UP: किसे राज्य माता घोषित कराना चाहते हैं शंकराचार्य? सरकार को दिया 40 दिन का अल्टीमेटम
Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand: ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने योगी सरकार से गाय को 'राज्य माता' घोषित करने की मांग की है। उन्होंने सरकार को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए 40 दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है। शंकराचार्य ने कहा है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो संत समाज सरकार को 'हिंदू विरोधी' घोषित करेगा।
शंकराचार्य ने मीडिया से बात करते हुए सरकार के 'हिंदू स्वरूप' पर सीधा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जो सरकार गाय की रक्षा नहीं कर सकती, उसे खुद को हिंदू कहलाने का अधिकार नहीं है।

उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि अब सरकार को भाषणों या भगवा वस्त्रों से नहीं, बल्कि गौ-सेवा और धर्म की रक्षा के माध्यम से अपने हिंदू होने का प्रमाण देना होगा। सनातन समाज अब केवल बातों पर विश्वास नहीं करेगा।
दो प्रमुख मांगें और महाराष्ट्र का उदाहरण
शंकराचार्य ने सरकार के समक्ष दो स्पष्ट मांगें रखी हैं। पहली यह कि गाय को आधिकारिक तौर पर 'राज्य माता' का दर्जा दिया जाए, जैसा कि हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने स्वदेशी गायों के लिए किया है। दूसरी मांग यह है कि मवेशियों के निर्यात पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने के लिए तत्काल सरकारी आदेश जारी किया जाए। उन्होंने नेपाल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां गाय को राष्ट्रीय पशु का सम्मान प्राप्त है।
लखनऊ में संतों का महासम्मेलन और अल्टीमेटम
यदि 40 दिनों के भीतर सरकार इन मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लेती है, तो 10-11 मार्च को लखनऊ में समस्त संत समाज का एक विशाल समागम आयोजित किया जाएगा। शंकराचार्य ने चेतावनी दी कि इस सम्मेलन में वर्तमान सरकार को 'छद्म हिंदू' (Pseudo-Hindu) और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 'कालनेमि' घोषित कर दिया जाएगा।
UP में मांस निर्यात पर सवाल
शंकराचार्य ने उत्तर प्रदेश की वर्तमान स्थिति पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यह भगवान राम और कृष्ण की धरती है, फिर भी यह मांस निर्यात का केंद्र बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी गौ-रक्षण की बात उठाई जाती है, तो सरकारों द्वारा इसे दबाने की कोशिश की जाती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी छवि खराब करने के प्रयास किए जा रहे हैं और यह लड़ाई सत्ता की नहीं, बल्कि सनातन धर्म की आत्मा को बचाने की है।












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