Mahakumbh 2025: छोटू, खड़ेश्वरी, 20 Kg की चाभी के बाद, रूद्राक्ष बाबा, सिर पर 45 किलो वजन, गजब की तपस्या
Prayagraj Mahakumbh 2025: प्रयागराज में संगम तट पर एक महीने तक चलने वाले महाकुंभ मेले में अनोखी भक्ति के दर्शन हो रहे हैं। भारत समेत दुनिया के कोन- कोने से पहुंचे स्नानार्थियों में संतों की टोलियां भी शामिल हैं। यह महाकुंभ सदियों से संतों के समागम का केंद्र कहा है। इस बार कुंभ मेले में अद्भुत भक्ति के दर्शन हो रहे हैं। छोटू बाबा, खड़ेश्वरी, वर्षों से एक हाथ का त्याग करने वाले हठयोगी, 10 किलो की रामनामी चाभी लेकर संतों के अलावा कई ऐसी रहस्यमयी भक्ति के प्रत्यक्ष दर्शन हो रहे हैं।
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महाकुंभ मेले में अब केवल एक सप्ताह बचा है, भारत और दुनिया भर से हजारों श्रद्धालु और साधु-संत प्रयागराज पहुंचना शुरू हो गए हैं। महाकुंभ में से एक रुद्राक्ष बाबा भी पहुंचे हैं, 108 रुद्राक्ष की माला पहनते हैं, जिसमें कुल 11,000 रुद्राक्ष हैं। इन 11,000 रुद्राक्षों का वजन 30 किलो से भी ज्यादा है। बाबा पर रुद्राक्षों की संख्या बढ़ने से वे अब रुद्राक्ष बाबा के नाम से मशहूर हो गए हैं।

मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, "लोग मुझे रुद्राक्ष बाबा के नाम से जानते हैं। ये 11,000 रुद्राक्ष भगवान शिव के रुद्र हैं। मैं इन्हें बहुत लंबे समय से पहन रहा हूं। ये रुद्र मुझे मेरे उपासकों द्वारा उपहार में दिए गए थे... हर साधु इन रुद्रों को धारण करता है।"
गुजरात के खड़ेश्वर नागा बाबा पिछले 12 वर्षों से लगातार लोगों के कल्याण के लिए खड़े हैं। उन्होंने खुद को सहारा देने के लिए एक झूला बनाया है। उन्होंने अपने इस हठ योग को लेकर मीडिया से कहा की जब तक उनकी सांसें चलती रहेंगी वे तक खड़े रहेंगे। अपनी इस तपस्या के बारे में बात करते हुए कहा, "मैं पहले 12 साल तक खड़ा रहा था.. मैंने उस समय के बाद कुछ आराम किया और मैं इस तपस्या के लिए फिर से तैयार हूं। मैं तब तक खड़ा रहूंगा जब तक मेरी सांसें चलती रहेंगी।"
खड़ेश्वर नागा बाबा ने भारत के युवाओं से पॉलिथीन का उपयोग बंद करने की अपील की। उन्होंने कहा कि अगर हम इसका इस्तेमाल जारी रखेंगे तो हमारे स्वास्थ्य को बहुत नुकसान होगा।"
वहीं प्रयागराज आने वाले संतों में छोटू बाबा शामिल हैं। उन्होंने 32 वर्षों से स्नान नहीं किया है। इसके अलावा महाकुंभ मेले में एक और अद्भुत संत पहुंचे हैं, जो अपने साथ 20 किलोग्राम की चाबी के साथ घूमते हैं। ई- रिक्शा बाबा भी यहां आए हैं, जिन्होंने महाकुंभ में शामिल होने के लिए दिल्ली से लेकर प्रयागराज तक की पूरी यात्रा की।












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