दिल्ली में 11 साल की बच्ची के रेप केस में बड़ा खुलासा,आरोपी कैब ड्राइवर निकला नपुंसक, फिर किया ये कांड!

Delhi Rape-Murder Case: दिल्ली में 11 साल की बच्ची के अपहरण, यौन हिंसा और हत्या के मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई ऐसे तथ्य सामने आ रहे हैं जिन्होंने पूरे मामले को और भी ज्यादा भयावह बना दिया है। दिल्ली पुलिस के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, मासूम को अगवा करने वाला आरोपी कैब ड्राइवर शारीरिक संबंध बनाने में पूरी तरह नाकाम यानी 'इरेक्टाइल डिस्फंक्शन' (Erectile Dysfunction) बीमारी से पीड़ित है। मेडिकल जांच में उसकी नपुंसकता की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है।

पुलिस की पूछताछ में आरोपी ने खुद कबूला है कि उसने चलती गाड़ी में मासूम के साथ रेप करने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन अपनी शारीरिक कमजोरी के कारण वह ऐसा कर नहीं सका। इसके बाद जब बच्ची चिल्लाने लगी, तो पकड़े जाने के डर और गुस्से में उसने मासूम की बेरहमी से जान ले ली।

Delhi Rape-Murder Case

फुटपाथ से सोते हुए उठाया, पिता डंडा लेकर पीछे भागे

यह दिल दहला देने वाली वारदात सोमवार (22 जून) के तड़के सुबह की है। बिहार का रहने वाला एक बेहद गरीब परिवार दिल्ली के महरौली इलाके में फुटपाथ पर सोया हुआ था। इस परिवार में माता-पिता, दो बहनें और भाई शामिल थे। किराया न चुका पाने के कारण उन्हें मकान खाली करना पड़ा था और वे सड़क किनारे सोने को मजबूर थे। तभी वहां एक कमर्शियल पीली नंबर प्लेट वाली कैब आकर रुकी।

गाड़ी चला रहा आरोपी बाशु कुमार सिंह (जिसे कुछ जगहों पर बबलू भी कहा जा रहा है) ने चुपके से गाड़ी का पिछला दरवाजा खोला। उसने परिवार के बीच सो रही 11 साल की मासूम बच्ची को गोद में उठाया और पिछली सीट पर डाल दिया। जैसे ही गाड़ी आगे बढ़ी, बच्ची की आंख खुल गई और वह 'पापा-पापा' चिल्लाने लगी। चीख सुनकर पिता की नींद खुली, उन्होंने हिम्मत दिखाते हुए गाड़ी के पीछे दौड़ लगाई और डंडे भी फेंके, लेकिन रफ्तार तेज होने के कारण वहशी कातिल बच्ची को अगवा कर भागने में कामयाब रहा।

फुटपाथ से किडनैपिंग, रेप और मर्डर करने वाले कैब ड्राइवर का एनकाउंटर, भागने की फिराक में था कैब ड्राइवर
फुटपाथ से किडनैपिंग, रेप और मर्डर करने वाले कैब ड्राइवर का एनकाउंटर, भागने की फिराक में था कैब ड्राइवर

12 किलोमीटर तक घुमाता रहा, फिर जंगल में उतारा मौत के घाट

आरोपी बाशु कुमार सिंह मासूम बच्ची को गाड़ी की पिछली सीट पर बंधक बनाकर फतेहपुर बेरी के पास मंडी रोड की तरफ करीब 10 से 12 किलोमीटर (कुछ दावों के मुताबिक करीब 20 किलोमीटर) तक घूमाता रहा। गाड़ी के अंदर ही उसने बच्ची के साथ हैवानियत करने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहा। बच्ची लगातार शोर मचा रही थी, जिससे घबराकर उसने बच्ची को अंजाम भुगतने की धमकी दी।

इसके बाद वह गाड़ी को फरीदाबाद-गुरुग्राम बॉर्डर के पास एक सुनसान जंगली इलाके में ले गया। वहां उसने मासूम की बेरहमी से हत्या कर दी और पहचान छुपाने के लिए उसके शव को पत्थरों के ढेर के नीचे दबा दिया। इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने के बाद वह चुपचाप गुरुग्राम स्थित अपने किराए के कमरे पर आया, कपड़े बदले और कुछ ही घंटों बाद दोबारा दिल्ली की सड़कों पर कैब चलाने लगा, मानो कुछ हुआ ही न हो।

CCTV और GPS से पकड़ाया, एनकाउंटर में पैर में लगी गोली

दिल्ली पुलिस ने इस अंधे कत्ल की गुत्थी को सुलझाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी। पीड़िता के पिता को सिर्फ इतना याद था कि गाड़ी की नंबर प्लेट पीली थी। पुलिस ने इलाके के सैकड़ों सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगाले, टेक्निकल सर्विलांस और जीपीएस (GPS) डेटा की मदद ली। आखिरकार पुलिस ने 24 जून को आरोपी बाशु कुमार सिंह को दबोच लिया।

गिरफ्तारी के बाद पुलिस जब आरोपी को फरीदाबाद-गुरुग्राम रोड पर क्राइम सीन रीक्रिएट (वारदात वाली जगह की शिनाख्त) कराने के लिए ले जा रही थी, तो उसने पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश की। पुलिस ने उसे रुकने की चेतावनी दी, लेकिन जब वह नहीं माना तो पुलिस ने उसके पैर में गोली मार दी। फिलहाल आरोपी पुलिस की कस्टडी में अस्पताल में भर्ती है।

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आरोपी का पुराना क्रिमिनल बैकग्राउंड, 3 बड़ी कैब कंपनियों को नोटिस

जांच में सामने आया है कि आरोपी बाशु कुमार सिंह मूल रूप से बिहार के खगड़िया जिले का रहने वाला है। वह पिछले 5 साल से दिल्ली में रह रहा था। साल 2023 में कैब ड्राइवर बनने से पहले वह एक सिक्योरिटी गार्ड के तौर पर काम करता था। चौंकाने वाली बात यह है कि उस पर बिहार में पहले से ही 5 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से दो मामले तो सीधे-सीधे 'हत्या के प्रयास' (Attempt to Murder) के हैं।

इतने गंभीर क्रिमिनल बैकग्राउंड के बावजूद वह दिल्ली में धड़ल्ले से कमर्शियल कैब चला रहा था। इस लापरवाही को देखते हुए दिल्ली पुलिस अब देश की 3 बड़ी कैब एग्रीगेटर कंपनियों को कानूनी नोटिस भेजने की तैयारी कर रही है। पुलिस यह जानना चाहती है कि इस अपराधी को कंपनी में शामिल करते वक्त उसका पुलिस वेरिफिकेशन और ऑनबोर्डिंग प्रोसेस ठीक से किया गया था या नहीं। इस घटना ने एक बार फिर दिल्ली में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के साथ-साथ कैब ड्राइवरों के वेरिफिकेशन पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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