क्या जेल जाएंगे चंपत राय और अनिल मिश्रा? PMO को चिट्ठी लिखने वाले BJP नेता रजनीश बोले- 'संपत्ति की जांच कराइए'
Ram Mandir donation scam (Champat Rai, Anil Mishra): अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावा चोरी होने के मामले में अब मंदिर ट्रस्ट के दो सबसे कद्दावर चेहरे महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ.अनिल मिश्रा ने 26 जून को इस्तीफा दे दिया है। इस पूरे घोटाले को उजागर करने और सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को पत्र लिखकर जांच की मांग उठाने वाले भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता डॉ. रजनीश सिंह एक नया बयान दिया है। चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे से काम नहीं चलेगा, इन्हें जेल जाना चाहिए।
बीजेपी नेता डॉ. रजनीश सिंह ने साफ कर दिया है कि चंपत राय और अनिल मिश्रा के सिर्फ पद छोड़ने से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए दावा किया कि चंपत राय और अनिल मिश्रा का जेल जाना तय है। उन्होंने मांग की है कि इन दोनों के खिलाफ न केवल कानूनी कार्रवाई आगे बढ़नी चाहिए, बल्कि इनकी संपत्तियों की भी जांच होनी चाहिए।

'चंपत राय और अनिल मिश्रा की संपत्ति की जांच होनी चाहिए'
आजतक से बातचीत के दौरान डॉ.रजनीश सिंह ने कहा,
"इन्होंने ( चंपत राय और अनिल मिश्रा) बहुत देर से और भारी दबाव में आकर पद छोड़ा है। नैतिकता के आधार पर तो इन्हें उसी दिन हट जाना चाहिए था, जिस दिन इनके ऊपर उंगलियां उठी थीं। ट्रस्टी अनिल मिश्रा की संपत्ति अयोध्या में लगातार बढ़ रही थी और यह बात यहां के हर नागरिक को साफ दिख रही थी। उनका तीन मंजिला आलीशान मकान, उसमें लगी लिफ्ट और उनके बेटे की विदेश में होने वाली पढ़ाई के खर्चे, आखिर इसके लिए पैसा कहां से आ रहा था? एसआईटी के पास जरूर कोई बहुत मजबूत सबूत हाथ लगा है, जिसके डर से इन्हें तुरंत इस्तीफा देना पड़ा।"
हालांकि ये डॉ. रजनीश के अपने व्यक्तिगत आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है। रजनीश सिंह ने यह भी जोड़ा कि उन्हें सूबे के मुख्यमंत्री और गठित की गई विशेष जांच टीम (SIT) की कार्रवाई पर पूरा भरोसा है।
आखिर चंपत राय और अनिल मिश्रा पर कैसे आई आंच? इस्तीफे की इनसाइड स्टोरी
इस पूरे मामले की इनसाइड स्टोरी को समझें तो पता चलता है कि प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही मंदिर के दानपात्रों से करोड़ों रुपये के चढ़ावे की हेराफेरी की शिकायतें आ रही थीं। उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से बनाई गई SIT की तफ्तीश जैसे ही आगे बढ़ी, इसके तार सीधे चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के प्रशासनिक दायरे से जुड़ गए।
- चंपत राय का रोल: विश्व हिंदू परिषद के कद्दावर नेता चंपत राय ट्रस्ट के महासचिव के रूप में पूरे वित्तीय और भूमि प्रबंधन के मुखिया थे। कत्थक तौर पर उनका बेहद करीबी और ड्राइवर रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव इस चोरी के नेटवर्क का मुख्य किरदार बनकर सामने आया, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
- डॉ. अनिल मिश्रा का रोल: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे डॉ. अनिल मिश्रा के जिम्मे मुख्य रूप से कैश की गिनती, उसका सुरक्षित भंडारण और बैंकिंग व्यवस्था की जिम्मेदारी थी। एसआईटी ने उनसे करीब चार घंटे तक कड़ी पूछताछ की है, क्योंकि जिस कैश काउंटिंग हॉल में चोरी हो रही थी, उसकी पूरी कमान उन्हीं के हाथ में थी। इसके अलावा पूर्व में हुए कुछ विवादित जमीन सौदों में गवाह के तौर पर शामिल होने के कारण भी उन पर सवाल उठ रहे हैं।
चंपत राय और अनिल मिश्रा का FIR में नाम नहीं! 8 आरोपी को किया गया है गिरफ्तार
हालांकि अभी तक पुलिस द्वारा दर्ज की गई आधिकारिक एफआईआर (FIR) में चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा को सीधे आरोपी के तौर पर नामजद नहीं किया गया है। लेकिन एसआईटी की आंतरिक जांच रिपोर्ट के दायरे में जो 17 लोग शामिल हैं, उनमें इन दोनों के नाम भी दर्ज हैं।
पुलिस ने चंपत राय के करीबी रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव समेत 8 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस कप्तान (SSP) गौरव ग्रोवर ने बताया कि सभी आरोपी अभी पुलिस की गिरफ्त में हैं और उनसे कड़ाई से पूछताछ की जा रही है। पुलिस इन सभी को फैजाबाद की कोर्ट में पेश करके 14 दिनों की रिमांड पर लेने की तैयारी में है।

ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर श्रीराम जन्मभूमि थाने में टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्र, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्र, रमाशंकर मिश्र, सुभाष श्रीवास्तव और मनीष कुमार यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है। इन लोगों पर चोरी, धोखाधड़ी और साजिश रचने जैसी कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।
अखिलेश यादव से लेकर केजरीवाल तक किसने क्या कहा?
चोरी की बात सामने आते ही समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव से लेकर दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल तक पूरे विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया था। विपक्ष का सीधा आरोप था कि पूरे खजाने के प्रबंधन के मालिक होते हुए ये दोनों इतने बड़े घोटाले से अनजान कैसे रह सकते हैं? विपक्षी नेताओं का कहना था कि जांच एजेंसियां सिर्फ 'छोटी मछलियों' यानी मामूली कर्मचारियों को पकड़कर बलि का बकरा बना रही हैं और पर्दे के पीछे बैठे असली मास्टरमाइंड को बचाने का खेल चल रहा है।
संजय राउत की एंट्री: उद्धव की चांदी की ईंट और 1 करोड़ पर दागे सवाल
अब इस पूरे विवाद में राजनीति भी पूरी तरह गरमा गई है। शिवसेना (उद्धव गुट) के बड़े नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक बड़ा सवाल उठाकर सबको चौंका दिया है। उन्होंने पूछा कि उद्धव ठाकरे ने राम मंदिर के लिए 1 करोड़ रुपये और 4 किलो चांदी की ईंट दान में दी थी, लेकिन इतने साल बीतने के बाद भी ट्रस्ट की तरफ से उसकी कोई रसीद क्यों नहीं मिली? आखिर वह चांदी की ईंट कहां गायब हो गई? राउत ने कहा कि अब इस बात का हिसाब देने का वक्त आ गया है।
केजरीवाल का दौरा और बड़ा आरोप: "बड़ों को बचाने के लिए हो रहा दिखावा"
दूसरी तरफ, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी शुक्रवार को अचानक रामलला के दर्शन करने अयोध्या पहुंचे। उन्होंने इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि भगवान के घर में ऐसा महापाप करने वालों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए आरोप लगाया कि यह एफआईआर सिर्फ एक दिखावा है और इसके जरिए पर्दे के पीछे बैठे बड़े लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
इसी चौतरफा राजनीतिक दबाव, एसआईटी की लगातार पूछताछ और राम मंदिर ट्रस्ट की साख को पूरी तरह बेदाग बनाए रखने की मजबूरी के चलते आखिरकार चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा को अपने पदों से हाथ धोना पड़ा है। फिलहाल, जांच एजेंसियां बैंक खातों के लेन-देन और संपत्तियों की कड़ियों को आपस में जोड़ने में जुटी हुई हैं।














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