाख 16 हजार 29 वोट हासिल किये। जबकि समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ रहे स्वामी प्रसाद मौर्या को 71 हजार 15 वोट मिले। करीब 45 हजार मतों से स्वामी प्रसाद की हार हो गई। जबकि चुनाव से पूर्व स्वामी प्रसाद मौर्या ने भाजपा को हराने के लिए बड़े-बड़े दावे किये थे।
नकुड़ विधानसभा सीट से हार धर्म सिंह सैनी
इसके अलावा चार बार विधायक और मंत्री रह चुके भाजपा से सपा में आए धर्म सिंह सैनी भी नकुड़ विधानसभा सीट से हार गए। यहां भाजपा के उम्मीदवार मुकेश चौधरी 1 लाथ 4 हजार 114 वोट पाकर जीत हासिल की। जबकि धर्म सिंह सैनी को 1 लाख 3 हजार 799 वोट मिले। इस सीट पर कद्दावर नेता माने जाने वाले इमरान मसूद भी सपा के साथ थे लेकिन फिर भी धर्म सिंह सैनी को हार से संतोष करना पड़ा।
दारा सिंह चौहान जीते
वहीं मऊ जिले के घोसी विधानसभा सीट से चुनाव लड़े दारा सिंह चौहान को बड़ी मुश्किल से जीत हासिल हुई है। मतगणना के दौरान कई राऊंड तक दारा सिंह चौहान पीछे चलते रहे। इस विधानसभा सीट पर सपा के सहायक दलों ने भी अपनी ताकत झोंक दी थी। दारा सिंह चौहान को 1 लाख 8 हजार 430 वोट मिले। वहीं भाजपा के उम्मीदवार विजय कुमार राजभर को 86 हजार 614 वोट मिले। इस सीट पर राजभर समाज के एक बड़े नेता और बसपा से सपा में शामिल हुए एक बड़े नेता ने दारा सिंह चौहान को जिताने में एड़ी-चोटी की जोर लगा दी।
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अदिति सिंह ने रायबरेली से मार ली बाजी
वहीं रायबरेली विधानसभा सीट पर कांग्रेस से भाजपा में आईं अदिति सिंह ने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को हराकर जीत हासिल की। अदिति सिंह को 1 लाख 2 हजार 429 वोट मिले। जबकि सपा प्रत्याशी राम प्रताप यादव को 95 हजार 254 वोट मिले। वहीं बसपा प्रत्याशी मो. अशरफ को 9 हजार 331 वोट मिले।
हरिओम यादव को मिली हार
वहीं समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के रिश्तेदार हरि ओम यादव ने चुनाव से पूर्व भाजपा का दामन थामा था। लेकिन सिरसागंज विधानसभा सीट पर उनको समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार ने हरा दिया। भाजपा से उम्मदीवार हरिओम यादव को 87 हजार 419 वोट मिले। जबकि समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार सर्वेश सिंह को 96 हजार 224 वोट मिले। वहीं बसपा के उम्मीदवार पंकज मिश्रा को 18 हजार 757 वोट मिले।
नरेश सैनी के खाते में भी हार
वहीं बिहट विधानसभा सीट पर कांग्रेस छोड़ भाजपा से चुनाव लड़ रहे नरेश सैनी को भी कुछ खास फायदा नहीं हुआ। समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार उमर अली खान को 1 लाख 34 हजार 513 वोट मिले। जबकि भाजपा से चुनाव लड़ रहे नरेश सैनी को महज 96 हजार 633 वोट ही मिले। ऐसी कई विधानसभा सीट हैं, जहां नेताओं ने अपनी पुरानी पार्टी छोड़ नई पार्टी से चुनाव लड़ा और झोली में हार मिली।












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