12वीं की छात्रा ने स्कूल वॉशरूम में बच्चे को जन्म दिया, इमारत से क्यों फेंका? चचेरे भाई का पर्दाफाश
Hyderabad Girl Baby Delivers on School: एक सरकारी आवासीय स्कूल-छात्रावास में हुई यह घटना ने पूरे तेलंगाना को स्तब्ध कर गई है। 19 वर्षीय इंटरमीडिएट द्वितीय वर्ष की छात्रा ने मंगलवार तड़के अपने हॉस्टल के वॉशरूम में बच्चे को जन्म दिया। कथित तौर पर नवजात शिशु के रोने की आवाज को दबाने के लिए उसका मुंह दबाया और फिर इमारत की दूसरी मंजिल से फेंक दिया। नवजात की मौके पर ही मौत हो गई।
गोलकोंडा पुलिस ने इस मामले में छात्रा के खिलाफ BNS की धारा 103(1) (हत्या) और 238 (साक्ष्य नष्ट करने) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि लड़की अपने 22 वर्षीय चचेरे भाई के साथ रिश्ते में थी, जो शादी करने से इनकार कर रहा था। आइए विस्तार से जानते हैं कि आखिर क्यों बच्चे को मार डाला?

घटना का क्रम: क्या हुआ उस रात?
तेलंगाना माइनॉरिटी रेसिडेंशियल एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस सोसाइटी (TMREIS) के गोलकोंडा स्थित रेसिडेंशियल जूनियर कॉलेज में यह घटना मंगलवार (23 जून) सुबह करीब 3 से 4:30 बजे के बीच हुई। छात्रा ने अकेले ही वॉशरूम में डिलीवरी दी। जब नवजात रोने लगा तो उसने कथित तौर पर मुंह दबाकर दम घोंटने की कोशिश की। इसके बाद वेंटिलेटर या खिड़की से बाहर फेंक दिया। शिशु नीचे गिरकर घायल हो गया और उसकी मौत हो गई।
सुबह प्रधानाचार्य रूटीन चेकिंग के दौरान इमारत के बाहर नवजात शिशु का शव देखा। तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। CCTV फुटेज में छात्रा को उस समय वॉशरूम की तरफ जाते देखा गया। पूछताछ में उसने घटना स्वीकार कर ली। लड़की को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक साक्ष्य जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
पर्दे के पीछे का राज: प्रेम, डर और सामाजिक दबाव
पुलिस सूत्रों के अनुसार, छात्रा लगभग 8 महीने की गर्भवती थी। परिवार, स्कूल स्टाफ या हॉस्टल वार्डन को इसकी कोई जानकारी नहीं थी। हॉस्टल में मेडिकल सुपरवाइजर का पद खाली पड़ा था, जो लापरवाही की ओर इशारा करता है।
मुख्य राज उसके चचेरे भाई (22 वर्ष) से संबंध था। दोनों के बीच लंबे समय से रिश्ता चल रहा था। जब गर्भावस्था हुई तो लड़की ने शायद शादी की उम्मीद की, लेकिन लड़का इनकार कर रहा था। परिवार में सामाजिक प्रतिष्ठा, सम्मान और 'इज्जत' का डर इतना गहरा था कि उसने गर्भ छिपाए रखा और अकेले डिलीवरी का फैसला किया।
तेलंगाना के रेसिडेंशियल स्कूलों में क्या चल रहा है?
तेलंगाना सरकार माइनॉरिटी, SC, ST और BC छात्रों के लिए बड़े पैमाने पर रेसिडेंशियल स्कूल और जूनियर कॉलेज चलाती है। इनमें हजारों लड़कियां रहकर पढ़ती हैं। ये स्कूल गरीब और पिछड़े तबके के बच्चों को बेहतर शिक्षा देते हैं, लेकिन सुरक्षा, काउंसलिंग और मेडिकल सुविधाओं पर सवाल उठते रहे हैं।
- हॉस्टल में लड़कियों की निगरानी के लिए वार्डन और मेडिकल स्टाफ जरूरी।
- नियमित हेल्थ चेकअप और मेंटल हेल्थ काउंसलिंग की कमी।
- बाहरी संपर्क सीमित होने के बावजूद सोशल मीडिया और फोन से संबंध बनना आम।
यह घटना पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ी करती है। क्या इतने बड़े हॉस्टल सिस्टम में लड़कियों की गोपनीयता और सुरक्षा का संतुलन बन पा रहा है?
कानूनी पहलू: क्या सजा हो सकती है?
भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत:
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धारा 103(1): हत्या - उम्रकैद या फांसी का प्रावधान।
- धारा 238: साक्ष्य नष्ट करना।
चूंकि नवजात शिशु था, कोर्ट 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' मानते हुए सख्त सजा दे सकता है। लेकिन लड़की की उम्र (19 वर्ष), मानसिक स्थिति और परिस्थितियां (डर, दबाव) कोर्ट में मिटिगेटिंग फैक्टर बन सकते हैं।
पुलिस अब चचेरे भाई की भूमिका की भी जांच कर रही है। अगर उसने गर्भावस्था जानते हुए सहयोग नहीं किया या धमकाया तो POCSO या अन्य धाराएं भी लग सकती हैं।
एक दुखद चेतावनी
हैदराबाद की यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि समाज की विफलता का दर्पण है। एक 19 वर्षीय लड़की इतनी मजबूर हुई कि उसने अपना बच्चा मार डाला। प्रेम, डर, कलंक और अकेलेपन ने उसे इस कगार पर पहुंचा दिया।
पुलिस जांच पूरी होने के बाद सच्चाई सामने आएगी। लेकिन अब सवाल यह है कि क्या हम ऐसी घटनाओं को रोक पाएंगे? क्या रेसिडेंशियल स्कूल वाकई सुरक्षित और समावेशी बन पाएंगे? यह कहानी सिर्फ एक लड़की और एक नवजात की नहीं , यह हमारे समाज की मानसिकता, शिक्षा व्यवस्था और परिवार व्यवस्था पर सवाल है। जागरूकता ही समाधान है।













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