Samajwadi Party national executive: 2024 लोकसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव की सोशल इंजीनियरिंग
Samajwadi Party national executive: सपा क इस कार्यकारिणी में सोशल इंजीनियरिंग फार्मूले के तहत गैर यादव ओबीसी और दलितों पर फोकस किया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो अखिलेश जातीय संतलन साधने का प्रयास है।

Samajwadi Party national executive: उत्तर प्रदेश के पूर्व सीमए और समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने पार्टी की 64 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी के गठन में 2024 के लोकसभा चुनाव के हिसाब से समीकरण बैठाने की कोशिश की है। सपा क इस कार्यकारिणी में सोशल इंजीनियरिंग फार्मूले पर फोकस किया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो अखिलेश यादव का यह कदम जातीय संतुलन साधने का प्रयास है, जो 2024 के लोकसभा चुनावों के से पहले पार्टी को हर मोर्चे पर मजबूत करने की कवायद के तौर पर देखा जा सकता है।
MY समीकरण की जगह सोशल इंजनीयरिंग पर फोकस
दरअसल नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में मुस्लिम-यादव समीकरण पर तरजीह देने की बजाए पार्टी ने पूरी तरह से गैर-यादव ओबीसी (अन्य पिछड़े वर्गों), दलितों, सवर्ण हिंदुओं के बीच पैठ बनाने की कवायद की है। इस कार्यकायारिणी में गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यक भी हैं। पार्टी ने शिवपाल यादव और स्वामी प्रसाद मौर्य को राष्ट्रीय महासचिव नामित किया है।
शिवपाल-स्वामी प्रसाद का कद बढ़ा
जबकि शिवपाल यादव हाल ही में पार्टी में लौटे हैं, स्वामी प्रसाद मौर्य 2022 यूपी के यूपी से पहले भाजपा सरकार में मंत्री पद छोड़ने के बाद सपा में शामिल हो गए थे। विधानसभा चुनाव और वर्तमान में रामचरितमानस पर अपनी टिप्पणियों से विवाद खड़ा कर दिया है। पार्टी ने अन्य दलों के वरिष्ठ नेताओं को भी अच्छा प्रतिनिधित्व दिया, जो 2019 के लोकसभा चुनावों और 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले की अवधि में इसमें शामिल हुए थे।
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सपा की ये है सोशल इंजीनियरिंग
राजनीतिक विश्लेषक कुमार पंकज कहते हैं कि,
नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में 11 यादव, 10 मुस्लिम, 25 गैर-यादव ओबीसी, सात सवर्ण, छह दलित, एक अनुसूचित जनजाति और एक ईसाई सदस्य बनाए गए हैं। उच्च जाति के हिंदुओं में चार ब्राह्मण हैं और दो ठाकुर-क्षत्रिय हैं। गैर यादव ओबीसी में तीन कुर्मी और पांच जाट हैं। समाजवादी पार्टी ने 2022 के उत्तर प्रदेश में इस व्यापक जातिगत फॉर्मूले पर काम करना शुरू कर दिया था। विधानसभा चुनाव जब इसने अन्य दलों के विभिन्न जातियों के कई वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया है। यह फॉर्मूला सपा की सीटों की संख्या 47 से 111 तक ले जाने में सफल रहा था।
बसपा छोड़कर आए नेताओं को तरजीह
कार्यकारिणी में ब्राह्मण नेता अभिषेक मिश्रा, तारकेश्वर मिश्रा, राजकुमार मिश्रा और पवन पांडेय हैं। सपा ने अन्य दलों से आए कुछ वरिष्ठ नेताओं को कार्यकारिणी में गौरवपूर्ण स्थान दिया। रामाचल राजभर, लालजी वर्मा, और त्रिभुवन दत्ता, जो 2022 के चुनावों से पहले सपा में शामिल हुए थे, अब सपा के राष्ट्रीय महासचिव हैं। हरेंद्र मलिक और सलीम शेरवानी, जो उस समय कांग्रेस छोड़ने के बाद पार्टी में शामिल हुए थे, को भी वही स्थान मिला है। 2017 में बसपा छोड़कर सपा में शामिल हुए इंद्रजीत सरोज भी अब सपा के राष्ट्रीय महासचिव हैं। उन्नाव से कांग्रेस की पूर्व सांसद अनु टंडन अब सपा की राष्ट्रीय सचिव हैं। वह भी, 2022 यूपी से पहले शामिल हो गई थी।
शिवपाल के बेटे आदित्य को नहीं मिली जगह
जबकि शिवपाल यादव को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है। यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा कि पार्टी की रणनीति, विस्तार और चुनावी प्रक्रिया में उनकी क्या भूमिका होगी। यहां तक कि कुछ यादव परिवार के सदस्य धर्मेंद्र यादव, अक्षय यादव और तेज प्रताप यादव राष्ट्रीय कार्यकारिणी में हैं। शिवपाल यादव के बेटे आदित्य यादव राज्य कार्यकारिणी में शामिल हो सकते हैं, जिसकी घोषणा पार्टी जल्द ही करेगी।
उपचुनाव में हार के बाद भंग हुई थी कार्यकारिणी
सपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में राष्ट्रीय अध्यक्ष, एक राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और एक प्रमुख राष्ट्रीय महासचिव के अलावा 15 राष्ट्रीय महासचिव, एक कोषाध्यक्ष, 20 राष्ट्रीय सचिव, 21 सदस्य और चार विशेष आमंत्रित सदस्य हैं। पिछले साल आजमगढ़ और रामपुर लोकसभा उपचुनाव में पार्टी की हार के बाद अखिलेश ने सपा की राष्ट्रीय और प्रदेश कार्यकारिणी को भंग कर दिया था।
कुछ पुराने चेहरों पर जताया भरोसा
अखिलेश यादव पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, किरणमय नंदा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और रामगोपाल यादव मुख्य राष्ट्रीय महासचिव हैं। कोलकाता के सुदीप रंजन सेन राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष हैं। अभिनेता और राज्यसभा सदस्य जया बच्चन और मुंबई के अबू आसिम आजमी सदस्यों में शामिल हैं। वहीं पूर्वांचल के दिग्गज नेता राम गोविंद चौधरी, अम्बिका चौधरी को बड़ा पद नहीं मिला है।
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