Ram Mandir Donation Scam: 8 आरोपियों की कोर्ट में पेशी, किन धाराओं में FIR दर्ज? किसे कितनी हो सकती है सजा?

Ram Mandir Donation Scam: राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे (दान) की कथित हेराफेरी और गबन के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने तेज कार्रवाई की है। 25 जून की रात दर्ज FIR के आधार पर शुक्रवार (26 जून) को सभी 8 नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। भारी सुरक्षा के बीच सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया। सूत्रों के मुताबिक, CCTV में 42 दिन में 70 बार चोरी कैद हुई है। सभी के पास से रकम बरामद हुई है।

SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर दर्ज FIR में गंभीर धाराएं लगाई गई हैं, जिनमें उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। आइए इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं...

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Ram Mandir Donation Scam: मामला क्या है? कैसे शुरू हुआ विवाद

राम मंदिर में प्रतिदिन लाखों रुपये का चढ़ावा (नकदी, सोना-चांदी, आभूषण आदि) आता है। इन दानपात्रों को खाली करके गिनती की प्रक्रिया में कथित तौर पर हेराफेरी हुई। आरोप है कि कर्मचारियों ने दान की राशि चोरी की, छिपाई और व्यक्तिगत फायदे के लिए इस्तेमाल किया। 7 जून 2026 को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने इस मुद्दे को उठाया। सोशल मीडिया पर कुछ नाम चर्चा में आए। विपक्ष और VHP ने भी जांच की मांग की।

ट्रस्ट के अनुरोध पर 13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय SIT गठित की, जिसकी अगुवाई लखनऊ डिविजनल कमिश्नर विजय विश्वास पंत (Vijay Vishwas Pant)ने की। SIT ने 23 जून को अपनी शुरुआती रिपोर्ट सरकार को सौंपी, जिसमें सख्त कार्रवाई की सिफारिश की गई। 25 जून की रात राम जन्मभूमि थाने में FIR दर्ज हुई (अपराध संख्या 90/2026)। ट्रस्ट सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर 8 नामजद और अन्य अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। 26 जून को सभी 8 को गिरफ्तार कर लिया गया।

Ram Mandir Donation Scam Arrested Accused: कौन-कौन गिरफ्तार? आरोपियों की भूमिका

1. कौन है टिन्नू यादव (राम शंकर यादव)?

  • पूरा नाम: राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव
  • पहचान: मामले का सबसे चर्चित आरोपी। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का करीबी सहयोगी बताया जाता है। चर्चा है कि वह पहले ऑटो चालक था, बाद में राम मंदिर परिसर में दानपात्र प्रबंधन और श्रद्धालुओं की दर्शन व्यवस्था से जुड़ गया।

जिम्मेदारी:

  • दानपात्रों की देखरेख करना।
  • दानपात्रों को बेसमेंट स्थित गणना कक्ष तक सुरक्षित पहुंचाना।

आरोप:

  • दानपात्रों से कथित रूप से करोड़ों रुपये के गबन का आरोप।
  • अयोध्या और आसपास के जिलों में कथित तौर पर कई संपत्तियां बनाने का आरोप।
  • SIT रिपोर्ट में दान प्रबंधन से जुड़ी कथित अनियमितताओं का प्रमुख आरोपी।

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2. कौन है लवकुश मिश्रा?

  • पूरा नाम: लवकुश मिश्रा
  • पहचान: राम मंदिर के कैश काउंटिंग स्टाफ का सदस्य। दान प्रबंधन व्यवस्था में कार्यरत था।

जिम्मेदारी:

  • चढ़ावे में आई नकदी की गिनती करने वाली टीम का सदस्य।
  • दान राशि की काउंटिंग प्रक्रिया में शामिल रहना।

आरोप:

  • चढ़ावे के रुपये चोरी करने का आरोप।
  • चोरी की रकम से करोड़ों रुपये की संपत्ति बनाने का आरोप।
  • पुलिस के अनुसार उसके घर से करीब 12 लाख रुपये बरामद हुए।

3. कौन है अनुकल्प मिश्रा?

  • पूरा नाम: अनुकल्प मिश्रा
  • पहचान: राम मंदिर प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा कर्मचारी।

जिम्मेदारी:

  • गणना कक्ष में दान राशि की गिनती करना।
  • नकदी के सत्यापन और गणना प्रक्रिया में शामिल रहना।

आरोप:

  • गणना कक्ष से कथित रूप से नकदी निकालने का आरोप।
  • रुपये बाथरूम में छिपाने का आरोप।
  • अवैध कमाई से लाखों रुपये की संपत्तियां बनाने का आरोप।

4. कौन है अविनाश शुक्ला?

  • पूरा नाम: अविनाश शुक्ला
  • पहचान: राम मंदिर दान प्रबंधन व्यवस्था से जुड़ा कर्मचारी।

जिम्मेदारी:

  • दान में आए रुपये गणना कक्ष तक पहुंचाना।
  • नकदी की गिनती प्रक्रिया में सहयोग करना।

आरोप:

  • दान राशि की चोरी में शामिल होने का आरोप।
  • अयोध्या और आसपास संपत्तियां खरीदने का आरोप।
  • SIT रिपोर्ट के बाद FIR में नामजद।

5. कौन है मनीष कुमार यादव?

