Bangladesh J-10CE Fighter Jet Deal: चीन से J-10CE खरीदेगा बांग्लादेश, भारत के लिए क्यों बढ़ा 'टू-फ्रंट' खतरा
Chinese Jet In Bangladesh: भारत का पूर्वी पड़ोसी बांग्लादेश अपनी एयरफोर्स को आधुनिक बनाने के लिए चीन से 24 J-10CE फाइटर जेट खरीदने पर विचार कर रहा है। इस डिफेंस डील को लेकर दक्षिण एशिया में काफी चर्चा हो रही है। माना जा रहा है कि इस मुद्दे पर बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की 24 से 26 जून तक होने वाली चीन यात्रा के दौरान बातचीत हो सकती है।
अगर यह डील होती है, तो पाकिस्तान के बाद बांग्लादेश दुनिया का दूसरा ऐसा देश बन जाएगा जिसके पास चीन का J-10CE फाइटर जेट होगा। इस डील की कुल कीमत लगभग 2.2 बिलियन डॉलर बताई जा रही है। इसमें केवल जेट ही नहीं, बल्कि पायलट ट्रेनिंग, वेपस सिस्टम और रखरखाव का पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर भी शामिल होगा। भारत के लिए यह सौदा इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे पहली बार उसकी पूर्वी और पश्चिमी दोनों सीमाओं पर एक जैसे चीनी फाइटर जेट दिखाई दे सकते हैं। जो सुरक्षा के नजरिए से अच्छा तो नहीं कहा जा सकता।

क्या है J-10CE और क्यों माना जाता है इसे खतरनाक?
J-10CE दरअसल चीन के फाइटर जेट J-10C का एक्सपोर्ट वर्जन है। यह 4.5 जनरेशन का मल्टीरोल फाइटर जेट है, जिसे हवा से हवा और हवा से जमीन दोनों तरह के मिशनों के लिए डिजाइन किया गया है। इस जेट में कैनार्ड डेल्टा विंग डिजाइन का इस्तेमाल किया गया है, जिससे इसकी स्पीड और युद्ध क्षमता बढ़ जाती है। इसमें चीन का WS-10B आफ्टरबर्निंग टर्बोफैन इंजन लगा है, जो इसे मैक 2 तक की स्पीड देता है।
J-10CE की सबसे बड़ी ताकत इसका AESA (Active Electronically Scanned Array) रडार है। यह रडार दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के बावजूद एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है। इसके अलावा इसमें PL-15 जैसी लंबी दूरी की Beyond Visual Range (BVR) मिसाइलें भी लगाई जा सकती हैं।
बांग्लादेश एयरफोर्स अपनी "Forces Goal 2030" योजना के तहत तेजी से मॉर्डनाइज कर रही है। मौजूदा वक्त में उसके पास पुराने चीनी F-7/J-7 फाइटर जेट और कुछ रूसी MiG-29 मौजूद हैं। इन जेटों की उम्र बढ़ने के कारण बांग्लादेश लंबे समय से किसी आधुनिक फाइटर जेट की तलाश में था। ऐसे में J-10CE उसे तुलनात्मक कम कीमत में आधुनिक तकनीक और बेहतर युद्ध क्षमता देने वाला विकल्प दिखाई दे रहा है।

भारत की चिंता आखिर क्या है?
भारत के डिफेंस एक्सपर्ट इस संभावित सौदे पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि पाकिस्तान पहले से ही J-10CE का इस्तेमाल कर रहा है। मई 2025 में हुए "ऑपरेशन सिंदूर" के दौरान पाकिस्तान ने इन जेटों का उपयोग किया था। हालांकि उस समय पाकिस्तान द्वारा भारतीय रफाल जेटों को मार गिराने के दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया गया था। भारतीय रक्षा दस्तावेजों के मुताबिक भारतीय एयरफोर्स के सभी 36 रफाल जेट पूरी तरह सुरक्षित और ऑपरेशनल थे।
इसके बावजूद रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की दोनों सीमाओं पर एक जैसी चाइनीज डिफेंस सिस्टम की मौजूदगी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इससे चीन को क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत और तकनीकी प्रभाव बढ़ाने का अवसर मिल सकता है।
लालमोनीरहाट एयरबेस को लेकर भी बढ़ी चिंता
भारत की चिंता केवल फाइटर जेट तक सीमित नहीं है। बांग्लादेश के लालमोनीरहाट एयरबेस के पुनर्निर्माण में चीन की संभावित भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यह एयरबेस भारत के बेहद संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर के नजदीक स्थित है। सिलीगुड़ी कॉरिडोर को "चिकन नेक" भी कहा जाता है क्योंकि यह भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है।
हालांकि 8 अगस्त 2025 को विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में कहा था कि बांग्लादेशी सेना ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल लालमनीरहाट एयरबेस के सैन्य उपयोग की कोई योजना नहीं है। इसके बावजूद भारत इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है।
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