Ram Mandir चंदा चोरी: चंपत राय, अनिल मिश्रा और ट्रस्टी के अयोध्या छोड़ने पर रोक! SIT को किन-किन बातों का शक?

Ayodhya Ram Mandir SIT Investigation:अयोध्या के भव्य राम मंदिर में रामलला को मिलने वाले दान और चढ़ावे में चोरी के मामले ने अब एक बेहद गंभीर रूप अख्तियार कर लिया है। इसकी जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने रविवार (21 जून) को एक बेहद कड़ा कदम उठाया है। एसआईटी ने राम मंदिर ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों और मंदिर प्रबंधन से जुड़े मुख्य लोगों को सख्त हिदायत दी है कि वे बिना अनुमति के किसी भी कीमत पर अयोध्या छोड़कर बाहर न जाएं।

SIT सोमवार (22 जून) को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप सकती है। रविवार शाम जांच टीम सीएम से मुलाकात के लिए पहुंची थी, लेकिन पहले से तय बैठकों और मानसून सत्र से जुड़ी तैयारियों में व्यस्त रहने के कारण यह मुलाकात नहीं हो सकी। SIT ने जांच के दौरान जुटाए गए अहम दस्तावेजों, बयान और डिजिटल सबूतों को सात पेन ड्राइव में सुरक्षित किया है। छह दिनों तक चली पड़ताल में करीब 150 संदिग्ध लोगों के नाम जांच के दायरे में आए हैं। इनमें से लगभग 25 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

Ram Mandir SIT Investigation

जांच टीम जिन लोगों से पूछताछ कर चुकी है, उन्हें अगले आदेश तक अयोध्या छोड़कर कहीं बाहर नहीं जाने की हिदायत दी गई है। इस सूची में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा समेत कई अन्य अहम नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं। इन सभी के अयोध्या छोड़ने पर रोक लगाई गई है।

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SIT Investigation Update: जांच में आखिर क्या हो रहा है?

13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। इस टीम में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं।

सूत्रों के मुताबिक एसआईटी लगातार अपनी जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज रही है। जांच से जुड़े दस्तावेजों और पूछताछ के रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखा गया है।

अब इन सभी तथ्यों को अंतिम रूप देकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने पेश किया जाना है। इसी क्रम में एसआईटी ने लखनऊ रवाना होने से पहले ट्रस्ट पदाधिकारियों और मंदिर प्रशासन से जुड़े कुछ लोगों को अयोध्या नहीं छोड़ने के निर्देश दिए।

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सोना-चांदी के रिकॉर्ड में क्यों उठे सवाल?

जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि एसआईटी को भगवान राम को चढ़ाए गए सोने, चांदी के आभूषणों, हीरों और अन्य कीमती पत्थरों के रिकॉर्ड में कथित विसंगतियां मिली हैं। बताया जा रहा है कि पूछताछ के दौरान कुछ जिम्मेदार पदाधिकारी इन बहुमूल्य वस्तुओं की एंट्री, स्टोरेज और हिसाब-किताब को लेकर स्पष्ट और संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। यही वजह है कि जांच का बड़ा हिस्सा अब चढ़ावे के प्रबंधन और रिकॉर्ड सिस्टम पर केंद्रित हो गया है।

सीएम कार्यालय तक कैसे पहुंच रही है जांच की जानकारी?

सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान तैयार की जा रही दैनिक रिपोर्टों को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा गया है। इनमें पूछताछ, दस्तावेजों की जांच और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल हैं। बताया जा रहा है कि एसआईटी अपनी जांच रिपोर्ट नियमित रूप से मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज रही है। फाइनल रिपोर्ट को तैयार करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपा जाएगा।

सिर्फ चढ़ावा नहीं, जमीन सौदे भी जांच के घेरे में

यह जांच केवल दान राशि तक सीमित नहीं है। एसआईटी मंदिर ट्रस्ट द्वारा अलग-अलग चरणों में की गई जमीन खरीद और निर्माण सामग्री की खरीद प्रक्रिया की भी समीक्षा कर रही है।

पहले भी आरोप लगाए जाते रहे हैं कि कुछ जमीनें बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत पर खरीदी गई थीं। इस मुद्दे को समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी समेत कई राजनीतिक दलों ने प्रमुखता से उठाया था। अब जांच एजेंसी इन सभी सौदों से जुड़े दस्तावेजों और भुगतान प्रक्रिया की भी पड़ताल कर रही है।

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अब आगे क्या हो सकता है?

फिलहाल जांच निर्णायक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। एसआईटी रिकॉर्ड, चढ़ावे के हिसाब-किताब, जमीन खरीद और निर्माण से जुड़े पहलुओं को जोड़कर पूरी तस्वीर समझने की कोशिश कर रही है।

सबसे अहम बात यह है कि ट्रस्ट और मंदिर से जुड़े कुछ लोगों को अयोध्या नहीं छोड़ने का निर्देश दिया गया है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में पूछताछ का दायरा और बढ़ सकता है। अब सभी की नजर एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी है, जो यह तय करेगी कि आरोपों में कितना दम है और आगे किस तरह की कार्रवाई की जरूरत है।

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