  • पूरा नाम: मनीष कुमार यादव
  • पहचान: राम मंदिर की दान गणना व्यवस्था से जुड़ा कर्मचारी।

जिम्मेदारी:

  • दानपात्रों से निकले चढ़ावे की गिनती करना।
  • नकदी के रिकॉर्ड तैयार करने में सहयोग देना।

आरोप:

  • मंदिर के चढ़ावे की चोरी करने का आरोप।
  • पुलिस के अनुसार उसके घर से करीब 36 लाख रुपये बरामद हुए।
  • FIR में नामजद आरोपी।

6.कौन है रामाशंकर मिश्रा?

  • पूरा नाम: रामाशंकर मिश्रा
  • पहचान: राम मंदिर प्रबंधन व्यवस्था से जुड़े कर्मी।

जिम्मेदारी:

  • दानपात्रों को गणना कक्ष तक पहुंचाना।
  • दानपात्रों की निगरानी करना।

आरोप:

  • अन्य आरोपियों के साथ मिलकर दान में आए रुपयों की कथित हेराफेरी।
  • दान संग्रह प्रक्रिया में अनियमितताओं में शामिल होने का आरोप।

7. सुभाष चंद्र श्रीवास्तव

  • पूरा नाम: सुभाष चंद्र श्रीवास्तव
  • पहचान: सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी। राम मंदिर में कैश काउंटिंग स्टाफ के प्रभारी के रूप में कार्यरत थे।

जिम्मेदारी:

  • पूरी कैश काउंटिंग टीम की निगरानी।
  • नकदी की गिनती प्रक्रिया का पर्यवेक्षण।
  • स्टाफ का संचालन और नियंत्रण।

आरोप:

  • निगरानी में कथित लापरवाही।
  • दान राशि की चोरी में संलिप्तता का आरोप।
  • SIT रिपोर्ट में नाम आने के बाद FIR दर्ज।

8. कौन है करुणेश पांडेय?

पहचान: राम मंदिर प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कर्मचारी।

जिम्मेदारी:

  • दान में आए रुपये गणना कक्ष तक पहुंचाना।
  • नकदी की गिनती में शामिल रहना।

आरोप:

  • दान राशि की चोरी में शामिल होने का आरोप।
  • कथित रूप से चोरी के पैसे से अयोध्या के आसपास संपत्तियां खरीदने का आरोप।
  • SIT रिपोर्ट के बाद गिरफ्तार आरोपियों में शामिल।

FIR में किन धाराओं में केस दर्ज? कानूनी प्रावधान

FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की निम्न धाराओं के तहत दर्ज हुई है: 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61, 3(5) (कुछ रिपोर्टों में 305 और PC Act की धारा 13(1)(a) भी)।

विस्तार से समझें-

किन धाराओं में केस हुआ, जानिए कितनी सजा

धारा कब लगती है अधिकतम सजा का प्रावधान
धारा 306 BNS कर्मचारी/सेवक द्वारा चोरी 7 साल तक की जेल और जुर्माना
धारा 316(5) BNS गंभीर विश्वासघात (सौंपी गई संपत्ति का गलत इस्तेमाल) उम्रकैद या 10 साल तक की जेल और जुर्माना
धारा 317(4) BNS चोरी की संपत्ति को बार-बार रखना या उसका कारोबार करना उम्रकैद या 10 साल तक की जेल और जुर्माना
धारा 317(5) BNS चोरी की संपत्ति छिपाने या ठिकाने लगाने में मदद करना 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों
धारा 61 BNS आपराधिक साजिश साजिश में शामिल अपराध के अनुसार सजा तय होती है
धारा 3(5) BNS संयुक्त जिम्मेदारी (कई लोगों द्वारा मिलकर अपराध करना) सभी आरोपियों पर समान रूप से जिम्मेदारी और सजा लागू होती है

सजा का प्रावधान और अभी स्थिति

अभी किसी को सजा नहीं हुई है। सभी 8 आरोपी गिरफ्तार हैं, पूछताछ चल रही है, आज कोर्ट में पेश किए जाएंगे। कोर्ट पुलिस रिमांड मांगेगा (आमतौर पर 7-14 दिन शुरुआत में)। चार्जशीट दाखिल होने के बाद ट्रायल शुरू होगा।

SIT जांच क्या कहती है? आगे क्या?

SIT ने 150 से ज्यादा संदिग्धों की पहचान की, 25 पर कार्रवाई संभावित। प्रारंभिक रिपोर्ट में 'मजबूत सिफारिशें'। जांच अब सिर्फ 8 तक सीमित नहीं, सुपरवाइजर्स, कस्टोडियन और उच्च अधिकारियों की भूमिका भी जांचे जा रहे हैं।

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