'डकैत को मारने वाले पुलिसकर्मी को ₹5 लाख का सम्मान दें', SC का UP सरकार को आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को, उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वह 83 वर्षीय सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी राम औतार सिंह यादव को 5 लाख रुपये का मानदेय दे। यह आदेश उस बहादुरी के लिए दिया गया, जिसमें यादव ने डकैत को मारकर कई लोगों की जान बचाई थी। अदालत ने इस मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कहा कि सम्मान और स्वीकृति ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।
आपको बता दें कि राम औतार सिंह यादव, जो 1989 में सेवानिवृत्त हो गए थे, ने अपनी सेवा के दौरान डकैत को मारने और जनता की रक्षा करने का साहसिक काम किया। उनके इस कार्य के लिए उसी साल उन्हें वीरता पुरस्कार देने की सिफारिश की गई थी।

हालांकि, 34 साल बाद भी उन्हें वह सम्मान नहीं मिला। इस कारण उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट का रुख किया था, लेकिन अदालत ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। इसके बाद यादव ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने वीरता पुरस्कार देने और मानदेय की मांग की।
सुप्रीम कोर्ट का रुख
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को गंभीरता से कदम उठाने को कहा। यूपी सरकार ने पहले 1 लाख रुपये का मानदेय और प्रशस्ति पत्र देने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन, जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इसे पर्याप्त नहीं माना और कहा कि ऐसा सम्मान राशि अधिक होनी चाहिए।
5 लाख रुपये मानदेय का आदेश
पीठ ने राज्य सरकार की निष्पक्षता को देखते हुए 5 लाख रुपये का मानदेय देने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि यह राशि यादव की बहादुरी और योगदान का सम्मान है।
कोर्ट ने क्या कहा?
अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले को मिसाल के तौर पर नहीं देखा जाएगा, लेकिन यह सुनिश्चित किया कि बहादुरी भरे कार्यों को उचित सम्मान मिले। पीठ ने कहा, "याचिकाकर्ता को पैसे की आवश्यकता नहीं, बल्कि सम्मान की जरूरत है।"
राम औतार सिंह यादव का यह मामला बहादुरी और न्याय के महत्व को दर्शाता है। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश न केवल यादव के योगदान को मान्यता देता है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि समाज में ऐसे कार्यों का सम्मान होना चाहिए।












Click it and Unblock the Notifications