Ram Mandir चंदा चोरी में अब तक FIR क्यों नहीं? VHP की 4 मांगों से हलचल, अब PMO ने भी मांगा चढ़ावे का हिसाब!
Ram Mandir Chanda Chori Row: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में कथित गड़बड़ियों को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अब इस मामले में विश्व हिंदू परिषद (VHP) भी खुलकर सामने आ गई है। संगठन ने न सिर्फ मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है, बल्कि दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज कर फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सुनवाई कराने की भी बात कही है। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब खुद प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने राम मंदिर ट्रस्ट से चंदे, वित्तीय लेनदेन और जमीनों की खरीद-फरोख्त का पूरा लेखा-जोखा मांग लिया।
मगर हैरान करने वाली बात यह है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने SIT जांच का हवाला देते हुए फिलहाल पीएमओ को यह वित्तीय जानकारी देने से साफ मना कर दिया है। ऐसे में आइए जानते हैं कि VHP की क्या-क्या मांगे हैं।

VHP का बड़ा संदेश, VHP की चार प्रमुख मांगें
राम मंदिर आंदोलन में सबसे बड़ी भूमिका निभाने वाली विश्व हिंदू परिषद (VHP) चंदे के नाम पर लग रहे इन दागों से बेहद आहत और सख्त नजर आ रही है। वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने सोशल मीडिया पर भगवान राम के भव्य मंदिर की तस्वीर के साथ एक पोस्टर जारी कर सार्वजनिक रूप से अपनी गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने मंदिर की पवित्रता और जन-आस्था की रक्षा के लिए सीधे तौर पर अधिकारियों के सामने 4 बेहद कड़ी मांगें रख दी है।
- तुरंत दर्ज हो एफआईआर (FIR): इस पूरे कथित घोटाले और हेराफेरी की कानूनी शुरुआत करने के लिए बिना किसी देरी के फौरन एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए।
- समय सीमा में पूरी हो जांच: मंदिर के चंदे से जुड़ी इस संवेदनशील जांच की रफ्तार को तेज किया जाए और इसे अधिकतम 4 महीने के भीतर पूरा किया जाए।
- फास्ट-ट्रैक कोर्ट में हो सुनवाई: इस मामले को सामान्य अदालतों के भरोसे न छोड़कर एक विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट (Fast-Track Court) का गठन किया जाए, जहां रोजाना (Day-to-Day) सुनवाई हो।
- दोषियों को मिले कड़ी सजा: आस्था के केंद्र में सेंध लगाने वाले जो भी लोग दोषी पाए जाएं, उन्हें सख्त से सख्त कानूनी सजा मिलनी चाहिए ताकि आगे कोई ऐसा करने की हिम्मत न करे।
Ayodhya Ram Mandir Donation Scam: करोड़ों का चढ़ावा गायब होने का दावा और SIT की एंट्री
अयोध्या राम मंदिर के निर्माण और उसकी देखरेख के लिए साल 2020 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एक विशेष ट्रस्ट का गठन किया गया था। रामलला के दर्शन के लिए उमड़ने वाली भीड़ ने मंदिर के दान पात्रों और देशव्यापी 'समर्पण निधि' अभियान के जरिए अरबों रुपए की नकदी, सोना, चांदी और अन्य कीमती सामान ट्रस्ट को सौंपे थे। लेकिन पिछले कुछ समय से इस फंड में बड़ी गड़बड़ी के दावे किए जा रहे हैं।
शुरुआती दौर में यह अनुमान लगाया गया था कि करीब 7 से 7.5 करोड़ रुपए का फंड गायब हुआ है, लेकिन विपक्षी दलों और स्थानीय स्तर पर उठ रहे दावों के मुताबिक यह हेराफेरी सैकड़ों करोड़ रुपए की हो सकती है। इस मामले पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने भी गंभीर आरोप लगाते हुए अदालतों से दखल देने की मांग की थी।
विवाद बढ़ता देख उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने आनन-फानन में 13 जून को एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत की अगुवाई वाली एसआईटी ने अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट गृह विभाग को सौंप दी है, जिसके बाद हड़कंप और बढ़ गया है।
बीजेपी नेता की शिकायत पर हरकत में आया PMO
इस पूरे मामले को दिल्ली तक पहुंचाने वाले कोई और नहीं बल्कि अयोध्या के ही स्थानीय बीजेपी नेता डॉ. रजनीश सिंह हैं। रजनीश सिंह ने मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन, समर्पण निधि, दान में मिले सोने-चांदी के आभूषणों के स्टॉक, जमीनों के सौदों और ऑडिट रिपोर्ट में पारदर्शिता लाने के लिए सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख दिया था। उन्होंने 9 जून और 12 जून को लगातार दो बार पीएमओ को शिकायत भेजी थी।
बीजेपी नेता की इस गंभीर शिकायत का संज्ञान लेते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने मामले को जांच के लिए अयोध्या जिला प्रशासन के पास भेज दिया। जिला प्रशासन के अधिकारियों ने जब पीएमओ के निर्देश पर राम मंदिर ट्रस्ट से संपर्क किया और उनसे बैंक खातों की डिटेल, जमीनों के दस्तावेज और आय-व्यय का पूरा ब्योरा मांगा, तो ट्रस्ट के शीर्ष अधिकारियों के तेवर पूरी तरह बदले हुए नजर आए।
चंपत राय का इनकार, कहा- SIT जांच के बीच नहीं देंगे रिकॉर्ड
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अयोध्या के एडीएम (कानून-व्यवस्था) इंद्रकांत द्विवेदी ने एडीएम (प्रशासन) विशु राजा को लिखे अपने आधिकारिक पत्र में इस बात का साफ तौर पर खुलासा किया है कि जब प्रशासन ने पीएमओ की ओर से मांगी गई जानकारियों के लिए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से संपर्क किया, तो उन्होंने साफ तौर पर कोई भी ब्योरा देने से मना कर दिया।
चंपत राय ने इसके पीछे दलील दी है कि चूंकि इस समय उत्तर प्रदेश सरकार की एसआईटी (SIT) पूरे मामले की गहन जांच कर रही है और जांच पैनल ही सभी जरूरी रिकॉर्ड्स और वित्तीय दस्तावेजों को इकट्ठा कर रहा है, इसलिए इस मोड़ पर किसी भी बाहरी एजेंसी या प्रशासन को ये आंकड़े नहीं दिए जा सकते।
उधर एसआईटी प्रमुख विजय विश्वास पंत का कहना है कि उनकी जांच अभी चल रही है और वे अगले 10 से 15 दिनों के भीतर अपनी अंतिम गोपनीय रिपोर्ट सरकार को सौंप देंगे। अब देखना यह होगा कि वीएचपी की ओर से बढ़ रहे दबाव और पीएमओ की इस सक्रियता के बाद अयोध्या के इस सबसे बड़े चंदा विवाद का ऊंट किस करवट बैठता है।














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