'फॉल्स नैरेटिव' से लेकर चंपत राय के करीबी की गिरफ्तारी तक, कैसे बढ़ता गया राम मंदिर दान विवाद? पूरी टाइमलाइन

Ram Mandir Donation Row: अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाए गए चढ़ावे को लेकर शुरू हुआ विवाद अब देश के सबसे चर्चित मामलों में शामिल हो गया है। पहले समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक ने करोड़ों रुपये के गबन का आरोप लगाया। इसके बाद सरकार और मंदिर ट्रस्ट ने इन दावों को गलत बताया, लेकिन मामला यहीं नहीं रुका। शिकायतें हुईं, जांच की मांग उठी और फिर विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया गया।

कई दिनों तक रिकॉर्ड, दान पेटियों और कर्मचारियों की जांच के बाद मामला FIR तक पहुंचा। अब ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी सहयोगी समेत आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इसी बीच विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है, जबकि कई श्रद्धालु अपने सोने-चांदी और अन्य कीमती दान के बारे में जानकारी मांग रहे हैं। आइए जानते हैं कि यह पूरा विवाद आखिर कैसे बढ़ता गया।

Ram Mandir Donation Row

मंदिर ट्रस्ट को कितना मिला था चढ़ावा?

ट्रस्ट के आंकड़ों के मुताबिक 1 अप्रैल 2025 से 28 फरवरी 2026 के बीच राम मंदिर को 82.78 करोड़ रुपये का दान मिला। इसी दौरान बैंक में जमा राशि पर 138.03 करोड़ रुपये का ब्याज भी मिला। वहीं वर्ष 2024-25 में ट्रस्ट की कुल आय 327 करोड़ रुपये रही थी, जिसमें करीब 153 करोड़ रुपये श्रद्धालुओं के चढ़ावे से मिले थे।

मई में ही हो गया था शक

हालांकि विवाद जून में सामने आया, लेकिन ट्रस्ट को गड़बड़ी का शक मई के आखिरी सप्ताह में ही हो गया था। बैंक में जमा हो रही रकम और दान पेटियों से निकलने वाली राशि का मिलान करने पर कुछ अंतर नजर आया। इसके बाद जिस कमरे में दान पेटियां खोली जाती थीं और नोटों की गिनती होती थी, वहां निगरानी बढ़ाई गई और छिपे हुए कैमरे भी लगाए गए।

7 जून: पहली बार सामने आए गबन के आरोप

7 जून 2026 को समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक पवन पांडेय ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया कि राम मंदिर की दान पेटियों से करीब 7 से 7.5 करोड़ रुपये का गबन हुआ है। उनके इस बयान के बाद मामला तेजी से राजनीतिक मुद्दा बन गया और विपक्ष ने पारदर्शिता की मांग शुरू कर दी।

सरकार और ट्रस्ट ने बताया 'झूठा नैरेटिव'

आरोप सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इन्हें खारिज कर दिया। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि राम मंदिर को लेकर झूठा नैरेटिव फैलाने की कोशिश की जा रही है। शुरुआती दौर में ट्रस्ट ने भी किसी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया।

9 जून: CBI जांच की मांग

विवाद बढ़ने के बीच भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पूरे मामले की CBI जांच कराने की मांग की। इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी ट्रस्ट से इस मामले में रिपोर्ट मांगी।

याचिका के बाद बनी SIT

इसी दौरान अधिवक्ता मोहित अशोक ने उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव (विजिलेंस), राम मंदिर ट्रस्ट, CBI और अन्य अधिकारियों को शिकायत भेजी। बाद में उन्होंने अदालत का भी रुख किया। इसके बाद 13 जून को ट्रस्ट की सिफारिश पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीन सदस्यीय SIT का गठन कर दिया।

कई दिनों तक चली जांच

14 जून से 21 जून के बीच SIT ने दान पेटियों, कैश गिनने की व्यवस्था और कर्मचारियों की भूमिका की जांच की। जांच के दौरान 35 दान पेटियों का रिकॉर्ड खंगाला गया। कई कर्मचारियों के बयानों में अंतर मिला। साथ ही यह भी सामने आया कि CCTV फुटेज 45 दिन बाद अपने आप डिलीट हो जाती है, जिससे जांच में कुछ दिक्कतें आईं।

शुरुआती रिपोर्ट में मिले अनियमितता के संकेत

23 जून को SIT ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी। रिपोर्ट में कुछ संभावित गड़बड़ियों की ओर इशारा किया गया। इसके बाद संबंधित कर्मचारियों पर नजर रखने और जांच को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए।

25 जून: FIR दर्ज, संदिग्ध हिरासत में

SIT की जांच के आधार पर 25 जून को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। इसी शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज हुई और दान की गिनती से जुड़े कर्मचारियों समेत आठ संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। जांच के दौरान कुछ लोगों के पास से बेहिसाब नकदी और अन्य महंगी चीजें मिलने की भी जानकारी सामने आई।

26 जून: 8 आरोपी गिरफ्तार

26 जून को हिरासत में लिए गए सभी आठ लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार लोगों में चंपत राय के करीबी सहयोगी रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, मनीष यादव, लवकुश मिश्रा, रामाशंकर मिश्रा और सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं। सुभाष श्रीवास्तव दान की गिनती की व्यवस्था संभालते थे।

चंपत राय से भी हुई पूछताछ

जांच के दौरान SIT ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से भी पूछताछ की। टीम ने दान पेटियों का निरीक्षण किया, रिकॉर्ड की जांच की और CCTV फुटेज भी देखी। इसी बीच चंपत राय के पद छोड़ने की खबर भी सामने आई, जिससे पूरे मामले की चर्चा और तेज हो गई।

केजरीवाल और संजय राउत ने लगाए नए आरोप

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अयोध्या दौरे के दौरान दावा किया कि भगवान राम को चढ़ाए गए गहने, हीरे, चांदी और करीब 200 करोड़ रुपये नकद गायब हैं। वहीं शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी द्वारा दिए गए 1 करोड़ रुपये के दान की रसीद अब तक नहीं मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रस्ट को दी गई 25 किलो से ज्यादा वजन की चांदी की ईंट का भी कोई स्पष्ट रिकॉर्ड सामने नहीं आया।

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