Ram Temple Donation Scam पर केजरीवाल का बड़ा हमला, बोले- आखिर चंदे का पैसा गया कहां?
Ram Temple Donation Scam: अयोध्या के श्री राम मंदिर निर्माण और उससे जुड़े ट्रस्ट के नाम पर हुए कथित चंदा घोटाले को लेकर देश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस मामले में दर्ज की गई एफआईआर (FIR) पर गंभीर सवाल उठाए हैं। केजरीवाल ने इसे महज एक दिखावा करार देते हुए आरोप लगाया है कि इस बड़े घोटाले के असली गुनाहगारों को बचाने की साजिश रची जा रही है।
अरविंद केजरीवाल का कहना है कि इतने बड़े घालमेल को केवल निचले स्तर के कर्मचारी अंजाम नहीं दे सकते। उनके मुताबिक, इस मामले की कड़ियां बहुत ऊपर तक जुड़ी हुई हैं और सरकार प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए छोटे कर्मियों पर पूरा दोष मढ़कर पल्ला झाड़ रही है। इस बयान के बाद राम मंदिर के कोष और उसके प्रबंधन को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है।

यह पहला मौका नहीं है जब राम मंदिर के नाम पर एकत्र किए जा रहे धन या जमीन सौदों को लेकर विपक्ष ने मोर्चा खोला हो। इससे पहले भी आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने ट्रस्ट के काम-काज और जमीन खरीद में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे। हालांकि, इस बार मामला सीधे तौर पर चंदे की चोरी और फर्जी चेक या रसीदों के जरिए ट्रस्ट के खातों में सेंधमारी से जुड़ा नजर आ रहा है, जिसकी जांच पुलिस कर रही है।
राम मंदिर चंदा विवाद क्या है?
अरविंद केजरीवाल के इस बयान ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात रखते हुए कहा कि राम मंदिर जैसे संवेदनशील और आस्था से जुड़े मामले में इस तरह की लीपापोती बर्दाश्त नहीं की जा सकती। जनता ने अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा भगवान राम के भव्य मंदिर निर्माण के लिए दान किया है, ऐसे में इसके एक-एक पैसे का हिसाब पारदर्शी होना चाहिए।
इस पूरे मामले की जड़ें उस समय से जुड़ी हैं जब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के बैंक खातों से क्लोन चेक के जरिए लाखों रुपये निकालने की कोशिश की गई थी। इसके अलावा, कई जगहों पर फर्जी रसीदें छपवाकर लोगों से राम मंदिर के नाम पर अवैध रूप से वसूली करने के मामले भी सामने आए थे। पुलिस ने इन मामलों में कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया है, जिन्हें केजरीवाल 'जूनियर स्टाफ' और 'मोहरा' बता रहे हैं।
पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग मजबूत
चंदे के पैसे के दुरुपयोग की बात सामने आने पर देश के आम नागरिक भी सोशल मीडिया पर अपनी चिंताएं जाहिर कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि उन्होंने राम मंदिर के लिए श्रद्धा भाव से योगदान किया था, न कि किसी घोटालेबाज की जेब भरने के लिए। इस जनआक्रोश को भांपते हुए ही राजनीतिक दल इस मुद्दे को चुनावी और राजनीतिक विमर्श के केंद्र में बनाए रखने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि जांच एजेंसियां इस मामले में क्या कदम उठाती हैं। क्या जांच का दायरा वाकई उन लोगों तक पहुंचेगा जिनके बारे में केजरीवाल इशारा कर रहे हैं, या फिर यह मामला भी फाइलों में दफन होकर रह जाएगा? फिलहाल, इस राजनीतिक रार के शांत होने के आसार नहीं दिख रहे हैं और बयानबाजी लगातार तीखी होती जा रही है।














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