यूपी चुनाव में सपा गठबंधन के प्रत्याशी साइकिल सिंबल पर लड़ सकते हैं चुनाव, क्या है अखिलेश की रणनीति?
लखनऊ, 9 दिसंबर। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारी में लगे समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ गठबंधन बनाकर कमर कस रहे हैं। उधर भाजपा नेताओं के भाषणों से भी साफ झलकता है कि वे भी सपा और अखिलेश यादव को ही मुख्य प्रतिद्वंद्वी के तौर पर चुनाव में देख रहे हैं। पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी में मजबूती के लिए सपा ने अब तक महान दल, जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट), सुभासपा, रालोद और अपना दल (कमेरावादी) के साथ गठजोड़ बनाया है। इसमें जयंत चौधरी का राष्ट्रीय लोक दल और ओम प्रकाश राजभर की सुभासपा ही गठबंधन की ज्यादा सीटों की दावेदार है। बाकी दलों की खास पहचान क्षेत्र में नहीं है लेकिन उनका जनाधार जरूर है। ऐसे में एक रणनीति के तहत छोटे दलों के प्रत्याशियों को अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी के सिंबल पर चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। सीटों के बंटवारे को लेकर अभी गठबंधन में कुछ तय नहीं हुआ है लेकिन माना जा रहा है कि 403 सीटों में से करीब 50 सीटें सपा गठबंधन के साथियों को देगी।

जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट) और महान दल- पूर्वांचल के जिलों में है प्रभाव
यूपी की कुल आबादी में नोनिया बिरादरी की आबादी का प्रतिशत 1.26 है। जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट) के मुखिया संजय सिंह चौहान हैं और ये नोनिया बिरादरी की अस्मिता को लेकर राजनीति करते हैं। नोनिया बिरादरी के वोटबैंक का असर पूर्वांचल के करीब दस जिलों की विधानसभा सीटों पर है। इन जिलों में गाजीपुर, बलिया, देवरिया, आजमगढ़, कुशीनगर, महराजगंज, चंदौली और बहराइच हैं जहां नोनिया समुदाय के लोगों की अच्छी खासी संख्या है। महान दल के मुखिया हैं केशव देव मौर्य। इस दल का प्रभाव कुशीनगर, अंबेडकरनगर, मुरादाबाद, जालौन, मिर्जापुर, लखीमपुर, बदायूं, कासगंज, बरेली और मैनपुरी जिलों में है। पूर्वांचल के सीटों को साधने में जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट) और महान दल सपा को फायदा पहुंचा सकते हैं। जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट) या महान दल की पहचान राजनीतिक दल के तौर पर कम है इसलिए सपा इन पार्टियों के प्रत्याशियों को साइकिल सिंबल पर चुनाव में उतार सकती है।

रालोद के जरिए वेस्ट यूपी, सुभासपा के जरिए ईस्ट यूपी में फतह की तैयारी
ओम प्रकाश राजभर ने 2017 के चुनाव में पूर्वांचल जीतने में भाजपा की मदद की थी। भाजपा का साथ लेकर यह पार्टी खुद भी चार सीट ले आई थी। इस बार राजभर सपा के साथ हैं। उनकी दावेदारी भी ज्यादा सीटों पर रहेगी। यूपी में राजभर समुदाय की आबादी तीन प्रतिशत है लेकिन गोरखपुर, अंबेडकरनगर, बहराइच, श्रावस्ती, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, महराजगंज, कुशीनगर, वाराणसी, जौनपुर, चंदौली, गाजीपुर, आजमगढ़, देवरिया, बलिया और मऊ जैसे जिलों में राजभर वोट जीत-हार तय कर सकते हैं। इसी तरह, वेस्ट यूपी के जिलों में राष्ट्रीय लोक दल का असर है जो किसान आंदोलन के बाद और भी मजबूत हुआ है। रालोद-सपा के मेल से वेस्ट यूपी में जाट-मुस्लिम समीकरण साधने की तैयारी में दोनों पार्टियां हैं। जयंत चौधरी के साथ अखिलेश यादव ने 7 दिसंबर को रैली कर इस गठजोड़ का ऐलान किया है।

रालोद और सुभासपा को गठबंधन में मिलेगी ज्यादा सीटें
ओम प्रकाश राजभर और जयंत चौधरी अखिलेश के गठबंधन में दो बड़े साथी हैं। इस गठबंधन में सीटों का गणित क्या होगा इस बारे में अभी अनुमान ही लगाए जा रहे हैं। गठबंधन में सीटों के बंटवारे पर कयास लगाए जा रहे हैं कि समाजवादी पार्टी सहयोगी दलों के लिए करीब 50 सीटें छोड़ सकती हैं। इनमें से आधी से ज्यादा सीटें रालोद के खाते में जा सकती हैं। 2017 के चुनाव में सुभासपा चार सीटों पर जीती थी इसलिए उसको दस से ज्यादा सीटें मिलने के अनुमान हैं। जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट), महान दल और अपना दल (कमेरावादी) के बीच बाकी सीटों को बंटवारा हो जाएगा। समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी भी गठबंधन के साथी जैसे रालोद या सुभासपा के सिंबल पर उन सीटों पर उतर सकते हैं जहां उनकी पहचान है और जहां सियासी समीकरण जीत दिला सकते हैं।












Click it and Unblock the Notifications